CBSE की तीन-भाषा नीति सुप्रीम कोर्ट पहुंची, 9वीं के छात्रों के लिए नई व्यवस्था पर उठे सवाल

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (22 May 2026): केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE की नई तीन-भाषा नीति अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। 1 जुलाई 2026 से लागू होने जा रही इस नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। नई व्यवस्था के तहत कक्षा 9 के छात्रों के लिए कम से कम दो भारतीय भाषाओं सहित तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इस फैसले को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के एक समूह ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई नीति अचानक लागू किए जाने से छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव बढ़ेगा और कई स्कूलों में भाषा शिक्षकों की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती बन सकती है।

यह मामला शुक्रवार को वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने उठाया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच के समक्ष रोहतगी ने कहा कि यह एक अत्यंत जरूरी जनहित याचिका है। उन्होंने दलील दी कि सीबीएसई की नई भाषा नीति से शिक्षा व्यवस्था में “अफरा-तफरी” की स्थिति पैदा हो सकती है। रोहतगी ने अदालत से इस मामले की जल्द सुनवाई की मांग करते हुए सोमवार को ही सुनवाई तय करने का अनुरोध किया, हालांकि कोर्ट ने कहा कि मामला अगले सप्ताह सूचीबद्ध किया जाएगा क्योंकि फिलहाल अदालत में विविध सप्ताह चल रहा है।

सीबीएसई के हालिया सर्कुलर के अनुसार, नई नीति के तहत छात्रों को कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 यानी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बहुभाषिक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया बताया जा रहा है। नीति का उद्देश्य छात्रों को विभिन्न भाषाओं के प्रति प्रोत्साहित करना और भारतीय भाषाओं के अध्ययन को मजबूत करना है। इसके साथ ही राज्यों और स्कूलों को भाषा चयन में लचीलापन देने की भी बात कही गई है ताकि स्थानीय परिस्थितियों और संसाधनों के आधार पर फैसले लिए जा सकें।
हालांकि नई नीति को लेकर कई स्तरों पर बहस शुरू हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग इसे भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहा है, जबकि कुछ अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि इससे छात्रों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है। खासकर उन स्कूलों में जहां पहले से ही भाषा शिक्षकों की कमी है या जहां छात्र किसी विशेष भाषा पृष्ठभूमि से आते हैं, वहां इस नीति को लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में भाषाई विविधता और शिक्षा व्यवस्था की भिन्न परिस्थितियों को देखते हुए भी इस नीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है। अदालत में यह तय होगा कि सीबीएसई की नई तीन-भाषा नीति को लागू करने की प्रक्रिया और उसके प्रावधान संविधान तथा शिक्षा के अधिकार के दायरे में किस तरह देखे जाएंगे। इस मामले का असर देशभर के लाखों छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों पर पड़ सकता है। वहीं शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग मान रहे हैं कि अदालत की टिप्पणी भविष्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की दिशा को भी प्रभावित कर सकती है।


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