New Delhi News (18 June 2026): यमुना नदी को स्वच्छ और अविरल बनाने की दिशा में लंबे समय से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को आखिरकार नई गति मिल गई है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली के बीच इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर सहमति बन गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह तय किया गया कि परियोजना के जल घटक की कुल लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत खर्च संबंधित छह राज्यों द्वारा साझा किया जाएगा। इस फैसले को यमुना नदी के संरक्षण और क्षेत्रीय जल प्रबंधन के लिए एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
एमओयू के बाद कैबिनेट मंजूरी की तैयारी
बैठक में सभी राज्यों ने यमुना की प्रमुख सहायक नदी टोंस पर बनने वाली किशाऊ जलविद्युत एवं जल भंडारण परियोजना को लागू करने के लिए आपसी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने पर सहमति जताई। समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के बाद इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस अहम बैठक में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित गृह मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। केंद्र सरकार का कहना है कि संवाद और सहमति के माध्यम से वर्षों से लंबित राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का यह प्रयास है।
पानी के बदले बिजली का अनोखा मॉडल
परियोजना को लेकर बैठक में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था पर भी सहमति बनी है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा। बदले में दिल्ली और राजस्थान, किशाऊ जलविद्युत परियोजना से जुड़े बिजली उत्पादन व्यय में हिमाचल प्रदेश के हिस्से का आर्थिक योगदान देंगे। इस नए फॉर्मूले को जल और ऊर्जा संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का उदाहरण माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे यमुना में स्वच्छ जल का प्रवाह बढ़ेगा और नदी के पुनर्जीवन के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की पेयजल और सिंचाई संबंधी आवश्यकताओं को भी पूरा करने में मदद मिलेगी।
236 मीटर ऊंचे बांध से बनेगी 600 मेगावाट बिजली
उत्तराखंड के डाकपत्थर कस्बे से लगभग 45 किलोमीटर ऊपर प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना के तहत 236 मीटर ऊंचा कंक्रीट बांध बनाया जाएगा। इस परियोजना में 150-150 मेगावाट की चार जलविद्युत इकाइयां स्थापित की जाएंगी, जिनके माध्यम से कुल 600 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता विकसित होगी। इसके अलावा बांध में 1324 मिलियन घन मीटर पानी के भंडारण की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे जल संरक्षण, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति को मजबूत आधार मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में जल संकट से निपटने और ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
तीन दशक पुरानी परियोजना को मिली नई रफ्तार
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना का प्रस्ताव कई वर्षों से लंबित था और वर्ष 1998 में इसकी अनुमानित लागत 3566.23 लाख रुपये आंकी गई थी। विभिन्न राज्यों के बीच लागत और जल बंटवारे को लेकर सहमति न बनने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही थी। अब केंद्र सरकार द्वारा जल घटक की 90 प्रतिशत लागत उठाने के निर्णय और सभी संबंधित राज्यों की सहमति बनने के बाद इसके शीघ्र क्रियान्वयन का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। सरकार का मानना है कि यह परियोजना न केवल यमुना नदी के पुनर्जीवन में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि जल सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और अंतरराज्यीय सहयोग का भी एक सफल मॉडल बनकर उभरेगी।
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