UPERC सार्वजनिक सुनवाई: बिजली दर बढ़ोतरी पर उद्योग जगत ने जताई कड़ी आपत्ति
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (09/03/2026): आज 09 मार्च को उत्तर प्रदेश विद्युत विनियामक आयोग (UPERC) द्वारा गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम, ग्रेटर नोएडा में एक सार्वजनिक सुनवाई (Public Hearing) आयोजित की गई, जिसमें विद्युत वितरण कंपनियों, विशेषकर पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) द्वारा वित्त वर्ष 2026–27 के लिए प्रस्तावित एग्रीगेट रेवेन्यू रिक्वायरमेंट (ARR) और विद्युत टैरिफ संशोधन पर विभिन्न हितधारकों से सुझाव और आपत्तियाँ आमंत्रित की गईं।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजीव बंसल ने सुनवाई में भाग लिया और उद्योग तथा बिजली उपभोक्ताओं की चिंताओं को रखते हुए PVVNL द्वारा प्रस्तावित बिजली दरों में वृद्धि के विरोध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
सुनवाई के दौरान उद्योग जगत के विचार प्रस्तुत करते हुए यह बताया गया कि प्रस्तावित टैरिफ वृद्धि अनुचित है और इससे उत्तर प्रदेश के MSME तथा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। माननीय आयोग के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख बिंदु रखे गए।
• टैरिफ वृद्धि का विरोध: LMV-6 और HV-2 जैसी औद्योगिक श्रेणियों में प्रस्तावित टैरिफ वृद्धि का कड़ा विरोध किया गया, क्योंकि इससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और राज्य के MSME की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कम होगी।
• अक्षमताओं का बोझ उपभोक्ताओं पर न डाला जाए: यह भी बताया गया कि DISCOM द्वारा प्रस्तुत राजस्व घाटा मुख्यतः उच्च AT&C हानि और अप्रभावी बिजली खरीद जैसी परिचालन अक्षमताओं के कारण है, जो नियंत्रित किए जा सकने वाले कारक हैं और इनका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए।
• बिजली खरीद लागत की समीक्षा आवश्यक: PVVNL द्वारा दर्शाई गई बिजली खरीद लागत अन्य DISCOM और बाज़ार मानकों की तुलना में अधिक है, इसलिए किसी भी टैरिफ वृद्धि पर विचार करने से पहले इसकी सख्त विवेकपूर्ण समीक्षा (prudence review) आवश्यक है।
• FPPAS पर सीमा निर्धारित की जाए: सुझाव दिया गया कि Fuel & Power Purchase Adjustment Surcharge (FPPAS) का बोझ अधिकतम 2.5% तक सीमित किया जाए और इसे बिजली कंपनियों के पास उपलब्ध रेगुलेटरी सरप्लस से समायोजित किया जाए।
• उद्योगों के लिए नेट मीटरिंग: नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली खरीद लागत कम करने के लिए औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए नेट मीटरिंग पुनः लागू करने का प्रस्ताव रखा गया।
• निर्बाध बिजली आपूर्ति: औद्योगिक उपभोक्ताओं को 24×7 विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा लंबे समय तक बिजली कटौती होने पर क्षतिपूर्ति (compensation) की व्यवस्था लागू की जाए।
• नवीकरणीय ऊर्जा हेतु ओपन एक्सेस: MSME इकाइयों को सौर एवं वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के लिए 50 मेगावाट तक ओपन एक्सेस की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि वे महंगी ग्रिड बिजली पर निर्भरता कम कर सकें।
यह भी जोर देकर कहा गया कि परिचालन अक्षमताओं को दूर किए बिना और बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार किए बिना किसी भी प्रकार की टैरिफ वृद्धि राज्य सरकार के तीव्र औद्योगिकीकरण और MSME क्षेत्र को मजबूत करने के लक्ष्य को कमजोर कर सकती है।
माननीय आयोग ने आश्वासन दिया कि सभी हितधारकों द्वारा दिए गए सुझावों और प्रस्तुतियों का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया जाएगा और उसके बाद ही वित्त वर्ष 2026–27 के लिए अंतिम टैरिफ निर्धारण किया जाएगा।
यह सार्वजनिक सुनवाई विभिन्न हितधारकों को अपनी बात रखने और उपभोक्ताओं के हितों को नियामक प्रक्रिया में प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई।।
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