सुशासन के लिए जवाबदेही और जनसहभागिता दोनों जरूरी: सत्या शर्मा, चेयरमैन, स्टैंडिंग कमेटी | Ten Talks

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (12/05/2026): “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सुशासन” की अवधारणा, उसकी चुनौतियों तथा संभावनाओं पर व्यापक विमर्श को केंद्र में रखते हुए टेन न्यूज नेटवर्क (Ten News Network) द्वारा गलगोटियास विश्वविद्यालय के सहयोग से नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया (Constitution Club of India) में एक विचारोत्तेजक एवं बहुआयामी संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी अवसर पर राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरणविदों, शिक्षाविदों, विधिवेत्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता कर दिल्ली के समक्ष उपस्थित विविध समस्याओं, चुनौतियों एवं उनके व्यावहारिक समाधानों पर गंभीर मंथन किया।

कार्यक्रम में प्रदूषण, अपराध नियंत्रण, लोक प्रशासन, एनडीएमसी एवं एमसीडी में सुशासन, नागरिक सहभागिता तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में आरडब्ल्यूए की भूमिका जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर सारगर्भित चर्चा की गई। संवाद के दौरान वक्ताओं ने न केवल समस्याओं का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया, अपितु सुशासन की स्थापना हेतु दूरदर्शी, व्यवहारिक एवं जनकल्याणकारी उपायों का भी उल्लेख किया, जिससे यह कार्यक्रम दिल्ली के भविष्य के लिए एक सार्थक वैचारिक पहल सिद्ध हुआ।

दिल्ली नगर निगम (MCD) की स्टैंडिंग कमिटी चेयरमैन सत्या शर्मा ने कहा कि सुशासन के लिए जवाबदेही तय होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी निश्चित होनी चाहिए, लेकिन केवल एक व्यक्ति या कुछ लोगों के बदलने से व्यवस्था और समाज में व्यापक बदलाव संभव नहीं है। जब तक समाज में यह जागरूकता नहीं आएगी कि गंदगी नहीं फैलानी है, भ्रष्टाचार नहीं करना है, रिश्वत नहीं देनी है और दूसरों के प्रति सकारात्मक सोच रखनी है, तब तक स्थायी परिवर्तन संभव नहीं होगा।

सत्या शर्मा ने कहा कि कई बार जनप्रतिनिधि मदद करना चाहते हैं, लेकिन पूरी व्यवस्था के कारण तत्काल समाधान नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि यदि कोई जरूरतमंद व्यक्ति उनके पास आता है तो वे उसकी सहायता के लिए हर संभव प्रयास करती हैं। उनका कहना था कि व्यवस्था में सुधार तभी आएगा जब लोगों के भीतर सेवा भाव और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।

उन्होंने कहा कि कार्य संस्कृति में बदलाव की सख्त जरूरत है। अस्पतालों, सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक संस्थानों में लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनका समाधान किया जाना चाहिए। सत्या शर्मा ने कहा कि आम नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और समाज के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाना होगा।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का उल्लेख करते हुए सत्या शर्मा ने कहा कि वे लगातार लोगों से मिल रही हैं और उनकी समस्याएं सुन रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और नगर निगम में एक ही दल की सरकार होने से लोगों की अपेक्षाएं बढ़ी हैं और सरकार इन उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए प्रतिबद्ध है।

सत्या शर्मा ने कहा कि बदलाव निश्चित रूप से होगा, हालांकि इसके लिए कुछ समय लगेगा। उन्होंने इंदौर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की स्वच्छता व्यवस्था अनुकरणीय है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की बड़ी आबादी और प्रतिदिन आने वाले लाखों लोगों के कारण चुनौतियां अधिक हैं, लेकिन जनसहयोग और प्रशासनिक प्रतिबद्धता से सुधार संभव है।

उन्होंने कहा कि अतिक्रमण, गंदगी और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब प्रशासन और जनता दोनों मिलकर जिम्मेदारी निभाएं। सत्या शर्मा ने विश्वास दिलाया कि वे अपने स्तर पर पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य करती रहेंगी और दिल्ली में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगी।

उल्लेखनीय है कि इस सकारात्मक एवं अत्यंत सारगर्भित विमर्श में दिल्ली नगर निगम की डिप्टी मेयर मोनिका पंत, दिल्ली नगर निगम स्टैंडिंग कमिटी की चेयरमैन सत्या शर्मा, दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व जज न्यायमूर्ति एम. एल. मेहता, स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर एवं सनातन सेवा न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवोम मिश्रा, सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक एवं उपराज्यपाल दिल्ली के पूर्व ओएसडी शांतनु सेन, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ आदिश सी अग्रवाला, वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ ए.पी. सिंह, एसपी चेतना के अध्यक्ष अनिल सूद, एमिटी यूनिवर्सिटी की Addl Pro VC तनु जिंदल, सेव आवर सिटी से राजीव काकरिया, पूर्वी दिल्ली आरडब्ल्यूए फेडरेशन से बी. एस. वोहरा, HHEWA के अध्यक्ष सीपी शर्मा, संयुक्त आरडब्ल्यूए फोरम के महासचिव पंकज अग्रवाल, CORWA के एन पी सिंह, समाजसेवी नेहा पुरी सहित अनेक विशिष्ट विद्वान, समाजसेवी, विधिवेत्ता, शिक्षाविद् एवं प्रबुद्ध अतिथिगण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की विशेष महत्ता इस तथ्य से भी परिलक्षित हुई कि इसमें राजधानी दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे सैकड़ों जागरूक एवं चिंतनशील नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर संवाद को और अधिक सारगर्भित, जनोन्मुख एवं उद्देश्यपूर्ण बनाया। चर्चा के दौरान उपस्थित वक्ताओं एवं नागरिकों ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के समक्ष विद्यमान समस्याओं एवं चुनौतियों पर गंभीर विमर्श करते हुए सुशासन, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं जनसहभागिता आधारित समाधान की दिशा में अपने बहुमूल्य विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए। यह संवाद निःसंदेह दिल्ली के सर्वांगीण, संतुलित एवं जनकल्याणकारी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैचारिक पहल सिद्ध हुआ।।


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