भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए घरेलू बाजार में बड़े अवसर: गिफ्टिंग और वेयरहाउसिंग पर फोकस: डॉ. राकेश कुमार, चेयरमैन, IEML
टेन न्यूज नेटवर्क
Uttar Pradesh News (08/05/2026): हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (HHEWA) ने गुरुवार को ग्रेटर नोएडा स्थित एक्सपो मार्ट (IEML) में एक विशेष सेमिनार एवं इंटरएक्टिव सेशन का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में गौतमबुद्ध नगर के EPCH सदस्यों ने भाग लिया। सेमिनार में निर्यात क्षेत्र के सामने आ रही चुनौतियों, ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट, ड्रॉप शिपमेंट कॉन्सेप्ट, ग्लोबल मार्केट ट्रेंड, बायर की बदलती अपेक्षाओं और निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में IEML चेयरमैन एवं EPCH प्रिंसिपल मेंटर डॉ. राकेश कुमार ने सफल निर्यात के विभिन्न पहलुओं पर अपने अनुभव साझा किए। डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि भारतीय एक्सपोर्टर्स के पास ऐसी गुणवत्ता और क्षमता है, जिसके दम पर वे घरेलू बाजार में भी बड़ा हिस्सा हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश में अधिकांश घरेलू निर्माता उस स्तर की क्वालिटी, पैकेजिंग और फिनिशिंग उपलब्ध नहीं करा पाते, जो भारतीय एक्सपोर्टर्स देते हैं। ऐसे में निर्यातकों को घरेलू बाजार को कमतर आंकने की बजाय उसे अपने बिजनेस मॉडल का अहम हिस्सा बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत का घरेलू बाजार तेजी से बढ़ रहा है और अब यह केवल सपोर्टिंग मार्केट नहीं, बल्कि एक बड़ा बिजनेस अवसर बन चुका है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कई एक्सपोर्टर्स ने घरेलू बाजार में उतरकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। एक टॉवल एक्सपोर्टर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज उनके उत्पाद देशभर के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर बिक रहे हैं और उनका कारोबार लगातार बढ़ रहा है।
डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि भारतीय एक्सपोर्टर्स के पास बेहतर डिजाइन, आकर्षक पैकेजिंग और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद हैं, जिनकी मांग कॉर्पोरेट सेक्टर, सरकारी संस्थानों और गिफ्टिंग इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि कई बड़े संस्थानों और सरकारी संगठनों को हजारों की संख्या में प्रीमियम गिफ्टिंग आइटम्स की आवश्यकता होती है, लेकिन उपयुक्त भारतीय उत्पाद न मिलने के कारण उन्हें चीन का सहारा लेना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि भारत में ‘माइस इंडस्ट्री’ — यानी मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंस और एग्जीबिशन सेक्टर — तेजी से उभर रहा है। बड़े कॉर्पोरेट आयोजन, कॉन्सर्ट और सम्मेलन गिफ्टिंग बाजार को नई गति दे रहे हैं। भारतीय उत्पादों की विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक जुड़ाव उन्हें वैश्विक स्तर पर अलग पहचान दिलाता है। भारतीय दूतावासों और प्रवासी भारतीय समुदाय की ओर से भी भारतीय गिफ्टिंग उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि चीन की सबसे बड़ी ताकत उसकी तेज सप्लाई चेन और मजबूत वेयरहाउसिंग नेटवर्क है। चीन ने अमेरिका और यूरोप में हजारों वेयरहाउस स्थापित किए हैं, जिससे खरीदारों को तुरंत सामान उपलब्ध हो जाता है। इसके मुकाबले भारतीय निर्यातकों को लंबी सप्लाई प्रक्रिया, शिपिंग समय और कंटेनर संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आज का खरीदार लंबा इंतजार नहीं करना चाहता और तेज डिलीवरी देने वाले सप्लायर को प्राथमिकता देता है।
उन्होंने कहा कि आने वाले पांच वर्षों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है। अब खरीदार केवल उत्पाद नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को देखता है। वह जानना चाहता है कि माल कहां बन रहा है, कच्चा माल कहां से आ रहा है, डाइंग कहां हो रही है और उत्पादन क्षमता कितनी है। अब बायर ट्रेडर्स और मिडिल लेयर्स को हटाकर सीधे फैक्ट्री तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि भारतीय एक्सपोर्टर्स को भी इसी दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है। यदि भारतीय कंपनियां सीधे छोटे रिटेलर्स, इम्पोर्टर्स और स्टोर्स तक पहुंचेंगी तो उनके उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बिक सकेंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिका में लाखों छोटे रिटेलर्स आज भी बड़े इम्पोर्टर्स के माध्यम से सामान खरीदते हैं। यदि भारतीय कंपनियां सीधे इन बाजारों तक पहुंच बनाएं तो उनके लिए नए अवसर खुल सकते हैं।
उन्होंने बताया कि कई भारतीय कंपनियां अब अमेरिका, यूरोप और यूके में अपने वेयरहाउस स्थापित कर रही हैं। कुछ कंपनियों ने अपने ब्रांड के साथ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और बी-टू-बी मॉडल के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत पकड़ बनाई है। उन्होंने गुजरात की एक कंपनी का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने हॉलैंड, यूके और अमेरिका में वेयरहाउस स्थापित कर वैश्विक स्तर पर तेजी से विस्तार किया।
डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि एक्सपोर्टर्स को केवल सब्सिडी पर निर्भर रहने की मानसिकता से बाहर निकलना होगा। पहले की तुलना में सरकारी प्रोत्साहन कम हुए हैं, इसलिए अब असली ताकत मजबूत प्रोडक्शन, सप्लाई चेन और मार्केट विस्तार में है। उन्होंने कहा कि यदि उत्पादन नियमित नहीं रहेगा तो स्किल्ड वर्कर्स और उत्पादन क्षमता दोनों प्रभावित होंगी।

अंत में उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों की वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान है, लेकिन अब जरूरत तेज डिलीवरी, मजबूत नेटवर्क और नई मार्केट रणनीति अपनाने की है। उन्होंने एक्सपोर्टर्स से अपील की कि वे व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों स्तरों पर नए प्रयोग करें तथा घरेलू बाजार, गिफ्टिंग, ई-कॉमर्स और वेयरहाउसिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ें।
साथ ही जिला उद्योग केंद्र (DIC) नोएडा के अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश सरकार की निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं और उद्योगों को मिलने वाले इंसेंटिव्स की जानकारी दी। कार्यक्रम का नेतृत्व HHEWA की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शशि नांगिया ने किया, जबकि संयोजन संयुक्त सचिव प्रदीप चौबे ने संभाला। सेमिनार के बाद आयोजित चाय पर चर्चा एवं नेटवर्किंग सेशन में निर्यातकों ने आगामी अक्टूबर दिल्ली मेले को लेकर अपने सुझाव भी साझा किए।।
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