National News (09/06/2026): पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते टकराव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव के चलते घरेलू शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ।
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन निवेशकों में घबराहट का माहौल देखने को मिला। बाजार खुलते ही बिकवाली हावी रही और प्रमुख सूचकांकों ने शुरुआती घंटों में ही बड़ी गिरावट दर्ज की। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 817 अंक टूटकर 73,426 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 257 अंक फिसलकर 23,109 पर खुला।
दिनभर जारी उतार-चढ़ाव और चौतरफा बिकवाली के बीच कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 719 अंक यानी 0.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,524 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 244 अंक यानी 1.04 प्रतिशत लुढ़ककर 23,123 के स्तर पर आ गया।
बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी, धातु (मेटल) और रियल्टी सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला। निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और जोखिम कम करने की रणनीति अपनाने के कारण इन क्षेत्रों में भारी बिकवाली हुई। व्यापक बाजार भी दबाव में रहा और स्मॉलकैप-50 इंडेक्स में लगभग 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
गिरावट के पीछे तीन बड़े कारण
1. ईरान-इजरायल तनाव और महंगा होता कच्चा तेल
विश्लेषकों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई और कॉर्पोरेट लागत दोनों को प्रभावित करती हैं। यही चिंता निवेशकों की बेचैनी का प्रमुख कारण बनी।
2. मजबूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था और डॉलर की मजबूती
हाल के अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने संकेत दिया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अपेक्षा से अधिक मजबूत बनी हुई है। इसके परिणामस्वरूप डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई, जिससे उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का दबाव बढ़ गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय बाजारों में बिकवाली तेज कर दी।
3. रुपये पर दबाव और विदेशी निवेशकों की चिंता
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में कमजोरी ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। कमजोर रुपया आयात लागत बढ़ाने के साथ-साथ विदेशी निवेशकों के लिए जोखिम को बढ़ाता है, जिससे निवेश प्रवाह प्रभावित होता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में हालात सामान्य नहीं होते और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम नहीं होती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रुख अपनाने, जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी जा रही है।
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