EPCH ने भारत–यूके सीईटीए का किया स्वागत, भारतीय हस्तशिल्प के लिए शून्य-शुल्क वाले नए प्रवेश द्वार का मार्ग प्रशस्त

नई दिल्ली, 15 जुलाई 2026: हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) ने भारत-यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के लागू होने का स्वागत करते हुए इसे एक ऐतिहासिक विकास बताया, जो विश्व के सबसे परिपक्व और उच्च-मूल्य उपभोक्ता बाजारों में से एक में भारतीय हस्तशिल्प के लिए एक नया अध्याय खोलेगा । यह समझौता यूनाइटेड किंगडम को भारत के लगभग 99% निर्यात पर शून्य-शुल्क पहुंच प्रदान करता है, जिसमें लगभग संपूर्ण व्यापार मूल्य शामिल है । भारतीय हस्तशिल्प के लिए यह शुल्क बाधाओं को हटाकर और यूके के खरीदारों, आयातकों, खुदरा विक्रेताओं, थोक विक्रेताओं, डिजाइनरों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों तक पहुंच को बेहतर बनाकर एक बड़ा प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करने की उम्मीद है ।

इस ऐतिहासिक अवसर पर बोलते हुए, डॉ. नीरज खन्ना, अध्यक्ष, ईपीसीएच ने कहा, “भारत-यूके सीईटीए का आज लागू होना भारत के हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए एक परिवर्तनकारी उपलब्धि है । यह समझौता भारतीय हस्तशिल्प निर्यातकों को एक उच्च-मूल्य और गुणवत्ता-सचेत बाजार में शून्य-शुल्क पहुंच प्रदान करता है, जिससे वे अन्य आपूर्तिकर्ता देशों के साथ अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे । इससे यूके बाजार में होम, लाइफस्टाइल, फैशन एक्सेसरीज़, फर्निशिंग, फर्नीचर और अन्य शिल्प-आधारित उत्पाद श्रेणियों में भारत की उपस्थिति मजबूत होगी ।

डॉ. खन्ना ने आगे कहा, “ आज का दिन भारत-यूके व्यापार संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतीक है । भारत-यूके सीईटीए के लागू होने से यूके बाजार में बाजार पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार के माध्यम से भारत के हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए नए अवसर खुलेंगे । समझौते के पहले ही दिन पहली कन्साइनमेंट का प्रेषण हमारे निर्यातकों की तैयारी और विश्वास को दर्शाता है । इन कन्साइनमेंट में मेटल प्लांटर्स, लकड़ी की ट्रे, लकड़ी के बाउल, मेटल जग, सजावटी लकड़ी के उत्पाद तथा अन्य होम डेकोर और लाइफस्टाइल उत्पाद शामिल हैं । हमें विश्वास है कि यह ऐतिहासिक समझौता आने वाले वर्षों में यूके को हस्तशिल्प निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा ।”

इस अवसर पर बोलते हुए, ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने कहा, “सीईटीए केवल एक व्यापार समझौता ही नहीं, बल्कि एक बाजार पहुंच मंच भी है, जो भारत-यूके हस्तशिल्प व्यापार गलियारे को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत कर सकता है । शुल्क हटने और बाजार पहुंच अधिक अनुकूल होने के साथ भारतीय निर्यातकों के पास अब डिजाइन नवाचार, विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं, वेयरहाउसिंग, फुलफिलमेंट और डिजिटल कॉमर्स के संयोजन के माध्यम से यूके में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का अवसर है ।”

