दिल्ली की 1511 अनधिकृत कॉलोनियों को ‘जहां है, जैसा है’ आधार पर बड़ी राहत, कब से शुरू होंगे आवेदन

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (07 April 2026): दिल्ली के लाखों निवासियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने राजधानी की 1511 अनधिकृत कॉलोनियों को “जहां है, जैसा है” के आधार पर नियमित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि यह फैसला दिल्लीवासियों के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा और इससे उन्हें अपनी संपत्तियों पर कानूनी अधिकार प्राप्त करने का रास्ता साफ होगा।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में लागू की गई पीएम-उदय योजना का उद्देश्य अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को स्वामित्व अधिकार देना था, लेकिन लेआउट प्लान की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई थी। अब इस नई व्यवस्था के तहत बिना अनुमोदित लेआउट योजना के भी कॉलोनियों का नियमितीकरण किया जाएगा, जिससे लोगों को संपत्ति पंजीकरण और भवन निर्माण की अनुमति लेने में आसानी होगी।

इस मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह निर्णय 45 लाख से अधिक लोगों के जीवन में सम्मान, राहत और अधिकारों का नया अध्याय जोड़ेगा। उन्होंने बताया कि 1731 में से 1511 कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके लिए 24 अप्रैल 2026 से स्वगम पोर्टल पर आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आवेदन के बाद 7 दिनों में जीआईएस सर्वे, 15 दिनों में कमियों का निवारण और 45 दिनों के भीतर हस्तांतरण विलेख जारी करने का लक्ष्य तय किया गया है।

सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत सरकारी भूमि पर बनी संपत्तियों के लिए हस्तांतरण विलेख (Conveyance Deed) और निजी भूमि पर बनी संपत्तियों के लिए अधिकार पर्ची जारी की जाएगी। 31 मार्च 2026 तक करीब 40,000 ऐसे दस्तावेज जारी भी किए जा चुके हैं।
नई नीति के तहत कॉलोनियों में सभी भूखंडों को आवासीय उपयोग माना जाएगा और छोटे दुकानों (20 वर्ग मीटर तक) को भी निर्धारित शर्तों के साथ नियमित किया जाएगा। वहीं, पुनर्निर्माण या पुनर्विकास के मामलों में सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन का कुछ हिस्सा छोड़ना अनिवार्य होगा और एफएआर नियमों के अनुसार निर्माण की अनुमति दी जाएगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ क्षेत्रों जैसे वन क्षेत्र, यमुना बाढ़ क्षेत्र (Zone-O), संरक्षित स्मारक क्षेत्र, हाई टेंशन लाइन क्षेत्र और पहाड़ी इलाके को इस योजना से बाहर रखा गया है। इसके अलावा 69 समृद्ध कॉलोनियां भी इस दायरे में शामिल नहीं हैं।

इस पूरी प्रक्रिया में डीडीए, एमसीडी और जीएनसीटीडी के बीच समन्वय स्थापित किया गया है ताकि नागरिकों को एकीकृत और सरल व्यवस्था मिल सके। ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन, सत्यापन और दस्तावेज जारी करने की प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित होंगी।

कुल मिलाकर, यह निर्णय दिल्ली के अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए न केवल कानूनी पहचान का रास्ता खोलेगा, बल्कि उन्हें बेहतर बुनियादी सुविधाएं और शहरी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाएगा।।


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