टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (16 May 2026): CBSE ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के तहत भाषा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। बोर्ड ने घोषणा की है कि 2026-27 सत्र से नौवीं कक्षा में तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा। इनमें R1, R2 और R3 श्रेणी की भाषाएं शामिल होंगी, जबकि कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की जरूरी होगी। इस नई व्यवस्था को बहुभाषिक शिक्षा और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बोर्ड का कहना है कि इससे विद्यार्थियों का भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विविधता से जुड़ाव मजबूत होगा।
नई नीति के तहत यदि कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो वह उसे तीसरी भाषा के रूप में तभी चुन सकेगा जब बाकी दो भाषाएं भारतीय हों। अन्यथा विदेशी भाषा को अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में पढ़ना होगा। CBSE ने स्पष्ट किया है कि यह नियम 1 जुलाई 2026 से प्रभावी माना जाएगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों में भाषाई समझ और संवाद क्षमता बेहतर होगी। हालांकि कुछ अभिभावकों और स्कूलों ने अतिरिक्त भाषाई बोझ को लेकर चिंता भी जताई है।
बोर्ड ने यह भी बताया कि फिलहाल नौवीं के लिए आर3 श्रेणी की नई पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में 2026-27 सत्र में छठवीं कक्षा की आर3 किताबों का उपयोग कराया जाएगा। इसके साथ ही स्कूलों को स्थानीय साहित्य, कहानियां, कविताएं और अन्य गैर-काल्पनिक सामग्री को पाठ्यक्रम में शामिल करने की अनुमति भी दी गई है। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश 15 जून 2026 तक जारी किए जाएंगे। बोर्ड का कहना है कि इससे विद्यार्थियों को स्थानीय संस्कृति और भाषाई विरासत को समझने का अवसर मिलेगा।
CBSE ने यह स्वीकार किया है कि कई स्कूलों में भारतीय भाषाओं के प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी हो सकती है। इस स्थिति से निपटने के लिए अंतरिम व्यवस्था के तौर पर अन्य विषयों के उन शिक्षकों की मदद ली जा सकेगी जिन्हें संबंधित भाषा का कार्यात्मक ज्ञान हो। इसके अलावा सहोदय क्लस्टर के जरिए इंटर-स्कूल रिसोर्स शेयरिंग, वर्चुअल क्लास और सेवानिवृत्त भाषा शिक्षकों की सेवाएं लेने का विकल्प भी दिया गया है। बोर्ड का मानना है कि तकनीक और साझा संसाधनों के जरिए इस चुनौती को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
नई नीति की सबसे अहम बात यह है कि दसवीं बोर्ड परीक्षा में आर3 भाषा की अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा, हालांकि इसका उल्लेख सीबीएसई प्रमाणपत्र में रहेगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र को केवल आर3 भाषा के कारण दसवीं बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा। वहीं दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रावधान भी किए गए हैं, जिनके तहत उन्हें दूसरी या तीसरी भाषा से छूट दी जा सकती है। विदेश स्थित सीबीएसई स्कूलों और विदेश से लौटने वाले विद्यार्थियों के लिए भी विशेष राहत का प्रावधान रखा गया है।
बोर्ड ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 30 जून 2026 तक ओएसआईएस पोर्टल पर छठवीं से नौवीं तक की आर3 भाषा संबंधी जानकारी अपडेट करें। इस बीच National Council of Educational Research and Training और सीबीएसई असमिया, बंगाली, बोडो, डोगरी, गुजराती, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओड़िया, पंजाबी, संथाली, सिंधी, तमिल और तेलुगु समेत 19 भारतीय भाषाओं में नई किताबें तैयार कर रहे हैं। बोर्ड का कहना है कि इस पूरी पहल का उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा का दबाव बढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं और बहुभाषिक शिक्षा को मजबूत बनाना है।
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