ब्रज रज उत्सव 2026: मां गंगा बनीं हेमा मालिनी, पौराणिक कथा के साथ दिया नदी बचाने का संदेश

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (24/10/2026): ब्रज की सांस्कृतिक धरती पर शुक्रवार को ब्रज रज उत्सव 2026 का आगाज भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुआ। सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने अपनी नृत्य नाटिका ‘गंगा’ के माध्यम से भारतीय पौराणिक परंपरा, आध्यात्मिक आस्था और नदियों के संरक्षण का संदेश दिया। मां गंगा की भूमिका में मंच पर उतरीं हेमा मालिनी ने लगभग 90 मिनट तक नृत्य और अभिनय के जरिए गंगा के धरती पर अवतरण से लेकर वर्तमान समय में प्रदूषण से जूझती नदी की स्थिति को जीवंत किया। उनकी प्रस्तुति में जहां भारतीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं की झलक देखने को मिली, वहीं नदियों के प्रति बढ़ती लापरवाही पर गंभीर सवाल भी उठाए गए।

इस नृत्य नाटिका का विशेष आकर्षण वह दृश्य रहा, जिसमें मां गंगा के रूप में हेमा मालिनी को क्रेन की सहायता से मंच पर उतारा गया। इस भव्य मंचीय प्रस्तुति ने गंगा के धरती पर अवतरण की पौराणिक कथा को नाटकीय अंदाज में सामने रखा। पारंपरिक वेशभूषा, भावपूर्ण मुद्राओं, संगीत और अन्य कलाकारों के सहयोग से तैयार इस प्रस्तुति ने दर्शकों के सामने आस्था और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने का प्रयास किया।

भगीरथ की तपस्या से गंगा के धरती पर अवतरण तक की कहानी

नृत्य नाटिका की शुरुआत पौराणिक प्रसंगों के साथ हुई। इसमें राजा भगीरथ की तपस्या और अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए गंगा को धरती पर लाने के उनके संकल्प को दर्शाया गया। कथा के महत्वपूर्ण पड़ाव में भगवान शिव द्वारा गंगा की प्रचंड धारा को अपनी जटाओं में धारण करने का प्रसंग भी प्रस्तुत किया गया। इसके माध्यम से गंगा के पृथ्वी पर आगमन की धार्मिक मान्यता को नृत्य, अभिनय और मंचीय दृश्यों के जरिए दर्शकों तक पहुंचाया गया।

प्रस्तुति केवल गंगा के अवतरण तक सीमित नहीं रही। इसमें सत्ययुग से कलियुग तक की यात्रा को अलग-अलग प्रसंगों के माध्यम से दिखाया गया। समय के साथ समाज में आए बदलाव, मानव जीवन में नदियों की भूमिका और भारतीय सभ्यता के विकास में उनके योगदान को मंच पर उकेरने का प्रयास किया गया। पौराणिक कथाओं, इतिहास और सांस्कृतिक परंपराओं के मेल ने इस नृत्य नाटिका को व्यापक रूप दिया।

सफेद साड़ी, पारंपरिक आभूषण और भावपूर्ण नृत्य ने खींचा ध्यान

मां गंगा की भूमिका में हेमा मालिनी सफेद साड़ी और पारंपरिक आभूषणों में नजर आईं। प्रस्तुति के दौरान उनकी भाव-भंगिमाओं, नृत्य की लय और अभिनय के जरिए कथा के विभिन्न भावों को अभिव्यक्त किया गया। लगभग डेढ़ घंटे तक चले इस कार्यक्रम में अन्य कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं और कथा को आगे बढ़ाया।

मंच सज्जा, संगीत और पौराणिक दृश्यों के संयोजन से गंगा के अवतरण की कथा को भव्य स्वरूप दिया गया। हालांकि, इस प्रस्तुति का उद्देश्य केवल धार्मिक प्रसंगों का मंचन करना नहीं था, बल्कि दर्शकों को गंगा की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता से जोड़ते हुए वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करना भी था।

जीवनदायिनी नदी की बदहाली को दिखाकर दिया स्वच्छता का संदेश

नृत्य नाटिका का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष गंगा में बढ़ते प्रदूषण और नदी की बिगड़ती स्थिति का चित्रण रहा। जिस गंगा को भारतीय परंपरा में जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी माना जाता है, उसकी मौजूदा स्थिति को प्रस्तुति के जरिए सामने लाया गया। कलाकारों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि नदियों के प्रति आस्था केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी समाज को उठानी होगी।

प्रस्तुति के माध्यम से गंगा और यमुना सहित अन्य नदियों को स्वच्छ रखने, उनमें प्रदूषण कम करने और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण की अपील की गई। पौराणिक कथा और वर्तमान पर्यावरणीय संकट को एक साथ प्रस्तुत कर यह समझाने की कोशिश की गई कि नदियों का महत्व केवल इतिहास और धार्मिक मान्यताओं में नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के जीवन में भी है।

हेमा मालिनी बोलीं—यमुना किनारे ‘गंगा’ प्रस्तुत करने की थी इच्छा

हेमा मालिनी ने बताया कि वह पिछले कुछ वर्षों से प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों में ‘गंगा’ नृत्य नाटिका प्रस्तुत करती आ रही हैं। उनकी इच्छा थी कि इस प्रस्तुति को यमुना के तट पर भी मंचित किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के जरिए नदियों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने और उन्हें स्वच्छ बनाए रखने का संदेश दिया जा रहा है।

उन्होंने ब्रज रज उत्सव के आयोजन और ब्रज तीर्थ विकास परिषद के प्रति आभार व्यक्त करते हुए लोगों से उत्सव में शामिल होने और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने की अपील भी की।

दीप प्रज्वलन के साथ हुई कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद हेमा मालिनी की नृत्य नाटिका ‘गंगा’ का मंचन हुआ। इस प्रस्तुति ने ब्रज रज उत्सव के शुरुआती कार्यक्रम को पौराणिक संस्कृति, शास्त्रीय नृत्य और पर्यावरण संरक्षण के संदेश से जोड़ दिया।

वृंदावन और मथुरा में होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम

ब्रज रज उत्सव 2026 के अंतर्गत इस बार वृंदावन के नवनिर्मित स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं, मथुरा के धौलीप्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड में 24 अक्टूबर से उत्सव की अन्य गतिविधियां शुरू हो रही हैं।

आगामी कार्यक्रमों में गायक और मिमिक्री कलाकार सुदेश भोसले की संगीत एवं मिमिक्री प्रस्तुति और सौरभ जैन का नाटक ‘मेरे कृष्ण’ भी शामिल हैं। उत्सव के माध्यम से ब्रज की धार्मिक विरासत, कला, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को व्यापक मंच देने का प्रयास किया जा रहा है।

ब्रज रज उत्सव की शुरुआत में प्रस्तुत ‘गंगा’ नृत्य नाटिका ने एक ओर भारतीय पौराणिक कथाओं को मंच पर जीवंत किया, तो दूसरी ओर नदियों के संरक्षण की जरूरत को भी रेखांकित किया। प्रस्तुति का संदेश स्पष्ट रहा—नदियों के प्रति सम्मान तभी सार्थक होगा, जब उनकी स्वच्छता और सुरक्षा के लिए भी सामूहिक जिम्मेदारी निभाई जाएगी।


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