श्रीराम कथा के पांचवें दिन बाल लीलाओं के प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (11/04/2026): ग्रेटर नोएडा के ऐछर बिरोड़ा, सेक्टर पाई-1 स्थित रामलीला मैदान में श्री धार्मिक रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित राम कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज की अमृतमयी वाणी से चल रही कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और राम नाम के जयकारों से पूरा पंडाल गुंजायमान हो उठा। यह राम कथा 6 अप्रैल से शुरू हुई है और 14 अप्रैल तक चलेगी।

कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने कहा कि बचपन के संस्कार ही व्यक्ति निर्माण में सहायक होते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम के दर्शन मात्र से ही इंद्र एवं अहिल्या का उद्धार हो गया। कथा के दौरान कागभुशुण्डी जी का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि कागभुशुण्डी जी कोई सामान्य कौवा नहीं थे। उन्होंने भगवान श्रीराम के जन्म के बाद संकल्प लिया था कि जब तक भगवान पांच वर्ष के नहीं हो जाएंगे, तब तक वे अवध में ही रहकर उनकी बाल लीलाओं का दर्शन करेंगे।

इस प्रसंग को स्पष्ट करते हुए उन्होंने सूरदास जी का प्रसिद्ध भजन भी सुनाया‌ खेलत खात फिरे अंगना, पग पैजनी बाजत पीली कछोटी।‌काग के भाग कहा कहिए, हरि हाथ से ले गयो माखन रोटी।।”

कथा व्यास जी ने कहा कि कागभुशुण्डी जी ने संकल्प लिया था कि भगवान के हाथ का जो अंश गिरेगा, वही प्रसाद रूप में ग्रहण करेंगे। उन्होंने बताया कि भगवान भोलेनाथ भी कागभुशुण्डी जी से श्रीराम कथा सुनने जाया करते थे। बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम धूल में खेलते थे और राजा दशरथ के कहने पर माता कौशल्या उन्हें गोद में उठाकर लाती थीं। नामकरण संस्कार की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि नाम ही मनुष्य का भाग्य और भविष्य तय करता है। श्रीराम का नाम लेने मात्र से ही जीवन धन्य हो जाता है।

उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त बुराइयों का मुख्य कारण शिक्षा का अभाव है। हमारी प्राचीन शिक्षा व्यवस्था धर्म, त्याग और परोपकार पर आधारित थी। उन्होंने बताया कि हिन्दू धर्म में 16 संस्कार बताए गए हैं, जिनमें नामकरण संस्कार का विशेष महत्व है।

उन्होंने कहा जो आनंद सिंधु सुख राशि, सिकर त्रैलोक सुपासी। सो सुखधाम राम अस नामा, अखिल लोकदायक विश्रामा।। आगे कथा में उन्होंने बताया कि जब ऋषि विश्वामित्र यज्ञों की रक्षा के लिए श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ ले गए, तब ताड़का, मारीच और सुबाहु का वध हुआ। इसके बाद सीता स्वयंवर के लिए मिथिला जाते समय गौतम ऋषि के श्राप से शिला बनी अहिल्या का उद्धार हुआ।

अहिल्या उद्धार प्रसंग पर उन्होंने कहा कि मनुष्य से जीवन में कभी न कभी गलती हो जाती है, लेकिन उसका प्रायश्चित करना आवश्यक है। पाप को छिपाने से वह बढ़ता है और स्वीकार करने से उसका निवारण होता है। यदि किसी से क्षमा नहीं मांग सकते, तो अपने इष्ट देव के समक्ष सच्चे मन से क्षमा याचना करनी चाहिए।

कथा व्यास जी ने कहा कि हनुमान जी की तरह भगवान के नाम का सुमिरन और कीर्तन जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

आज के मुख्य यजमान हरवीर मावी एवं सह-यजमान शेर सिंह भाटी और धीरज शर्मा रहे। दैनिक यजमान के रूप में सुबोध नागर और राजू भाटी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रचारक ईश्वर दयाल, स्वामी सुशील महाराज, प्रांत प्रचारक वेदपाल जी, जिला प्रचारक नेमपाल जी, राजकुमार जी, अध्यक्ष आनंद भाटी, पंडित प्रदीप शर्मा, कुलदीप शर्मा, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, ममता तिवारी, मनीष डावर, अतुल आनंद, फिरे प्रधान, सत्यवीर मुखिया, महेश शर्मा बदौली, उमेश गौतम, रोशनी सिंह, वीरपाल मावी, तेज कुमार भाटी, सुंदर भाटी, भगवत भाटी, ज्योति सिंह, अश्विनी शुक्ला, राकेश बैसोया, रश्मि अरोड़ा, गीता सागर, यशपाल नागर, चैनपाल प्रधान, अजय कसाना, पवन भाटी, राजेश नंबरदार एवं राकेश नंबरदार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।।


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