मिनिमम वेजेज एक्ट का कड़ाई से होता पालन तो श्रमिकों द्वारा नहीं जताई जाती नाराजगी: कर्मवीर नागर प्रमुख
टेन न्यूज़ नेटवर्क
Noida News (14 अप्रैल 2026): श्रमिक नेता कर्मवीर नागर प्रमुख ने कहा कि, अब तो ऐसा प्रतीत होने लगा है कि सरकारों द्वारा जनहित में बनाए गए एक्ट केवल सरकारों द्वारा किए जाने वाले प्रचार प्रसार तक सीमित रह गए हैं। ऐसे कानूनों को धरातल पर कड़ाई से अमल में लाने के प्रति कोई सरकार वचनबद्ध नजर नहीं आती। निजी उद्योगों में मिनिमम वेजेज एक्ट का अनुपालन तो बहुत दूर की बात है सरकारी दफ्तरों में भी नियोक्ता आउटसोर्सिंग के ठेकों में मिनिमम वेजेस एक्ट के तहत कर्मचारियों को वेतन भुगतान नहीं करा पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि, अगर नोएडा में श्रमिकों द्वारा कम वेतन मिलने की नाराजगी के चलते उग्र हुए आंदोलन के परिपेक्ष्य में देखें तो इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि इन तमाम उद्योगों ने स्थाई रोजगार देना बंद करके ठेकेदारी प्रथा पर काम कराया जा रहा है लेकिन ध्यान देने योग्य विशेष बात यह है कि कंपटीशन में ठेका लेने वाली फर्में कई बार मिनिमम वेजेज एक्ट में किए गए प्रावधान से भी कम रेट पर ठेका ले लेती हैं तो ऐसे में विचारणीय प्रश्न यह है कि ठेका लेने वाली वह फर्म जो ठेका अनुबंध में तमाम सेवा शर्तों का एग्रीमेंट करती है ऐसे में वह कंपनी से मिलने वाली समस्त धनराशि को अपने मजदूर को भुगतान कर देगी तो ठेकेदार को क्या फायदा होगा ? ऐसा नही है कि मिनिमम वेजेज एक्ट का उल्लंघन केवल प्राइवेट उद्योगों में ही किया जा रहा हो सरकारी दफ्तर में भी आउटसोर्सिंग का ठेका कम से कम रेट डालने वालों को दिया रहा है। ऐसे में सरकार के लिए सोचने का विषय यह है कि मिनिमम वेजेज एक्ट का अनुपालन सख्ती से कैसे कराया जाए ? क्योंकि कुछ मामलों में ऐसा भी देखा गया है कि मिनिमम वेजेज एक्ट के तहत वेतन तो ऑन रिकॉर्ड भुगतान कर दिया जाता है लेकिन भुगतान के बाद धनराशि वापस ले ली जाती है।
मरता क्या नहीं करता जो बेरोजगारी के दंश से पीड़ित है वह अपना रोजी रोजगार बचाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाता है। हिंसक आंदोलन पर उतारू हुए नोएडा के श्रमिकों को भी शायद कम वेतन देकर अधिक पर हस्ताक्षर करने जैसा आर्थिक उत्पीड़न ठेका फर्मो द्वारा लंबे समय से किया जा रहा था। नौकरी से निकाले जाने के भय शायद श्रमिक ऐसा करने के लिए मजबूर थे। नोएडा में श्रमिकों के आंदोलन की खबर लगते ही कल मुजफ्फरनगर में आयोजित कार्यक्रम के मंच से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने नोएडा की घटना पर फोकस करते हुए कहा कि सरकार जल्दी ही ऐसा प्रावधान करने जा रही है कि श्रमिकों को वेतन बिचौलियों के माध्यम से नहीं बल्कि सीधे उनके अकाउंट में जाएगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि श्रमिकों के खाते में उनका वेतन भुगतान करने के बाद रोजगार देने वालों के द्वारा श्रमिकों से वापिस धनराशि न लेने पर सरकार क्या और कैसे अंकुश लग पाएगी ? क्योंकि ठेका लेने के बाद श्रमिक को नौकरी पर रखना ठेकेदार की अपनी मर्जी है इसी लाचारी का फायदा उद्योग और ठेकेदार दोनों ही उठाते रहे हैं।
इसलिए सरकारों को मिनिमम वेजेस एक्ट अथवा उससे कम पर आउटसोर्सिंग का ठेका देने पर सख्ती से रोक लगाते हुए ठेका फर्मों को 10% अथवा जो भी उचित हो अलग से भुगतान का प्रावधान सुनिश्चित करना होगा और यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ठेकेदार नौकरी से निकालने की धमकी देकर श्रमिकों से वसूली न कर सके। तभी सरकार द्वारा मिनिमम वेजेस एक्ट का ठीक से अनुपालन हो सकेगा और नोएडा जैसी हिंसक घटनाओं से बचा जा सकेगा अन्यथा महंगाई के इस युग में श्रमिक आंदोलनों की ऐसी और भी हिंसक घटनाएं घटित हो सकती है।।
प्रिय पाठकों एवं दर्शकों, प्रतिदिन भारत सरकार , दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय एवं दिल्ली राजनीति , दिल्ली मेट्रो, दिल्ली पुलिस तथा दिल्ली नगर निगम, NDMC, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की ताजा एवं बड़ी खबरें पढ़ने के लिए hindi.tennews.in : राष्ट्रीय न्यूज पोर्टल को विजिट करते रहे एवं अपनी ई मेल सबमिट कर सब्सक्राइब भी करे। विडियो न्यूज़ देखने के लिए TEN NEWS NATIONAL यूट्यूब चैनल को भी ज़रूर सब्सक्राइब करे।
टेन न्यूज हिंदी | Ten News English | New Delhi News | Greater Noida News | NOIDA News | Yamuna Expressway News | Jewar News | NOIDA Airport News.
Discover more from टेन न्यूज हिंदी
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
टिप्पणियाँ बंद हैं।