विश्व पर्यावरण दिवस 2026: रोती-तड़पती धरती की आवाज सुनने का दिन

डॉ. सुशील द्विवेदी ,पर्यावरणविद्

National News (05 जून 2026): आज 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। वर्ष 2026 के लिए विश्व पर्यावरण दिवस की थीम “प्रकृति के साथ जीना” (Living with Nature) रखी गई है। संयुक्त राष्ट्र ने इस अवसर पर पूरी दुनिया से जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामूहिक रूप से सामना करने की अपील की है। इस वर्ष इस वैश्विक आयोजन की मेजबानी अजरबैजान की राजधानी बाकू को सौंपी गई है।

बाकू में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बिगड़ते जलवायु परिवर्तन, बढ़ते वैश्विक तापमान और पर्यावरणीय संकटों से निपटने के लिए त्वरित एवं ठोस सामूहिक कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अनुसार, धरती न तो बहस करती है और न ही समझौता करती है। बढ़ता समुद्र स्तर, जंगलों में भीषण आग, लू की घटनाएं और तेजी से पिघलते ग्लेशियर उसके स्पष्ट संकेत हैं।

हर वर्ष 5 जून का दिन हमें गंभीर आत्मनिरीक्षण का अवसर प्रदान करता है। विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि धरती के बिगड़ते स्वास्थ्य को सुधारने की चेतावनी और संकल्प का दिन है। आज जब हम वनों की अंधाधुंध कटाई, प्लास्टिक प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे हैं, तब पर्यावरण संरक्षण कोई विकल्प नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की अनिवार्य शर्त बन चुका है।

बढ़ते संकट और हमारी अनदेखी

पिछले कुछ वर्षों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, सूखा और असामयिक बाढ़ जैसी घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि पर्यावरणीय संकट अब कोई दूर का खतरा नहीं, बल्कि वर्तमान की कठोर वास्तविकता है।

मानव गतिविधियों से होने वाले ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के कारण वैश्विक तापमान में 1850-1900 के स्तर की तुलना में लगभग 1.1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। यदि वर्तमान स्थिति बनी रही, तो वर्ष 2100 तक वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की सांद्रता 700 पीपीएम (ppm) से अधिक हो सकती है, जो औद्योगिक क्रांति से पहले के 280 पीपीएम स्तर से कई गुना अधिक होगी।

भारत जैसे विशाल और तेजी से विकसित हो रहे देश में औद्योगिकीकरण और बढ़ते उपभोक्तावाद के कारण अपशिष्ट प्रबंधन, विशेष रूप से सिंगल-यूज प्लास्टिक, एक बड़ी चुनौती बन चुका है। वहीं शहरों के अनियंत्रित विस्तार ने पारंपरिक जलस्रोतों और हरित क्षेत्रों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

विश्व पर्यावरण दिवस 2026

विकास और पर्यावरण में संतुलन जरूरी

यह समय हमें याद दिलाता है कि पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान केवल तात्कालिक उपायों से संभव नहीं हैं। इसके लिए व्यापक और संरचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। हमें संसाधनों के उपयोग और पुनः उपयोग पर आधारित चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

यह समझना आवश्यक है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। कोई भी आर्थिक विकास तब तक स्थायी नहीं हो सकता, जब तक वह पर्यावरण की कीमत पर न किया जाए। आज पर्यावरण संरक्षण की चर्चा केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण और कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को भी शामिल करना होगा।

सामूहिक जिम्मेदारी और समाधान

दशकों से दुनिया जलवायु परिवर्तन की चेतावनियां सुनती आ रही है। विश्व पर्यावरण दिवस का मूल संदेश यही है कि पृथ्वी के भविष्य को केवल सरकारों या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इसमें प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रकृति के साथ खिलवाड़ करके मानव जाति कभी सुरक्षित नहीं रह सकती। आवश्यकता इस बात की है कि हम प्रकृति पर प्रभुत्व स्थापित करने के बजाय उसके साथ सह-अस्तित्व (Co-existence) का भाव अपनाएं। यदि हम आज नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। आइए, इस विश्व पर्यावरण दिवस पर हम सभी यह संकल्प लें कि अपने पर्यावरण को स्वच्छ, सुरक्षित और हरा-भरा बनाए रखने में अपना पूर्ण योगदान देंगे।

(लेखक विज्ञान एवं पर्यावरण मामलों के जानकार हैं।)


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