चुनौतियों के बीच शिक्षा से तय किया सफर, प्रो. रूबी मिश्रा का प्रेरक संबोधन | Ten Talks
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (12/03/2026): अग्रणी डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म “टेन न्यूज़ नेटवर्क” द्वारा जनहित और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों को सकारात्मक और निष्पक्ष रूप से सामने लाने की अपनी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मंगलवार, 10 मार्च को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में गलगोटियास यूनिवर्सिटी के सहयोग से एक विशेष ज्ञानवर्धक टॉक शो “टेन टॉक्स” का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राजनीति, शिक्षा, कानून, समाज सेवा और अध्यात्म जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने हिस्सा लेकर अपने अनुभव और विचार साझा किए।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद पी. संतोष कुमार, अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद और राज्यसभा सांसद पी. विल्सन उपस्थित रहे। सभी मुख्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर मंच से देश के विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों और समाज में सकारात्मक योगदान देने वाले विभिन्न क्षेत्रों की भूमिका पर व्यापक चर्चा की गई।
इसी कड़ी में भगिनी निवेदिता कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. रूबी मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी उम्र अभी 48 वर्ष है और उन्हें लगता है कि उनकी यात्रा अभी शुरू ही हुई है। उन्होंने बताया कि वह एक शिक्षिका और शिक्षाविद् हैं और हाल ही में उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारी भी मिली है। उन्होंने अपनी बात एक पंक्ति के साथ शुरू की “सफर में धूप तो होगी ही, चल सको तो चलो, सभी हैं राह में, तुम भी संभल सको तो चलो।”
प्रो. रूबी मिश्रा ने बताया कि वह ऐसे हिंदी भाषी क्षेत्र से आती हैं जहाँ उस समय लड़कियों की पढ़ाई को लेकर परिवारों में कई तरह की चुनौतियाँ होती थीं। उन्होंने कहा कि वह एक सैनिक परिवार से हैं और उनके पिता गार्ड रेजिमेंटल सेंटर से जुड़े रहे। उन्होंने बताया कि बचपन में उनके पिता उन्हें 1971 के युद्ध की कहानियाँ सुनाया करते थे। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में शिक्षा और संस्कारों का वातावरण था, जहाँ उनके दादा उनकी माता को बैठाकर रामायण का पाठ करवाते थे।
उन्होंने अपने बचपन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब वह कक्षा 6 में थीं, उसी दौरान उनके पिता की पोस्टिंग सियाचिन ग्लेशियर में हो गई थी। उस समय परिवार के सामने कई चुनौतियाँ थीं, क्योंकि बच्चों की पढ़ाई और देखभाल की जिम्मेदारी उनकी माता पर आ गई थी। बाद में दिल्ली में सेपरेटेड अकोमोडेशन मिलने से पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि परिवार की सबसे बड़ी बेटी होने के कारण उन्हें जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ना पड़ा, लेकिन पढ़ाई जारी रखने का संकल्प बना रहा।

उन्होंने कहा कि उस दौर में साहित्य और प्रेरणादायक रचनाओं ने भी उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी रचनाएँ युवाओं में साहस और आत्मविश्वास जगाने का काम करती हैं।
प्रो. रूबी मिश्रा ने बताया कि उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और पिछले लगभग 20 वर्षों से अध्यापन कार्य से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षण उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और उन्हें पढ़ाना हमेशा से पसंद रहा है। भाषा को लेकर आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने विज्ञान विषय को चुना, क्योंकि गणित और संख्याओं के माध्यम से स्वयं को बेहतर ढंग से व्यक्त कर पाती थीं। उन्होंने बताया कि वह गणित में अच्छी थीं और बाद में उन्होंने रसायन विज्ञान को अपना विषय चुना तथा केमिस्ट्री की प्रोफेसर बनीं।
अपने संबोधन में उन्होंने वर्तमान समय में युवाओं के सामने मौजूद चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को किसी भी जानकारी पर विश्वास करने से पहले उस पर शोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज का समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का है और ऐसे में यह जरूरी है कि मनुष्य एआई को दिशा देने वाला बने, न कि एआई के प्रभाव में आने वाला।
