सेंसेक्स की चमक फीकी, गोल्ड की बल्ले-बल्ले: क्या भारतीय निवेशक संकट में हैं?
गजानन माली, टेन न्यूज नेटवर्क
नई दिल्ली (20 मई 2026): भारतीय शेयर बाज़ार पिछले लगभग डेढ़ साल से भारी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है। सितंबर 2024 में BSE Sensex ने लगभग 84 हजार अंकों का ऐतिहासिक स्तर छुआ था, लेकिन उसके बाद बाजार में लगातार गिरावट और अस्थिरता देखने को मिली। सेंसेक्स गिरकर 72 हजार तक पहुंच गया, फिर कुछ सुधार के बाद 78-79 हजार के स्तर तक गया, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Israel–Iran conflict के प्रभाव से बाजार फिर दबाव में आ गया। वर्तमान में सेंसेक्स लगभग 75 से 77 हजार के बीच कारोबार कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अब केवल घरेलू राजनीति या भारतीय अर्थव्यवस्था से प्रभावित नहीं होता, बल्कि अमेरिकी ब्याज दरों, विदेशी निवेशकों की रणनीति, डॉलर की स्थिति और वैश्विक युद्ध जैसे कारकों का भी गहरा असर पड़ता है। यही कारण है कि भारत की मजबूत आर्थिक विकास दर के बावजूद बाजार में स्थिरता नहीं बन पा रही।
छोटे निवेशकों का भरोसा डगमगाया
कोविड के बाद 2020 से 2024 के बीच भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। इस दौरान करोड़ों नए निवेशकों ने म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश शुरू किया। लगातार बढ़ते बाजार ने आम निवेशकों का भरोसा मजबूत किया, लेकिन पिछले डेढ़ साल की अस्थिरता ने छोटे निवेशकों को चिंता में डाल दिया है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, नए निवेशकों को बाजार की गिरावट और करेक्शन की आदत नहीं होती। ऐसे में 10 से 20 प्रतिशत की गिरावट भी लोगों का विश्वास हिला देती है। कई निवेशकों का मानना है कि फिलहाल शेयर बाजार में जोखिम पहले से अधिक बढ़ गया है।
गोल्ड निवेशकों की हुई बल्ले-बल्ले
जहां शेयर बाजार दबाव में है, वहीं Gold ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। जिन लोगों ने 70 हजार, 80 हजार या 90 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर सोने में निवेश किया था, उन्हें अब बड़ा लाभ मिल रहा है। वर्तमान में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत लगभग 1.64 लाख रुपये तक पहुंचने की चर्चा बाजार में हो रही है। वैश्विक युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की तलाश के कारण दुनियाभर के निवेशक गोल्ड की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यही वजह है कि सोने की कीमतों में लगातार मजबूती बनी हुई है।
क्या गोल्ड 2 लाख तक पहुंचेगा?
बाजार विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि आने वाले छह महीनों में गोल्ड 2 लाख रुपये के स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि कई विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि वैश्विक हालात सुधरते हैं और युद्ध का असर कम होता है, तो गोल्ड में 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट भी संभव है।
आम ग्राहक और निवेशक दोनों संकट में
महंगाई, बढ़ती जीवनशैली लागत, शेयर बाजार की अनिश्चितता और महंगे गोल्ड ने आम भारतीय ग्राहक और निवेशक दोनों को असमंजस की स्थिति में ला दिया है। लोग यह तय नहीं कर पा रहे कि निवेश कहां करें और किस विकल्प पर भरोसा करें। फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों, अमेरिकी आर्थिक नीतियों और पश्चिम एशिया के हालात पर निर्भर मानी जा रही है। आने वाले महीनों में निवेशकों की नजरें शेयर बाजार और गोल्ड दोनों पर बनी रहेंगी।
(लेखक अर्थशास्त्र एवं कॉमर्स विषयों में विशेष रुचि रखते है । यह लेखक के निजी विचार है)
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