Galgotias University में जया किशोरी का प्रेरक संदेश: “मोटिवेशन कोई और नहीं, खुद को ही देना पड़ता है”

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (16/04/2026): गलगोटियास विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा में “जीवाजली: विचारों से बदलाव तक” कार्यक्रम का भव्य और सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध कथावाचक और मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी (Jaya Kishori) मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया और उनके विचारों से प्रेरणा प्राप्त की। कार्यक्रम के दौरान गलगोटियास विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सुनील गलगोटिया (Sunil Galgotia) ने जया किशोरी का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। समापन अवसर पर ध्रुव गलगोटिया (Dhruv Galgotia) ने उन्हें स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया, वहीं अमर उजाला, नोएडा के पुष्पेंद्र चौहान द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया गया।

जीवन की चुनौतियों से भागना नहीं, समाधान खोजना जरूरी

अपने संबोधन में जया किशोरी ने कहा कि जीवन में समस्याएँ आना स्वाभाविक है, लेकिन उनसे भागना नहीं बल्कि समाधान तलाशना चाहिए। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियाँ ही व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा, जीवन में समस्याएँ आना सामान्य है, लेकिन उनसे भागने के बजाय उनका समाधान खोजना ही सही मार्ग है। कठिन परिस्थितियाँ ही व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।

मोटिवेशन का असली स्रोत खुद व्यक्ति होता है

मोटिवेशन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज हर जगह ज्ञान की बातें मौजूद हैं, लेकिन असली चुनौती उन्हें जीवन में लागू करने की होती है। उन्होंने कहा, हर जगह ज्ञान की बातें ही घूम रही हैं और सारे मोटिवेशनल स्पीकर, स्पिरिचुअल स्पीकर, कथाकार जो भी आप कह लो, लाइफ कोच यही पाँच-छह बातें दोहराते हैं। बस सबके तरीके अलग-अलग हैं। आपको बात नहीं अच्छी लगती, आपको लोगों का तरीका अच्छा लगता है। पर बात आपको पहले से पता है।

उन्होंने आगे कहा, दुखद हिस्सा यह है कि जो आपको पहले से पता है, वह भी करने के लिए आपको किसी के आने और बताने का इंतजार रहता है। जबकि जब चलना अपने ही पैरों पर है, तो आप किसी और पर निर्भर क्यों हैं?

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जीवनभर कोई और व्यक्ति आपको प्रेरित नहीं कर सकता। कोई आपको एक घंटे के लिए मोटिवेट कर सकता है, कोई वीडियो आधा घंटा या दो घंटे तक चल सकता है, लेकिन लाइफटाइम आपको मोटिवेट कौन करेगा? आपको खुद को ही करना पड़ेगा, खुद को ही मेहनत करनी पड़ेगी और खुद को ही त्याग करने पड़ेंगे।

असली लक्ष्य होने पर त्याग महसूस नहीं होता

जया किशोरी ने कहा कि जब किसी चीज को पाने की सच्ची इच्छा होती है तो उसके लिए किया गया त्याग त्याग नहीं लगता। उन्होंने कहा, जब आपको कुछ बहुत दिल से चाहिए होता है, तब उसके लिए किए गए सैक्रिफाइस, सैक्रिफाइस नहीं होते। जैसे माँ अपने बच्चे के लिए जो करती है, वह सैक्रिफाइस नहीं बल्कि प्यार होता है।

तुलना छोड़कर अपने लक्ष्य पर ध्यान दें

उन्होंने विद्यार्थियों को दूसरों से तुलना करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा, दूसरी तरफ की घास हमेशा हरी लगती है। जो रोज अपनी घास में पानी डालता है, उसकी घास भी हरी हो जाती है। लेकिन हमारा ध्यान अपनी मेहनत पर नहीं बल्कि दूसरों की सफलता पर रहता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की परिस्थितियाँ अलग होती हैं, इसलिए तुलना करना गलत है।

