“रीजेनरेटिव मेडिसिन” दिमागी चोट के मरीजों के लिए बन रही वरदान, मरीन इंजीनियर आकाश सक्सेना की रिकवरी बनी मिसाल

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News(07 जून 2026): देश में गंभीर दिमागी चोट (ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी-टीबीआई) से जूझ रहे मरीजों के लिए रीजेनरेटिव मेडिसिन और न्यूरो-रिहैबिलिटेशन नई उम्मीद बनकर उभर रहे हैं। राजधानी में आयोजित एक प्रेस वार्ता में विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की मदद से ऐसे मरीजों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार संभव हो रहा है, जिन्हें पहले लंबे समय तक अचेत अवस्था में रहने के कारण बेहद सीमित संभावनाओं वाला माना जाता था।

‘सोसायटी ऑफ रीजेनरेटिव साइंसेज’ द्वारा आयोजित इस प्रेस वार्ता में लखनऊ के मरीन इंजीनियर आकाश सक्सेना की प्रेरणादायक कहानी साझा की गई। आकाश जहाज पर कार्य के दौरान लगभग 15 फीट की ऊंचाई से गिर गए थे, जिसके बाद उन्हें गंभीर मस्तिष्क चोट लगी। कई अस्पतालों में उपचार के बावजूद वे करीब छह महीने तक वेजिटेटिव स्टेट (गहरी अचेत अवस्था) में रहे और अपने परिजनों को पहचानने तथा बातचीत करने में असमर्थ थे।

भारत में टीबीआई एक बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों के अनुसार भारत दुनिया में ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी का सबसे बड़ा बोझ उठाने वाले देशों में शामिल है। देश में हर वर्ष 10 लाख से अधिक लोग गंभीर दिमागी चोट का शिकार होते हैं, जिनमें एक लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। सड़क दुर्घटनाएं ऐसे मामलों का लगभग 60 प्रतिशत कारण हैं। बड़ी संख्या में मरीज स्थायी विकलांगता, संज्ञानात्मक समस्याओं या चेतनाहीन अवस्था में पहुंच जाते हैं।

हाल ही में यह विषय राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आया था, जब 11 मार्च 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने 13 वर्षों से अचेत अवस्था में रह रहे एक व्यक्ति को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दी थी। ऐसे समय में रीजेनरेटिव मेडिसिन से जुड़ी प्रगति चिकित्सा जगत में नई संभावनाओं का संकेत दे रही है।

रीजेनरेटिव मेडिसिन से आया उल्लेखनीय सुधार

जनवरी 2022 में आकाश सक्सेना का मुंबई में रीजेनरेटिव मेडिसिन, व्यापक न्यूरो-रिहैबिलिटेशन और ऑक्सीजन थेरेपी के माध्यम से उपचार शुरू किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार उपचार के बाद उनकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।

उनका ग्लासगो कोमा स्कोर (जीसीएस), जो मरीज की चेतना के स्तर को मापने का मानक पैमाना है, 7 से बढ़कर 15 तक पहुंच गया है। वर्तमान में आकाश स्पष्ट रूप से बातचीत कर पा रहे हैं, स्वयं बैठकर भोजन कर सकते हैं और सहारे से चलने का प्रयास भी कर रहे हैं। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत कर अपनी रिकवरी की यात्रा साझा की।

भारत बन सकता है वैश्विक नेतृत्वकर्ता

संस्था की प्रतिनिधि डॉ. नंदनी ने बताया कि रीजेनरेटिव मेडिसिन के क्षेत्र में भारत तेजी से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में विश्वभर में प्रकाशित 960 शोधपत्रों में से 196 भारत से हैं, जो देश की मजबूत शोध क्षमता को दर्शाते हैं।

उन्होंने बताया कि नई दिल्ली स्थित एम्स और चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर जैसे प्रमुख संस्थान इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुसंधान और उपचार कार्य कर रहे हैं, जिससे भविष्य में लाखों मरीजों को लाभ मिल सकता है।

सरकार से विशेष मांग

सोसायटी ऑफ रीजेनरेटिव साइंसेज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से रीजेनरेटिव मेडिसिन को बढ़ावा देने, इससे जुड़ी नियामकीय बाधाओं को दूर करने तथा इस उपचार पद्धति को आयुष्मान भारत योजना के तहत शामिल करने की मांग की है।

वहीं, आकाश सक्सेना के परिवार ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात कर अपनी संघर्षपूर्ण यात्रा और उपचार से मिले सकारात्मक परिणामों को साझा करने की इच्छा व्यक्त की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रीजेनरेटिव मेडिसिन और न्यूरो-रिहैबिलिटेशन जैसी आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए, तो गंभीर मस्तिष्क चोट से प्रभावित हजारों मरीजों को बेहतर जीवन और पुनर्वास का अवसर मिल सकता है।


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