जलभराव मुक्त दिल्ली की तैयारी: ‘मिंटो रोड मॉडल’ पर सख्ती, नाला साफ करने का अल्टीमेटम

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (10 April 2026): राजधानी नई दिल्ली में हर साल मॉनसून के दौरान सड़कों पर जलभराव की समस्या से जूझने वाली तस्वीरों को बदलने के लिए इस बार सरकार ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उच्चस्तरीय बैठक में साफ कर दिया कि इस बार किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम करने के निर्देश देते हुए 30 जून तक हर हाल में नालों की डी-सिल्टिंग पूरी करने का लक्ष्य तय किया है, ताकि बारिश से पहले तैयारियां मुकम्मल हो सकें।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी कि इस बार केवल फाइलों में काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी हकीकत भी देखी जाएगी। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान वह खुद सड़कों पर उतरकर निरीक्षण करेंगी। अगर कहीं भी जलभराव की स्थिति पाई जाती है तो संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और कार्रवाई भी होगी। इस स्पष्ट संदेश ने प्रशासनिक अमले में गंभीरता बढ़ा दी है।

मुख्यमंत्री ने वर्षों से जलभराव के प्रतीक रहे मिंटो रोड का उदाहरण देते हुए कहा कि बेहतर समन्वय और निगरानी से वहां की स्थिति में सुधार संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि “मिंटो रोड जैसा बदलाव अब पूरी दिल्ली में दिखना चाहिए।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एमसीडी और पीडब्ल्यूडी के बीच जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति अब नहीं चलेगी, और सभी विभागों को ‘टीम दिल्ली’ के रूप में काम करना होगा।

तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पारंपरिक तरीकों की जगह आधुनिक मशीनों का उपयोग बढ़ाया जाएगा। सुपर सकर मशीनों और अन्य उन्नत उपकरणों के जरिए नालों की सफाई तेज और प्रभावी तरीके से की जाएगी। एमसीडी और एनडीएमसी द्वारा प्रस्तुत नई मशीनों की कार्ययोजना की सराहना करते हुए उन्होंने बाकी विभागों को भी तकनीक आधारित समाधान अपनाने के निर्देश दिए, ताकि जल निकासी की प्रक्रिया बेहतर हो सके।

सख्त निगरानी के तहत मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि नालों से निकाली गई गाद को सड़कों पर छोड़ने की गलती न दोहराई जाए। उसे तुरंत तय डंपिंग साइट्स तक पहुंचाना अनिवार्य होगा। साथ ही, बारिश के दौरान नालियों को जाम करने वाले कूड़े की समस्या से निपटने के लिए विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त मशीनों व कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक में दीर्घकालिक समाधान पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल पंप लगाकर पानी निकालना स्थायी हल नहीं है, बल्कि सरकार एक व्यापक ड्रेनेज मास्टर प्लान पर काम कर रही है। इसमें नालों के ढाल को सही करना, अवरोध हटाना और जल प्रवाह को प्राकृतिक बनाना शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे फील्ड में सक्रिय रहें और जमीनी स्तर पर काम की निगरानी करें, क्योंकि इस बार सरकार का लक्ष्य सिर्फ समस्या से निपटना नहीं, बल्कि उसे स्थायी रूप से खत्म करना है।


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