“मौत नहीं, सिस्टम की नाकामी”, सेक्टर 150 हादसे में SIT ने क्या खुलासा किया

टेन न्यूज नेटवर्क

Noida News (27/04/2026): नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के करीब 100 दिन बाद विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट ने पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि हादसे की रात समय पर सूचना मिलने के बावजूद पुलिस कंट्रोल रूम स्तर पर अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई, जिसके चलते राहत कार्य में देरी हुई।

रिपोर्ट के आधार पर असिस्टेंट रेडियो ऑफिसर (एआरओ), रिजर्व सब-इंस्पेक्टर (आरएसआई) सहित तीन कर्मियों को जिम्मेदार ठहराते हुए निलंबित कर दिया गया है। इन पर विभागीय कार्रवाई भी प्रस्तावित है। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कंट्रोल रूम को घटना की जानकारी समय रहते मिल चुकी थी, लेकिन उसे प्राथमिकता नहीं दी गई और तत्काल बचाव अभियान शुरू करने के बजाय सूचना को आगे बढ़ाने तक सीमित रह गए।

गौरतलब है कि 16 जनवरी की रात 27 वर्षीय युवराज मेहता एक निर्माणाधीन स्थल पर जलभराव वाले गड्ढे में फंस गए थे। उनकी कार पानी में डूब गई थी, जिसके बाद वह खुद को बचाने के लिए वाहन की छत पर चढ़ गए और मोबाइल की रोशनी से मदद का संकेत देते रहे। करीब डेढ़ घंटे तक संघर्ष करने के बावजूद उन्हें समय पर सहायता नहीं मिल सकी और उनकी मौत हो गई।

SIT की जांच में कॉल डिटेल रिकॉर्ड, कंट्रोल रूम की लॉग बुक, वायरलेस संदेश और फील्ड टीमों की गतिविधियों का विश्लेषण किया गया। इन दस्तावेजों से यह सामने आया कि सूचना मिलने और मौके पर कार्रवाई के बीच अनावश्यक देरी हुई। साथ ही, एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय की कमी भी स्पष्ट रूप से सामने आई। विभिन्न विभागों ने अपने-अपने स्तर पर सफाई देते हुए जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने का प्रयास किया।

घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल देखी गई थी। हादसे के दो दिन के भीतर ही प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ को पद से हटा दिया गया था, जबकि अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई थी। हालांकि, SIT रिपोर्ट सामने आने के बाद भी नोएडा प्राधिकरण पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवार का कहना है कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां लंबे समय से गहरा गड्ढा और जलभराव की स्थिति बनी हुई थी। बावजूद इसके, न तो चेतावनी संकेत लगाए गए और न ही रात में दृश्यता के लिए कोई व्यवस्था की गई। सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर ट्रैफिक विभाग की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

बताया जाता है कि घटना के दौरान युवराज ने अपने पिता को फोन कर मदद मांगी थी। परिजन मौके पर पहुंचे, लेकिन राहत टीमों के पहुंचने और प्रभावी कार्रवाई में देरी के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। अगले दिन सुबह उनका शव बरामद किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्तर पर भी जांच कराई गई थी और उच्च अधिकारियों की निगरानी में रिपोर्ट तैयार की गई। रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है, लेकिन पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग अब भी व्यापक जवाबदेही और सुधार की मांग कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर आपदा प्रबंधन और शहरी सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है।


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