New Delhi News (07 April 2026): नई दिल्ली में इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) के 39वें दीक्षांत समारोह में देश के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा किसी वर्ग विशेष तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाज के हर व्यक्ति तक उसकी पहुंच सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने अपने संबोधन में यह स्पष्ट किया कि सीखना केवल एक समय तक सीमित प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह जीवनभर चलने वाली यात्रा है। इस अवसर पर तरनजीत सिंह संधू भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई।
उपराष्ट्रपति ने IGNOU की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय देश के कोने-कोने में शिक्षा का प्रसार कर रहा है और दूर-दराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए उच्च शिक्षा का माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि IGNOU अब केवल “डिस्टेंस लर्निंग” तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह “क्लोजेस्ट लर्निंग सिस्टम” के रूप में विकसित हो चुका है, जो छात्रों को उनके नजदीक रहकर शिक्षा उपलब्ध कराता है। यह संस्थान उन लोगों के लिए विशेष रूप से उम्मीद की किरण बना है, जो संसाधनों की कमी के कारण पारंपरिक शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
दीक्षांत समारोह की खास बात यह रही कि इस बार 3.24 लाख से अधिक छात्रों को डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट प्रदान किए गए, जो इसे देश के सबसे बड़े दीक्षांत आयोजनों में से एक बनाता है। उल्लेखनीय है कि इनमें 58 प्रतिशत से अधिक छात्राएं शामिल रहीं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत संकेत है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि IGNOU न केवल शिक्षा का विस्तार कर रहा है, बल्कि समाज में लैंगिक समानता को भी बढ़ावा दे रहा है।
उपराष्ट्रपति ने यह भी बताया कि IGNOU के अधिकांश छात्र ग्रामीण और वंचित वर्गों से आते हैं, जो इस संस्थान को एक सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बनाता है। कोविड-19 महामारी के दौरान जब अधिकांश शिक्षण संस्थान बंद हो गए थे, तब IGNOU ने डिजिटल माध्यमों के जरिए शिक्षा को जारी रखा। SWAYAM और eGyanKosh जैसे प्लेटफॉर्म्स ने छात्रों को घर बैठे पढ़ाई से जोड़े रखा और शिक्षा के प्रवाह को बाधित नहीं होने दिया।
तकनीक के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीकों से डरने के बजाय उन्हें अपनाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब भारत में कंप्यूटर का आगमन हुआ था, तब लोगों को नौकरियां खत्म होने का डर था, लेकिन आज वही तकनीक देश की आर्थिक प्रगति का आधार बन चुकी है। इसी तरह, नई तकनीकों को अपनाकर ही भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकता है।
अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सराहना करते हुए कहा कि इससे शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर खुले हैं। चार वर्षीय डिग्री और मल्टीपल एग्जिट ऑप्शन जैसी व्यवस्थाओं से छात्रों को लचीलापन मिला है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और मूल्यों के महत्व पर भी बल दिया और युवाओं से “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को साकार करने में योगदान देने का आह्वान किया। तमिल संत तिरुवल्लुवर के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जैसे कुएं को जितना गहरा खोदा जाए, उतना अधिक पानी मिलता है, वैसे ही निरंतर सीखने से ज्ञान भी बढ़ता है इसलिए सीखना कभी बंद नहीं करना चाहिए।।
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