नई दिल्ली (30 जनवरी, 2025): नई दिल्ली विधानसभा सीट दिल्ली की राजनीति में बेहद अहम मानी जाती है। इस सीट का रोचक इतिहास 1993 से शुरू होता है, जब विधानसभा चुनाव में भाजपा के कीर्ति आज़ाद ने नई दिल्ली विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद कांग्रेस ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की और 1998, 2003 और 2008 में शीला दीक्षित लगातार तीन बार इस सीट से विधायक बनीं, और दिल्ली की मुख्यमंत्री भी रही।
2013 में राजनीतिक समीकरण बदले, जब अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए शीला दीक्षित को हराया। इस चुनाव में केजरीवाल को 44,269 वोट मिले, जबकि शीला दीक्षित 18,405 वोटों के साथ दूसरे और भाजपा के विजेंद्र गुप्ता 17,952 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2015 में यह सीट फिर से चर्चा में रही, जब अरविंद केजरीवाल ने भाजपा की नूपुर शर्मा को बड़े अंतर से हराया। इस चुनाव में केजरीवाल को 57,213 वोट मिले, जबकि नूपुर शर्मा को 25,630 और कांग्रेस की किरण वालिया को केवल 4,781 वोट ही मिल सके।
2020 के चुनाव में भी AAP का दबदबा कायम रहा। अरविंद केजरीवाल ने भाजपा के सुनील कुमार यादव को हराते हुए 46,758 वोट हासिल किए। भाजपा के सुनील यादव को 25,061 और कांग्रेस के रोमेश सभरवाल को मात्र 3,220 वोट मिले।
1993 से अब तक इस सीट पर भाजपा, कांग्रेस और AAP के बीच मुकाबला देखने को मिला है। 2025 के चुनाव में एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस AAP को चुनौती देने की तैयारी में हैं। क्या AAP इस सीट पर अपनी जीत की हैट्रिक जारी रख पाएगी, या कोई नया चेहरा नई दिल्ली की राजनीति में बदलाव लाएगा?
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