New Delhi News (18/02/2026): AI Summit 2026 में आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा (Leader Raghav Chadha) ने कहा कि वर्तमान दौर में जिस देश के पास अधिक कंप्यूट क्षमता (Compute Capacity) होगी, वही वास्तविक वैश्विक शक्ति बनेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी क्षमता रखने वाले देशों के पास बेहतर शासन दक्षता, मजबूत सैन्य शक्ति और अधिक आर्थिक समृद्धि होगी।
राघव चड्ढा ने कहा कि, कंप्यूट क्षमता को अक्सर केवल आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का मुद्दा माना जाता है, लेकिन वास्तव में यह राष्ट्रीय संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार, एआई की दुनिया में इस समय एक प्रकार का वैश्विक एकाधिकार मौजूद है।
उन्होंने बताया कि, यह एकाधिकार तीन स्तरों पर दिखाई देता है—डिजाइन, विनिर्माण और निर्यात नियंत्रण। चिप डिजाइन के क्षेत्र में कुछ सीमित कंपनियों का प्रभुत्व है, जिनके प्रोसेसर और GPU अधिकांश एआई और जनरेटिव मॉडल में उपयोग हो रहे हैं। इससे अन्य कंपनियों के लिए वैकल्पिक तकनीक विकसित करना कठिन हो जाता है।
विनिर्माण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि, दुनिया के अधिकांश उन्नत चिप्स सीमित भौगोलिक क्षेत्रों में निर्मित हो रहे हैं, जिससे वैश्विक निर्भरता बढ़ी है। वहीं तीसरा पहलू निर्यात नियंत्रण का है, जहां कुछ देशों ने उन्नत चिप्स और GPU को रणनीतिक संपत्ति मानते हुए उनके निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं। इसके कारण कई देशों के लिए इन तकनीकों तक पहुंच सीमित हो जाती है, भले ही उनके पास पर्याप्त संसाधन क्यों न हों।
राघव चड्ढा ने कहा कि, वर्तमान में भारत के पास इन तीनों क्षेत्रों में प्रमुख भूमिका नहीं है, लेकिन देश की सबसे बड़ी ताकत उसका एआई टैलेंट है। उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में भारत का एआई प्रतिभा आधार तेजी से बढ़ने की संभावना है और कौशल पैठ के मामले में भारत अग्रणी देशों में शामिल है। हालांकि उन्होंने कहा कि पर्याप्त कंप्यूट क्षमता के बिना केवल प्रतिभा से अपेक्षित परिणाम हासिल करना संभव नहीं होगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि, भारत को एआई क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए तीन प्रमुख कदम उठाने होंगे—पहला, एआई कंप्यूट संसाधनों तक विश्वसनीय पहुंच सुनिश्चित करना; दूसरा, आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाना ताकि सीमित देशों पर निर्भरता कम हो; और तीसरा, देश के भीतर डेटा सेंटर से लेकर चिप निर्माण तक का पूर्ण एआई इकोसिस्टम विकसित करना।
अपने संबोधन के अंत में राघव चड्ढा ने कहा कि, 20वीं सदी में वैश्विक शक्ति उन देशों के पास थी जिनके पास तेल, गैस और स्टील जैसे संसाधन थे, जबकि 21वीं सदी में शक्ति उन देशों के हाथ में होगी जो एआई कंप्यूट क्षमता और सेमीकंडक्टर निर्माण पर नियंत्रण रखेंगे। उन्होंने कहा कि इन क्षमताओं पर नियंत्रण ही भविष्य की वैश्विक सत्ता का निर्धारण करेगा।
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