यूके में भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों के लिए उभरती बाजार पहुंच और अवसंरचना उन्नयन का उल्लेख करते हुए, डॉ. कुमार ने आगे कहा, “ईपीसीएच-एक्सपोबाजार ने वेक्ट्रा यूके लिमिटेड के साथ रणनीतिक सहयोग के माध्यम से यूके में भी अपने संचालन की शुरुआत की है । यह विस्तार यूनाइटेड स्टेट्स और यूरोप के बाद यूके को इसका तीसरा विदेशी बाजार बनाता है । अपने यूके संचालन को समर्थन देने के लिए, एक्सपोबाजार ने देश में एक पूर्ण रूप से परिचालित थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स वेयरहाउस स्थापित किया है, जिससे जस्ट-इन-टाइम फुलफिलमेंट मॉडल सक्षम होगा । इससे यूके के खुदरा विक्रेता और थोक विक्रेता कम डिलीवरी समय, बेहतर इन्वेंट्री योजना और अधिक आपूर्ति श्रृंखला विश्वसनीयता के साथ तैयार-से-भेजे जाने वाले भारतीय हस्तशिल्प और लाइफस्टाइल उत्पादों तक पहुंच प्राप्त कर सकेंगे ।

एक्सपोबाजार अपने नीदरलैंड कार्यालय के माध्यम से यूके में 100 से अधिक बुटीक स्टोर्स को पहले से सेवा प्रदान कर रहा है, जिससे लगभग 30,000 पाउंड की मासिक बिक्री हो रही है । सीईटीए के लागू होने के साथ, यह लगभग 1,00,000 पाउंड प्रति माह तक बढ़ने की उम्मीद है, साथ ही भारत में विनिर्माण आधार के विस्तार में भी योगदान देगा ।”

सागर मेहता, उपाध्यक्ष, ईपीसीएच ने कहा, “सीईटीए के अंतर्गत शुल्क बाधाओं को हटाने से हस्तशिल्प निर्यातकों को तत्काल वाणिज्यिक लाभ प्राप्त होंगे । इससे भारतीय उत्पाद अधिक मूल्य-प्रतिस्पर्धी बनेंगे, ऑर्डर रूपांतरण में सुधार होगा और यूके के खरीदार भारत से सोर्सिंग बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित होंगे । ईपीसीएच यूके में अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों, खरीदार-विक्रेता बैठकों, थीमैटिक प्रमोशन और प्रत्यक्ष खरीदार संपर्क के माध्यम से केंद्रित बाजार संवर्धन गतिविधियां जारी रखेगा । परिषद निर्यातकों के साथ निकटता से कार्य करेगी ताकि वे सीईटीए का लाभ दीर्घकालिक व्यापार साझेदारियों और यूके के खुदरा एवं सोर्सिंग इकोसिस्टम में गहरी पैठ के लिए उठा सकें ।”

रणनीतिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए, राजेश रावत, कार्यकारी निदेशक, ईपीसीएच ने कहा, “यूके हमेशा से भारतीय हस्तशिल्प के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार रहा है और आज से सीईटीए के लागू होने से इस क्षेत्र को निर्यात बढ़ाने और गहरे बाजार संबंध विकसित करने का मजबूत अवसर प्राप्त हुआ है । अब ईपीसीएच यूके बाजार के लिए लक्षित खरीदार संपर्क, उत्पाद-विशिष्ट प्रचार, प्रमुख व्यापार मेलों में भागीदारी और आयातकों, खुदरा विक्रेताओं, थोक विक्रेताओं, डिजाइनरों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के साथ निकट संपर्क के माध्यम से अधिक केंद्रित रणनीति अपनाएगा ।

रावत ने आगे कहा, “परिषद निर्यातकों को यूके खरीदारों की आवश्यकताओं, उत्पाद पोजिशनिंग, अनुपालन अपेक्षाओं, पैकेजिंग मानकों, स्थिरता संबंधी प्राथमिकताओं, मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता और डिजिटल व्यापार अवसरों को समझने में सहयोग करेगी । ईपीसीएच सदस्य निर्यातकों को आधुनिक यूके घरों और लाइफस्टाइल के अनुरूप बाजार-विशिष्ट कलेक्शन विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा, साथ ही भारतीय हस्तशिल्प को हस्तनिर्मित, सतत, डिजाइन-समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से गहरे जुड़े उत्पादों के रूप में बढ़ावा देगा। यह रणनीतिक दृष्टिकोण सीईटीए के लाभों को निर्यातकों के लिए दीर्घकालिक व्यावसायिक अवसरों और कारीगरों तथा शिल्प क्लस्टरों के लिए निरंतर आजीविका समर्थन में बदलने में मदद करेगा ।”


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