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं

परीक्षा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कई विद्यार्थी सफलता के लिए मेहनत के बजाय किस्मत या अन्य चीजों पर भरोसा करने लगते हैं। उन्होंने कहा, एग्जाम में कई बार हमारा ध्यान इस पर होता है कि पास में कौन बैठा है, लकी पेन कौन सा है, लकी टी-शर्ट कौन सी है। लेकिन सच यह है कि यह सब वही लोग सोचते हैं जो पढ़कर नहीं जाते। सफलता केवल मेहनत से मिलती है। उन्होंने कहा कि जीवन में हर व्यक्ति का प्रश्नपत्र अलग होता है। एग्जाम में तो प्रश्नपत्र एक जैसा होता है, लेकिन जीवन में किसी का प्रश्नपत्र किसी से नहीं मिलता। इसलिए आपको अपने आज से कल बेहतर बनने की कोशिश करनी चाहिए।

छोटे-छोटे वादे निभाने से बढ़ता है आत्मविश्वास

जया किशोरी ने कहा कि छोटे-छोटे वादों को पूरा करना भी व्यक्ति के आत्मविश्वास को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा, जब आप खुद से छोटे-छोटे वादे करते हैं और उन्हें पूरा नहीं करते, तो आपका सबकॉन्शियस माइंड समझ जाता है कि आप जो कहते हैं वह पूरा नहीं करते। यही कारण है कि बड़ी जिम्मेदारियों के समय आत्म-संदेह पैदा होने लगता है। उन्होंने सलाह दी, अपनी लाइफ में छोटे-छोटे प्रॉमिस पूरे करिए। चाहे सिर्फ अपना बेड ही क्यों न ठीक करना हो। इससे आपके अंदर यह विश्वास पैदा होगा कि मैं जो बोलता हूँ, वह करता हूँ।

रिश्तों में समझौता नहीं, समायोजन जरूरी

रिश्तों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि रिश्तों को निभाने के लिए समझौता नहीं बल्कि समायोजन जरूरी होता है। उन्होंने कहा, कॉम्प्रोमाइज शब्द को अपनी जिंदगी से हटा दीजिए। कॉम्प्रोमाइज का मतलब अपने मन को मारना होता है, जबकि एडजस्टमेंट का मतलब होता है सामने वाले की खुशी के लिए छोटी-छोटी चीजें करना। उन्होंने कहा कि अगर किसी रिश्ते में प्यार खत्म हो जाए और केवल रिश्ता बचा रह जाए, तो वह रिश्ता मायने नहीं रखता।

समाज से ज्यादा परिवार की राय महत्वपूर्ण

जया किशोरी ने कहा कि, जीवन में हर किसी की राय को महत्व देने से व्यक्ति कभी खुश नहीं रह सकता।उन्होंने कहा, आपकी जिंदगी में चार-पाँच लोग ऐसे होने चाहिए जिनकी बात आपको सच में फर्क डालती हो—आपके माता-पिता, भाई-बहन और आपका जीवनसाथी। दुनिया भर के लोगों की राय से प्रभावित होंगे तो जिंदगी कब जिएंगे?

भगवान के प्रति समर्पण से मिलता है आत्मविश्वास

उन्होंने कहा कि, जब व्यक्ति ईश्वर के प्रति समर्पण करता है, तो उसके अंदर अद्भुत शक्ति का संचार होता है। जब व्यक्ति ईश्वर के करीब जाता है, तो उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं—स्वास्थ्य में, मानसिक स्थिरता में और व्यक्तित्व में भी। उन्होंने भगवद्गीता के प्रसिद्ध श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा, जब जीवन में ऐसा समय आए कि कुछ समझ न आए, तब ‘सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज’—सब छोड़कर ईश्वर की शरण में जाना चाहिए।

आध्यात्मिकता और समृद्धि साथ-साथ चल सकती है

भारत के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता और समृद्धि एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। भारत को कभी ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था। उस समय भारत में धन भी था और अध्यात्म भी था। इसका मतलब है कि दोनों एक साथ चल सकते हैं।

दृष्टिकोण से बदलती है जिंदगी

अंत में उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन में दृष्टिकोण बहुत महत्वपूर्ण होता है। दो लोग पत्थर तोड़ रहे थे—एक ने कहा कि वह मेहनत से परेशान है, जबकि दूसरे ने कहा कि वह मंदिर बना रहा है। उन्होंने कहा कि काम वही होता है, लेकिन दृष्टिकोण बदलने से अनुभव बदल जाता है।

