राजेश एक्सपोर्ट्स में 15 लाख करोड रुपए का किया घोटाला, सोती रही SEBI

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (05 June 2026): दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के अध्यक्ष Pawan Khera ने राजेश एक्सपोर्ट्स मामले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “देश की जनता 15 लाख रुपये खाते में आने की आस में बैठी रही, लेकिन नरेंद्र मोदी के दोस्त राजेश भाई ने 15 लाख करोड़ रुपये का घोटाला कर लिया।” पवन खेड़ा ने मेहुल, विजय, नीरव, ललित और राजेश जैसे नामों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के करीबी बताए जाने वाले कुछ उद्योगपतियों को संरक्षण मिला है और इसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर्स पर बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी और धन के कथित गबन के आरोप लगाए हैं।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस मामले में SEBI ने जांच शुरू करने में ही सात महीने का समय लगा दिया। उनके अनुसार, जब कार्रवाई हुई तब जाकर राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई गई। पवन खेड़ा ने कहा कि मार्च 2024 में एक शेयरधारक द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन तत्कालीन SEBI अध्यक्ष Madhabi Puri Buch ने सात महीने तक उस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। उनका आरोप है कि इसी दौरान कंपनी में निवेश जारी रहा और निवेशकों का जोखिम बढ़ता गया।

पवन खेड़ा ने सरकारी बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India के निवेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में LIC ने राजेश एक्सपोर्ट्स में 1.99 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 10.80 प्रतिशत हो गई। उन्होंने दावा किया कि LIC के अलावा बड़ी संख्या में छोटे निवेशकों ने भी कंपनी में निवेश किया। खेड़ा के अनुसार फरवरी 2023 में राजेश एक्सपोर्ट्स का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 28 हजार करोड़ रुपये था, जो 5 जून 2026 तक घटकर लगभग 3 हजार करोड़ रुपये रह गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस गिरावट के कारण निवेशकों के करीब 25 हजार करोड़ रुपये डूब गए।

कांग्रेस नेता ने कंपनी की कारोबारी गतिविधियों और सरकारी परियोजनाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में राजेश एक्सपोर्ट्स ने 400 मिलियन डॉलर का निवेश कर स्विट्जरलैंड में एक गोल्ड रिफाइनरी का अधिग्रहण किया था, लेकिन उस समय भी पर्याप्त नियामकीय जांच नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि राजेश एक्सपोर्ट्स का मुख्य कारोबार गोल्ड ज्वेलरी और जेम्स क्षेत्र से जुड़ा है तथा उसका ऊर्जा भंडारण क्षेत्र से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। इसके बावजूद 23 मार्च 2022 को Ministry of Heavy Industries ने कंपनी को 18,100 करोड़ रुपये की लागत वाली 5 गीगावाट मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से जुड़ी परियोजना आवंटित कर दी। खेड़ा का आरोप है कि इस निविदा प्रक्रिया में ऊर्जा भंडारण क्षेत्र से जुड़ी सात अन्य कंपनियां भी प्रतिस्पर्धा में थीं, लेकिन काम राजेश एक्सपोर्ट्स को दिया गया।

प्रेस वार्ता में पवन खेड़ा ने यह भी दावा किया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच राजेश एक्सपोर्ट्स ने कागजों पर 15.15 लाख करोड़ रुपये का कारोबार दिखाया, लेकिन किसी भी एजेंसी ने समय रहते इस पर सवाल नहीं उठाया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग करते हुए कहा कि निवेशकों के हितों की रक्षा होनी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि शिकायतों और चेतावनियों के बावजूद संबंधित एजेंसियों ने समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की। कांग्रेस ने इस पूरे मामले को देश के लाखों निवेशकों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।


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