‘दिल टूटना’ आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं: दिल्ली HC

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (25 February 2026): दिल्ली हाई कोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े एक अहम मामले में सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि आज के समय में रिश्तों का टूटना और दिल टूटना आम बात हो गई है, और केवल ब्रेकअप को भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आधार नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके दौरान यह टिप्पणी की गई।

मामला एक युवती की आत्महत्या से जुड़ा है, जिसने अपने पूर्व प्रेमी की दूसरी महिला से शादी होने के पांच दिन बाद अक्टूबर 2025 में फांसी लगाकर जान दे दी थी। युवती के पिता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उनकी बेटी को प्रेम जाल में फंसाया और शादी के लिए धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। पिता का कहना था कि इसी मानसिक दबाव के चलते उनकी बेटी ने आत्मघाती कदम उठाया। इस मामले में आरोपी को नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसावा साबित करने के लिए यह दिखाना आवश्यक है कि आरोपी के कृत्य ऐसे थे, जिनसे मृतक के पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि महज रिश्ते का टूट जाना ‘उकसावा’ की श्रेणी में नहीं आता। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यह ट्रायल के बाद ही स्पष्ट होगा कि आत्महत्या वास्तव में उकसावे का परिणाम थी या मृतका की अति-संवेदनशीलता का।

कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों के बीच फरवरी 2025 से बातचीत बंद थी, जबकि आत्महत्या अक्टूबर में हुई। इस लंबे अंतराल से उकसावे की थ्योरी कमजोर होती है। युवती की सहेलियों के बयानों में उसके मानसिक रूप से परेशान होने की बात तो सामने आई, लेकिन धर्म परिवर्तन के दबाव का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं मिला। साथ ही, आठ साल के लंबे रिश्ते के दौरान मृतका की ओर से पहले कभी कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।

इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने आरोपी को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। आरोपी की ओर से यह भी दलील दी गई कि युवती के माता-पिता अलग-अलग धर्म होने के कारण इस रिश्ते के खिलाफ थे और उन्होंने ही उस पर रिश्ता खत्म करने का दबाव बनाया था। अदालत ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की अंतिम जांच ट्रायल के दौरान होगी, लेकिन फिलहाल जमानत देने से इंकार करने का पर्याप्त आधार नहीं बनता।


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