शिवसेना (यूबीटी) में टूट की अटकलों ने पकड़ा जोर, समझे पूरा घटनाक्रम

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (17 June 2026): शिवसेना (यूबीटी) में पिछले कुछ दिनों से संभावित टूट की चर्चाओं ने महाराष्ट्र की राजनीति का माहौल गर्म कर दिया था। अटकलें लगाई जा रही थीं कि पार्टी के कई सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के संपर्क में हैं और जल्द ही बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकता है। हालांकि बुधवार को घटनाओं ने अचानक नया मोड़ ले लिया और स्थिति पहले से बिल्कुल अलग नजर आने लगी।

मातोश्री की बैठक से शुरू हुई अटकलें

टूट की चर्चाओं को सबसे ज्यादा बल उस समय मिला जब उद्धव ठाकरे द्वारा मातोश्री में बुलाई गई आपात बैठक में नौ में से केवल चार सांसद ही पहुंचे। बाकी सांसदों की अनुपस्थिति के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और कुछ सांसद अलग रास्ता अपना सकते हैं।

दिल्ली पहुंचे सांसद, लेकिन नहीं हुआ कोई बड़ा कदम

इस बीच खबरें आईं कि कुछ सांसद नई दिल्ली पहुंचे हैं और संभव है कि वे लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर दलबदल से जुड़ी प्रक्रिया शुरू करें। साथ ही यह भी कहा गया कि शिंदे गुट के नेताओं के साथ बैठक हो सकती है। लेकिन दिन भर के घटनाक्रम में ऐसी कोई मुलाकात सामने नहीं आई और न ही स्पीकर को कोई औपचारिक पत्र सौंपा गया।

दो सांसदों के इनकार से बदला पूरा माहौल

इसी दौरान यूबीटी सांसद राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल ने सार्वजनिक रूप से शिंदे गुट में जाने की अटकलों का खंडन कर दिया। दोनों नेताओं के बयान के बाद यह संदेश गया कि पार्टी में जिस बड़े स्तर की टूट की चर्चा हो रही थी, वह तत्काल होती नहीं दिख रही है। इससे राजनीतिक समीकरण अचानक बदल गए।

संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिया स्पष्ट संदेश

बढ़ती अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कुछ सांसद मुंबई में हैं और कुछ दिल्ली में मौजूद हैं, लेकिन फिलहाल वे सभी पार्टी के साथ हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि पार्टी का मूल चुनाव चिन्ह और विचारधारा उद्धव ठाकरे के साथ जुड़ी रही है।

बागी होने वालों को खुली चेतावनी

प्रेस वार्ता के दौरान संजय राउत ने संभावित बागी सांसदों को सख्त संदेश दिया। उनका कहना था कि कई सांसदों ने साईं बाबा, मां भवानी और अपने परिवार की शपथ लेकर पार्टी के साथ रहने का भरोसा दिया है। यदि इसके बावजूद कोई नेता पार्टी छोड़ता है तो उसे राजनीतिक रूप से बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिसे जाना है, वह पहले इस्तीफा देकर जाए।

दलबदल के लिए जरूरी है पर्याप्त संख्या

लोकसभा में यूबीटी के कुल नौ सांसद हैं। दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी अलग गुट को मान्यता पाने के लिए आवश्यक संख्या का समर्थन चाहिए। इसी वजह से केवल कुछ सांसदों के अलग होने से कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती, इसलिए संख्या का गणित भी पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभा रहा है।
फिलहाल टली टूट, लेकिन राजनीति में बना हुआ है सस्पेंस

दिनभर के घटनाक्रम के बाद फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि यूबीटी में तत्काल बड़ी टूट होने जा रही है। बागी बताए जा रहे सांसदों के इनकार, स्पीकर से मुलाकात न होने और शिंदे गुट की ओर से भी कोई औपचारिक कदम सामने न आने के कारण स्थिति पहले की तुलना में शांत होती दिखाई दे रही है। हालांकि महाराष्ट्र की राजनीति में बदलते समीकरणों को देखते हुए आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर सभी की नजर बनी रहेगी।


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