दिल्ली NCR की सड़कें होगी धूल- मुक्त: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री की मौजूदगी में समझौता
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (24 February 2026): दिल्ली-एनसीआर में सड़कों पर धूल प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से एक अहम पहल की शुरुआत हुई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में इंदिरा पर्यावरण भवन में एनसीआर राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस कार्यक्रम में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के लोक निर्माण एवं शहरी विकास विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मंत्री ने इसे केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में सामूहिक प्रतिबद्धता बताया।
यह MoU वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा जारी शहरी सड़कों के पक्कीकरण और हरियालीकरण के मानक ढांचे तथा 7 जनवरी 2025 के दिशानिर्देशों के अनुरूप है। समझौते पर एनसीआर राज्यों के विभागों के साथ सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर ने भी हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य सड़कों के डिजाइन, रखरखाव और हरितकरण को वैज्ञानिक तरीके से लागू करना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण एक गंभीर चुनौती है और पीएम-10 स्तर में सड़क की धूल का बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया कि केवल दिल्ली में 448 कार्य बिंदुओं वाली वार्षिक कार्य योजना की समीक्षा की गई है। मंत्री ने सुझाव दिया कि धूल प्रदूषण और ट्रैफिक जाम से प्रभावित सड़कों का वैज्ञानिक मानचित्रण किया जाए और सामाजिक प्रभाव का आकलन करने के लिए विशेष कार्य बल गठित हो।

इस पहल के तहत वेब-जीआईएस आधारित रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम (आरएएमएस) विकसित किया जाएगा, जिससे सड़क रखरखाव की निवारक और पूर्वानुमानित प्रणाली लागू की जा सके। मार्गाधिकार (ROW), ज्यामितीय डिजाइन, क्रॉस-सेक्शन मानकीकरण और हरियाली उपायों को एकीकृत ढंग से लागू किया जाएगा। साथ ही, आधुनिक डेटा संग्रह तकनीकों जैसे नेटवर्क सर्वे व्हीकल, फॉलिंग वेट डिफ्लेक्टोमीटर और ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार का उपयोग किया जाएगा।
समझौता ज्ञापन के तहत एनसीआर राज्यों में चिन्हित सड़क नेटवर्क का डिजिटल मानचित्रण किया जाएगा। पेवमेंट कंडीशन इंडेक्स (PCI) जैसी अवधारणाओं के माध्यम से सड़कों की स्थिति का मूल्यांकन कर समय पर रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा। डिवाइडर, फुटपाथ, फ्लाईओवर के नीचे और ट्रैफिक हॉटस्पॉट पर देशी प्रजातियों के पौधारोपण को बढ़ावा दिया जाएगा, जिनमें कम पानी की आवश्यकता वाले पौधे शामिल होंगे।
यह एमओयू प्रारंभिक रूप से तीन वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा। प्रत्येक राज्य एक नोडल एजेंसी नियुक्त करेगा और पक्कीकरण एवं हरियाली प्रकोष्ठ स्थापित करेगा। सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए तकनीकी सलाहकार की भूमिका निभाएंगे और डिजाइन सत्यापन, डेटा विश्लेषण तथा रखरखाव रणनीति तैयार करने में सहयोग देंगे। आवश्यकता पड़ने पर अलग-अलग परियोजना समझौते भी किए जा सकेंगे।
इस पहल के अंतर्गत एनसीआर राज्यों द्वारा सूचित कुल सड़क लंबाई में दिल्ली की लगभग 10,099 किमी, हरियाणा की 10,133 किमी, उत्तर प्रदेश की 6,891 किमी और राजस्थान की 1,747 किमी सड़कें शामिल हैं। तीन वर्षों में चरणबद्ध कार्य योजना लागू कर सड़क धूल के उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे शहरी सड़क अवसंरचना मजबूत होगी और सेवा जीवन में सुधार आएगा।
गर्मी के मौसम से पहले आयोग ने दिल्ली में गहन कार्रवाई शुरू कर दी है। धूल नियंत्रण एवं प्रबंधन प्रकोष्ठों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सड़कों और खुले क्षेत्रों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित किया जा सके। सरकार का कहना है कि यह सहयोगात्मक पहल एनसीआर को स्वच्छ, हरित और धूल-मुक्त शहरी परिवहन गलियारों की दिशा में ले जाने का ठोस प्रयास है।
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