जया किशोरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि एक सामान्य इंसान के भीतर तीन गुण होते हैं—सात्विक, राजसिक और तामसिक। पहले यह माना जाता है कि एक सामान्य व्यक्ति में ये तीनों गुण थोड़ी-थोड़ी मात्रा में होते हैं। जब व्यक्ति थोड़ा आगे बढ़ता है, तो उसे तामसिक गुणों को कम करके राजसिक और सात्विक गुणों को अपनाना चाहिए। और यदि कोई व्यक्ति आध्यात्मिकता के उच्च स्तर तक पहुँचना चाहता है, तो उसे पूरी तरह सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए।

ये तीनों गुण हमारे जीवन के हर हिस्से में दिखाई देते हैं—चाहे वह हमारा भोजन हो, शारीरिक गतिविधियाँ हों, सोने की आदतें हों या पढ़ने की आदतें। हर चीज़ में सात्विक, राजसिक और तामसिक गुण मौजूद होते हैं। यहाँ तक कि हमारे भोजन में भी इन तीनों प्रकार के गुण होते हैं।

अक्सर विद्यार्थी कहते हैं कि वे पढ़ाई तो करते हैं, लेकिन परीक्षा के समय उन्हें चीज़ें याद नहीं रहतीं। इसका एक बड़ा कारण हमारी जीवनशैली होती है। कई छात्र परीक्षा के समय पूरी रात जागकर पढ़ते हैं, लेकिन वे अपने शरीर को आराम देने का समय ही नहीं देते। जिस तरह भोजन के बाद शरीर को उसे पचाने के लिए समय चाहिए, उसी तरह दिमाग को भी पढ़ी हुई चीज़ों को व्यवस्थित करने और याद रखने के लिए समय चाहिए। यदि आप लगातार रात भर जागते रहेंगे और अगले दिन परीक्षा देने चले जाएंगे, तो दिमाग पूरी तरह व्यवस्थित नहीं हो पाता।

इसके साथ ही कई छात्र रात को जागते समय जंक फूड खाते हैं। इससे शरीर में सुस्ती और आलस्य बढ़ता है, पढ़ाई में मन नहीं लगता और कई बार ऐसा होता है कि आप एक ही पन्ने पर लंबे समय तक टिके रहते हैं, लेकिन दिमाग में कुछ नहीं जाता। कई बार विद्यार्थी ‘ब्लैंक आउट’ हो जाते हैं। इसका एक कारण हमारी गलत खान-पान की आदतें भी होती हैं।

शास्त्रों में सोने, खाने और जीवन जीने की सही आदतों के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसलिए मैं हर छात्र से कहती हूँ कि शास्त्रों को पढ़िए। वे केवल पूजा-पाठ या मंदिर जाना नहीं सिखाते, बल्कि जीवन जीने का सही तरीका सिखाते हैं।

उदाहरण के लिए अर्जुन को देखिए। अर्जुन एक महान योद्धा थे। उन्होंने भगवान शिव के साथ भी युद्ध किया था। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि वे युद्ध से डर रहे थे। असल में वे कन्फ्यूज थे—उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि अपने ही लोगों के खिलाफ युद्ध करें या नहीं। यही कारण है कि भगवद्गीता की शुरुआत भी ‘कन्फ्यूजन’ से होती है।

उन्होंने कहा, हमारी जिंदगी की सबसे बड़ी समस्या भी यही है कि हमें निर्णय लेने में उलझन होती है—यह करें या न करें, यह करियर चुनें या वह, इस शहर में जाएँ या उस शहर में, यह रिश्ता सही है या नहीं। आजकल युवाओं का बहुत ध्यान इन्हीं बातों में लगा रहता है। अगर आपको कोई पसंद है तो वह भी ठीक है। लेकिन सच यह है कि सही समय तब होता है जब आप खुद जिम्मेदार और परिपक्व बन चुके हों। जिस व्यक्ति को जिम्मेदारी का मतलब ही नहीं पता, वह रिश्तों को सही तरीके से निभा नहीं सकता।