उन्होंने आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे की पुस्तक “हिस्ट्री ऑफ हिंदू केमिस्ट्री” का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें प्राचीन भारतीय विज्ञान और रसायन शास्त्र की परंपराओं का विस्तृत वर्णन मिलता है। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में नागार्जुन की रसायन विद्या और प्रयोगशालाओं के निर्माण से जुड़ी जानकारी भी दी गई है।
उन्होंने इतिहास और शिक्षा से जुड़े कई उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय इतिहास में अनेक ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनके कार्यों और योगदान को अधिक व्यापक रूप से सामने लाने की आवश्यकता है। उन्होंने अहिल्याबाई होल्कर के शासन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय तक प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाई और समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर कार्य किया।
प्रो. रूबी मिश्रा ने कहा कि महिलाओं की भूमिका को केवल सीमित रूपों में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इतिहास और समाज में उनके नेतृत्व और योगदान को भी समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को मूल ग्रंथों और साहित्य का अध्ययन कर तथ्यों के आधार पर अपनी समझ विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों, विशेष रूप से पत्रकारिता के छात्रों से कहा कि वे विभिन्न विषयों पर शोध कर लिखें और तथ्यों के आधार पर जानकारी को सामने लाएँ। उन्होंने कहा कि शोध और अध्ययन के माध्यम से अनेक नए विषयों और अवसरों को सामने लाया जा सकता है।
उन्होंने विकसित भारत के संदर्भ में कहा कि विकास के मानदंडों को भारत की अपनी आवश्यकताओं और मूल्यों के आधार पर परिभाषित करना होगा। उन्होंने कहा कि देश का युवा वर्ग मेहनत और शोध के माध्यम से नए अवसरों को पहचान सकता है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने रॉबर्ट फ्रॉस्ट की प्रसिद्ध कविता “द रोड नॉट टेकन” का उल्लेख करते हुए युवाओं से कहा कि जीवन में अक्सर लोग वही रास्ता चुनते हैं जो आसान और पहले से तय होता है, लेकिन असली साहस उस रास्ते को चुनने में है जो कठिन और अनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि यही रास्ते व्यक्ति की क्षमता की परीक्षा लेते हैं और उसे उसके लक्ष्य के करीब ले जाते हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में वह दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध एक कॉलेज से जुड़ी हैं, जो नजफगढ़ के आगे खेरा गांव क्षेत्र में स्थित है और दिल्ली सरकार द्वारा पूर्ण रूप से वित्तपोषित है। उन्होंने कहा कि वहां की कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने और संस्थान के विकास के लिए कार्य किया जा रहा है।
इस विशेष कार्यक्रम में प्रोफेसर रूबी मिश्रा (प्राचार्य, भगिनी निवेदिता कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय), एडवोकेट डॉ. ए.पी. सिंह (वरिष्ठ अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय), डॉ. आदिश सी अग्रवाला (वरिष्ठ अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय), डॉ. खुशबू सिंह (हस्तशिल्प निर्यातक एवं निदेशक, आर्य फैशन), आनंदिता बासु (क्विज मास्टर), सुश्री रुचिका आर. शर्मा (प्रसिद्ध ज्योतिषी), डॉ. प्रो. वंदना शर्मा ‘दिया'(प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय एवं अद्वैत वेदांत दर्शन की विद्वान), प्रोफेसर सविता झा (प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय एवं सामाजिक कार्यकर्ता), ज्योतिष रत्न गुरुजी गौतम ऋषि (संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय गुरुकुल एवं गौशाला अनुसंधान संस्थान), मेजर डॉ. प्राची गर्ग (एमसी एवं कारगिल योद्धा), पुरुषोत्तम बिहारी (चिंतक व लेखक) तथा आलोक द्विवेदी (वरिष्ठ पत्रकार एवं अध्यक्ष, नोएडा मीडिया क्लब) सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान सभी वक्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्र में प्राप्त अनुभवों, संघर्षों और सफलता की प्रेरक यात्राओं को साझा किया। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षा, कानून, मीडिया, संस्कृति और अध्यात्म जैसे विभिन्न क्षेत्र किस प्रकार विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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