Sharda University के प्रो चांसलर Y.K. Gupta ने बताया, पेपर लीक का क्या है स्थाई समाधान | NEET UG Paper Leek

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (15/05/2026): देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर इस परीक्षा की तैयारी में कई साल लगा देते हैं। ऐसे में जब पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों की खबरें सामने आती हैं, तो छात्रों और अभिभावकों का भरोसा पूरी व्यवस्था पर कमजोर पड़ता है। परीक्षा रद्द होने या दोबारा होने की स्थिति में छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है और उनका भविष्य भी अनिश्चितता में घिर जाता है। भारत आज तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, इसलिए यह जरूरी है कि हमारी परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष हो। इसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर शारदा विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर वाई. के. गुप्ता ने टेन न्यूज नेटवर्क से बातचीत में अपनी प्रतिक्रिया साझा की।

नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक की घटना को लेकर शारदा यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर वाई.के. गुप्ता ने टेन न्यूज नेटवर्क से बातचीत करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, जिसने लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को मानसिक तनाव में डाल दिया है। उनका कहना है कि लगभग 23 लाख विद्यार्थियों ने पूरे वर्ष कड़ी मेहनत की, लेकिन परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही दोबारा परीक्षा कराकर स्थिति को सामान्य करने का प्रयास करेगी।

उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में छात्रों को घबराने के बजाय धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ अपनी तैयारी जारी रखनी चाहिए। उनके अनुसार, परीक्षा हाल ही में संपन्न हुई है, इसलिए अधिकांश छात्रों की तैयारी अभी भी मजबूत होगी। यदि परीक्षा दोबारा आयोजित होती है तो विद्यार्थी अपने प्रदर्शन को और बेहतर बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस समय बच्चों को भावनात्मक सहयोग और सही मार्गदर्शन की सबसे अधिक आवश्यकता है।

वाई.के. गुप्ता ने बताया कि परीक्षा में देरी का असर केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मेडिकल कॉलेजों, शिक्षकों और पूरे शैक्षणिक सत्र पर भी पड़ता है। काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित होने से नए सत्र की शुरुआत देर से होती है, जिससे मेडिकल शिक्षा की पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि इस कारण सभी संबंधित संस्थानों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए उन्होंने तकनीक आधारित व्यवस्था अपनाने पर जोर दिया। उनका मानना है कि भविष्य में यदि परीक्षा पूरी तरह डिजिटल और आईटी आधारित हो जाए, तो पेपर लीक जैसी घटनाओं पर स्थायी रूप से रोक लगाई जा सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि परीक्षा केंद्र पर छात्रों को सुरक्षित लॉगिन के माध्यम से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जाए और उत्तर तुरंत ऑनलाइन जमा किए जाएं, जिससे परिणाम भी कम समय में घोषित किए जा सकें।

उन्होंने कहा कि, देश तेजी से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में भारत की परीक्षा प्रणाली भी पूरी तरह तकनीक-सक्षम हो सकती है। उनके अनुसार, सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी इस दिशा में लगातार काम कर रही हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

छात्रों और अभिभावकों को मानसिक तनाव से उबारने के लिए शारदा यूनिवर्सिटी की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि, विश्वविद्यालय का मनोविज्ञान विभाग (Counselling Department) इस दिशा में सक्रिय योगदान देने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी एक काउंसलिंग हेल्पलाइन और ऑनलाइन परामर्श सुविधा शुरू करने की योजना बना रही है, ताकि प्रभावित छात्र और उनके माता-पिता विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।

अंत में उन्होंने छात्रों से कहा कि जो हो चुका है, उसे बदला नहीं जा सकता, लेकिन आने वाले अवसर को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आत्मविश्वास बनाए रखने, सकारात्मक सोच के साथ दोबारा तैयारी करने और पूरे मनोबल के साथ परीक्षा में शामिल होने की अपील की। उनका विश्वास है कि धैर्य, मेहनत और सही दिशा के साथ छात्र उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपने लक्ष्य तक अवश्य पहुंचेंगे।

नीट परीक्षा में पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल परीक्षा प्रक्रिया की खामियों को उजागर नहीं करतीं, बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों की मेहनत, उम्मीदों और मानसिक संतुलन को भी प्रभावित करती हैं। ऐसे समय में आवश्यकता है कि छात्र धैर्य बनाए रखें और सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए ठोस कदम उठाए। वाई.के. गुप्ता के अनुसार, यदि परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह आईटी-सक्षम हो जाए और छात्रों को समय पर मनोवैज्ञानिक सहयोग मिले, तो न केवल इस तरह की समस्याओं पर स्थायी रोक लगाई जा सकती है, बल्कि देश की शिक्षा प्रणाली में भरोसा भी और मजबूत होगा।


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