चीन ने लौटाया चावल, जापान ने रोके आम; भारतीय कृषि निर्यात को दोहरा झटका
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (09/06/2026): भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक साथ दो बड़े झटकों का सामना करना पड़ रहा है। एशिया के दो प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों—चीन और जापान—द्वारा भारतीय कृषि उत्पादों पर उठाए गए सवालों ने निर्यातकों और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर चीन ने भारतीय गैर-बासमती चावल की कई खेपों को कथित तौर पर आनुवंशिक रूप से संशोधित (GMO) तत्वों की मौजूदगी का हवाला देकर अस्वीकार कर दिया है, वहीं दूसरी ओर जापान ने भारतीय आमों के आयात को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार चीन ने हाल के महीनों में भारतीय गैर-बासमती चावल की कई खेपों को अपने बंदरगाहों से वापस भेज दिया। इसके साथ ही तीन भारतीय निर्यातक कंपनियों के आयात लाइसेंस भी निलंबित कर दिए गए हैं। चीन का दावा है कि निर्यातित चावल में जीएमओ संबंधी अंश पाए गए, जबकि भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि देश में व्यावसायिक स्तर पर जीएम चावल की खेती की अनुमति नहीं है। भारत में वर्तमान में केवल बीटी कपास की व्यावसायिक खेती अधिकृत है।
निर्यात उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि निर्यात से पहले संबंधित खेपों का परीक्षण किया गया था और उन्हें गैर-जीएमओ प्रमाणित भी किया गया था। इसके बावजूद चीन की कार्रवाई ने भारतीय चावल व्यापार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। बड़ी संख्या में कंटेनर फिलहाल निर्यात मंजूरी की प्रतीक्षा में रुके हुए बताए जा रहे हैं।
उधर जापान ने भारतीय आमों के आयात पर रोक लगाकर फलों के निर्यात क्षेत्र को बड़ा झटका दिया है। लगभग दो दशक बाद पहली बार जापान ने भारतीय आमों की खेपों को स्वीकार करने से इनकार किया है। जापानी अधिकारियों द्वारा मार्च 2026 में उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित वैपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) केंद्र का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान धूमन (Fumigation) और कीट नियंत्रण प्रक्रियाओं में कमियां पाए जाने की बात सामने आई। इसके बाद जापान ने 25 मार्च 2026 के बाद जारी प्रमाणपत्रों वाले आमों के आयात को रोक दिया। प्रीमियम किस्मों जैसे अल्फांसो, केसर, लंगड़ा, चौसा और बंगनपल्ली आमों का निर्यात सीधे प्रभावित हुआ है।
जापान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां कृषि उत्पादों के आयात को लेकर अत्यंत सख्त जैव सुरक्षा और क्वारंटीन नियम लागू हैं। विशेष रूप से फल मक्खी (Fruit Fly) जैसे कीटों को लेकर वहां ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जापान की कार्रवाई किसी विशेष आम की गुणवत्ता से अधिक निर्यात प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों के अनुपालन से जुड़ी है।
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों घटनाओं से भारत के कृषि निर्यात की विश्वसनीयता और गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र पर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि भारत सरकार और संबंधित एजेंसियां दोनों देशों के साथ बातचीत कर स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास में जुटी हैं।
कृषि निर्यातकों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो चावल और फलों के निर्यात कारोबार पर असर पड़ सकता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। अब सभी की निगाहें भारत की नियामक एजेंसियों की जांच रिपोर्ट और चीन तथा जापान के साथ चल रही वार्ताओं के नतीजों पर टिकी हैं।
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