Greater Noida News (15/05/2026): Government Institute of Medical Sciences (GIMS) ने भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए आम लोगों के लिए विस्तृत स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है। संस्थान ने लोगों से अपील की है कि वे लू (हीटवेव) के दौरान विशेष सतर्कता बरतें और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करें, ताकि गर्मी से होने वाली गंभीर बीमारियों और हीट स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियों से बचा जा सके।
संस्थान के अनुसार, जब मैदानी इलाकों में तापमान लगातार दो से तीन दिनों तक 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बना रहता है, तब हीटवेव की स्थिति उत्पन्न होती है। यह तापमान मानव शरीर के सामान्य तापमान से काफी अधिक होता है, जिससे शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है।
GIMS द्वारा जारी सलाह में कहा गया है कि गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड रखना सबसे जरूरी है। लोगों को प्यास न लगने पर भी नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए। इसके साथ ही ओआरएस, छाछ, नींबू पानी, आम पन्ना, बेल का शरबत, सत्तू का घोल, चावल का पानी और गन्ने के रस जैसे घरेलू पेय पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी गई है। ये पेय शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मददगार होते हैं।
संस्थान ने तरबूज, खरबूजा, संतरा और खीरे जैसे पानी से भरपूर मौसमी फलों को भोजन में शामिल करने की सलाह दी है। वहीं बासी भोजन, अत्यधिक प्रोटीनयुक्त आहार, शराब, चाय, कॉफी और ज्यादा चीनी वाले कार्बोनेटेड पेय पदार्थों से दूरी बनाने को कहा गया है, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं।
धूप में निकलने वाले लोगों को हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। साथ ही सिर को छाता, टोपी या गीले कपड़े से ढंकने और पैरों में जूते-चप्पल पहनने पर जोर दिया गया है। दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच, जब धूप सबसे अधिक तीखी होती है, बाहर निकलने और भारी शारीरिक श्रम से बचने की अपील की गई है।
GIMS ने यह भी कहा है कि घरों को ठंडा रखने के लिए दिन में खिड़कियां और पर्दे बंद रखें तथा रात के समय ठंडी हवा के लिए उन्हें खोल दें। विशेष रूप से शिशुओं, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों की अतिरिक्त देखभाल करने की आवश्यकता बताई गई है क्योंकि ये वर्ग लू से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
संस्थान ने गर्मी से जुड़ी बीमारियों के लक्षणों को पहचानने पर भी जोर दिया है। चक्कर आना, उल्टी, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, अत्यधिक कमजोरी और पेशाब का रंग गहरा होना लू के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। वहीं यदि किसी व्यक्ति का शरीर का तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट या उससे अधिक हो जाए, उसे भ्रम की स्थिति, दौरे या पसीना आना बंद होने जैसी समस्या हो, तो यह हीट स्ट्रोक की गंभीर स्थिति हो सकती है।
ऐसी स्थिति में मरीज को तुरंत छायादार और ठंडी जगह पर लिटाने, गीले कपड़े से शरीर को ठंडा करने तथा सिर पर सामान्य तापमान का पानी डालने की सलाह दी गई है। साथ ही तुरंत नजदीकी अस्पताल में चिकित्सकीय सहायता लेने को कहा गया है।
GIMS प्रशासन ने बताया कि संस्थान हीटवेव से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह तैयार है। अस्पताल में विशेष ‘हीट स्ट्रोक ट्रीटमेंट कॉर्नर’ बनाया गया है, जहां लू से पीड़ित मरीजों का तत्काल उपचार किया जा रहा है। गंभीर मरीजों के लिए एयर-कंडीशन्ड ‘कूल वार्ड’ भी तैयार किए गए हैं ताकि शरीर के तापमान को तेजी से नियंत्रित किया जा सके। अस्पताल में ओआरएस पैकेट, आईवी फ्लूइड्स, आइस पैक और जीवन रक्षक दवाओं का पर्याप्त भंडार उपलब्ध कराया गया है। साथ ही डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को हीट स्ट्रोक से जुड़े मामलों के त्वरित उपचार के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित कर हाई अलर्ट पर रखा गया है।
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