New Delhi News (06 अप्रैल 2026): नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ मेडिटेशन लीडर्स (Global Conference of Meditation Leaders) में देश-विदेश के आध्यात्मिक नेताओं, नीति निर्माताओं और विद्वानों ने ध्यान (Meditation) को शांत और समृद्ध विश्व निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति डॉ. सी. पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और उन्होंने ध्यान को आधुनिक समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति डॉ. सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि आज दुनिया संघर्ष, तनाव और असहिष्णुता (Intolerance) के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि युद्ध केवल देशों के बीच नहीं, बल्कि परिवारों और समाज के भीतर भी देखने को मिल रहे हैं, जिसका मुख्य कारण अहंकार और संवाद की कमी है। उन्होंने कहा कि ध्यान व्यक्ति को आत्मचिंतन (Self-Reflection), धैर्य और बेहतर निर्णय क्षमता प्रदान करता है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि तेज़ रफ्तार जीवनशैली (Fast-paced Lifestyle) में लोग जीवन को समझने के बजाय केवल भाग रहे हैं। ऐसे में ध्यान व्यक्ति को अपने भीतर झांकने और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने का अवसर देता है। उन्होंने यह भी कहा कि ध्यान युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस अवसर पर पद्मश्री डी. आर. कार्तिकेयन, पूर्व निदेशक सीबीआई एवं पूर्व महानिदेशक सीआरपीएफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) घोषित किए जाने के बाद दुनिया भर में योग और ध्यान के प्रति जागरूकता बढ़ी है। उन्होंने बताया कि इसी पहल से प्रेरित होकर 21 दिसंबर 2024 को विश्व ध्यान दिवस (World Meditation Day) मनाने की शुरुआत हुई।

क्वांटम लाइफ यूनिवर्सिटी की सह-संस्थापक डॉ. लक्ष्मी कोंडावेटी ने अपने संबोधन में वर्तमान में जीने का संदेश देते हुए कहा कि जीवन की वास्तविक खुशियाँ भविष्य में नहीं बल्कि वर्तमान क्षण (Present Moment) में मिलती हैं। वहीं परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि दुनिया को मेडिसिन (Medicine) से ज्यादा मेडिटेशन (Meditation) की जरूरत है और भारत विश्व को शांति का मार्ग दिखा सकता है।
कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर, ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव और पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटी मूवमेंट के संस्थापक ब्रह्मऋषि पितामह पत्रिजी ने वीडियो संदेश के माध्यम से अपने विचार साझा किए।
सम्मेलन का समापन क्वांटम लाइफ यूनिवर्सिटी के संस्थापक डॉ. न्यूटन कोंडावेटी द्वारा सात मिनट के सामूहिक ध्यान (Collective Meditation) के साथ किया गया। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में विश्वभर के डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और आध्यात्मिक गुरुओं ने भाग लेकर ध्यान के माध्यम से वैश्विक शांति (Global Peace) और सकारात्मक जीवनशैली (Positive Lifestyle) का संदेश दिया।
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