अगर आपको यह समझना है कि कोई व्यक्ति आपके लिए सही है या नहीं, तो एक बात याद रखिए—सही व्यक्ति वही होगा जो आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे। मान लीजिए आप पढ़ाई करने जा रहे हैं और सामने वाला भी कहे कि ‘ठीक है, मेरा भी पढ़ने का समय है’—तो वह सही साथी है। लेकिन अगर वह कहे ‘थोड़ी देर और बात करो’ या पढ़ाई से रोकने की कोशिश करे, तो समझ जाइए कि वह आपके अनुशासन को नहीं समझता।

समय बहुत मूल्यवान है। दुनिया में लगभग हर चीज़ वापस मिल सकती है—पैसा, पद, अवसर—लेकिन समय कभी वापस नहीं आता। जीवन की एक उम्र होती है जब आपकी ऊर्जा, जागरूकता और सीखने की क्षमता सबसे अधिक होती है। यदि उस समय को सही काम में नहीं लगाया, तो बाद में पछतावा रह जाता है।

अपने पिता के बारे में कहा कि, मेरे पिता हमेशा कहते थे—‘समय बर्बाद मत करो, क्योंकि एक दिन ऐसा आएगा जब समय तुम्हें बर्बाद कर देगा।’ इसलिए जब भी आप कोई काम करें, उसे पूरी ईमानदारी और 100 प्रतिशत समर्पण के साथ करें। यदि आप मनोरंजन भी कर रहे हैं, तो उसे भी पूरी तरह करें। उस समय यह मत सोचिए कि आपको कुछ और करना चाहिए था। आधे मन से किया गया काम समय की बर्बादी है।

आगे जीवन के बारे में कहा की, हमारे जीवन में भी कई बार पिछले असफल अनुभव हमें यह विश्वास दिला देते हैं कि हम आगे भी सफल नहीं हो पाएंगे। लेकिन मेरे लिए असफलता असफलता नहीं है, वह एक सीख है। भगवान ने हमें हारने या जीतने के लिए नहीं, बल्कि सीखने के लिए भेजा है। जितना हम सीखते जाते हैं, उतना ही आगे बढ़ते जाते हैं।

कई बार सफलता घमंड भी ला सकती है, लेकिन असफलता हमेशा सीख देती है। जो व्यक्ति जितनी अधिक असफलताओं का सामना करता है, वह उतना ही मजबूत और सफल बनता है।

आज के समय में सोशल मीडिया की वजह से प्रसिद्ध होना बहुत आसान हो गया है। कोई भी कुछ भी करके प्रसिद्ध हो सकता है। लेकिन प्रसिद्ध होने और सफल होने में बहुत बड़ा अंतर है। हर प्रसिद्ध व्यक्ति सफल नहीं होता, लेकिन हर सफल व्यक्ति प्रसिद्ध हो सकता है।

इसलिए आपको प्रसिद्धि के पीछे नहीं, बल्कि वास्तविक सफलता के पीछे जाना चाहिए। सफलता पाने में समय लगता है। सफल होना उतना कठिन नहीं है, लेकिन सफलता को लंबे समय तक बनाए रखना सबसे कठिन काम है। कई लोग अचानक सफल हो जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद सब कुछ खो देते हैं। इसलिए असली सफलता वही है जो धैर्य, मेहनत और अनुभव के साथ मिलती है।

उनके अनुसार सफलता के लिए सबसे अच्छी आदत है—सुनने की आदत। शास्त्र हमें तीन बातें बताते हैं: ‘श्रवण, चिंतन और मनन।’ यानी पहले सुनो, फिर उस पर सोचो और फिर उसे अपने जीवन में उतारो। यही जीवन में आगे बढ़ने का सही रास्ता है।”

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे, जिनका जया किशोरी ने सरल और प्रेरणादायक तरीके से उत्तर दिया। उन्होंने युवाओं को सकारात्मक सोच, अनुशासन, ध्यान और आत्म-नियंत्रण को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में छोटे-छोटे बदलाव लाकर बड़े लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।।


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