दिल्ली में क्यों नहीं थम रहे इमारत गिरने के मामले?

रंजन अभिषेक, टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (31 मई 2026): राजधानी दिल्ली के साकेत क्षेत्र में शनिवार को पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना ने एक बार फिर शहर में अवैध निर्माण, कमजोर भवन संरचना और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार चल रहे अभियान और नियमों के बावजूद दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में इमारतें “ताश के पत्तों” की तरह ढह रही हैं, जिससे हर वर्ष कई लोगों की जान जा रही है और दर्जनों लोग घायल हो रहे हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) तथा दिल्ली फायर सर्विस के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राजधानी में हर साल औसतन 100 से अधिक भवन ध्वस्त होने, दीवार गिरने या इमारत के किसी हिस्से के ढहने की घटनाएं दर्ज होती हैं। इन हादसों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत और घायल होने के मामले सामने आते हैं। वर्ष 2024-25 के दौरान ऐसे हादसों में 32 लोगों की जान गई और 100 से अधिक लोग घायल हुए। वहीं 2023-24 में 23 लोगों की मौत हुई, जबकि घायलों की संख्या 100 से अधिक रही। वर्ष 2022-23 में 43 लोगों की मौत दर्ज की गई थी, जबकि 2021-22 में 28 लोगों की जान गई थी। इन सभी वर्षों में घायलों की संख्या सौ से अधिक रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में भवन गिरने की घटनाओं के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण जिम्मेदार हैं। पहला, पुरानी इमारतों पर बिना अनुमति अतिरिक्त निर्माण करना। दूसरा, भवन निर्माण के दौरान निर्धारित बिल्डिंग बायलॉज और सुरक्षा मानकों का पालन न करना। तीसरा, निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल और कमजोर नींव तैयार करना। इन कारणों से इमारतों की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित होती है और समय के साथ वे हादसों का कारण बन जाती हैं।

राजधानी में ऐसी घटनाएं सबसे अधिक उत्तर-पूर्वी दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों, पुरानी दिल्ली और मध्य दिल्ली की पुरानी बस्तियों तथा दक्षिणी और बाहरी दिल्ली की अवैध कॉलोनियों में देखने को मिलती हैं। पुलिस और फायर विभाग को भवन गिरने या दीवार ढहने से जुड़े अधिकांश कॉल इन्हीं क्षेत्रों से प्राप्त होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते पुराने और जर्जर भवनों का सर्वेक्षण, अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई तथा निर्माण नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो ऐसे हादसे भविष्य में भी लोगों की जान लेते रहेंगे।

साकेत की ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर राजधानी में अवैध और असुरक्षित निर्माण पर प्रभावी रोक कब लगेगी और लोगों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा।।


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