New Delhi News (17 February 2026): राजधानी के द्वारका इलाके में सोशल मीडिया पर रील बनाने का खतरनाक शौक एक परिवार के लिए हमेशा का दुख बन गया। लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज के पास तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने बाइक सवार 23 वर्षीय साहिल धनेश्वरा को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि स्कॉर्पियो चला रहा छात्र नाबालिग था और उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था। हादसे में एक टैक्सी चालक भी गंभीर रूप से घायल हुआ है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और नाबालिगों के वाहन चलाने के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। स्थानीय लोगों में घटना को लेकर गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।
रॉन्ग साइड में स्टंट, कैमरे में कैद हुई लापरवाही
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आरोपी छात्र अपनी बहन के साथ स्कॉर्पियो में रील बनाने निकला था। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में वाहन की तेज रफ्तार साफ देखी जा सकती है। आरोप है कि स्कॉर्पियो रॉन्ग साइड में घुसाई गई और बस के सामने स्टंट करने की कोशिश की जा रही थी। इसी दौरान सामने से आ रही साहिल की बाइक उसकी चपेट में आ गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और स्कॉर्पियो आगे जाकर एक खड़ी कार और टैक्सी से टकरा गई। मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी।
मां का दर्द: ‘यह हादसा नहीं, आपराधिक कृत्य’
मृतक साहिल की मां इना माकन ने बेटे को याद करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि लापरवाही और आपराधिक मानसिकता का परिणाम है। उनका आरोप है कि आरोपी के नाम पर पहले भी ओवरस्पीडिंग के कई चालान कट चुके थे, फिर भी उसके पिता ने उसे गाड़ी चलाने से नहीं रोका। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कैसे एक नाबालिग को बिना लाइसेंस इतनी महंगी और तेज रफ्तार गाड़ी सौंपी गई। मां ने कहा कि “रील बनाने के चक्कर में मेरा बेटा हमेशा के लिए चला गया।” परिवार ने आरोपी के साथ-साथ उसके अभिभावकों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस कार्रवाई और कानूनी स्थिति
मामले में द्वारका साउथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281, 106(1) और 125(a) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने तीनों क्षतिग्रस्त वाहनों को जब्त कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। आरोपी नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया था। जानकारी के अनुसार उसे पहले ऑब्जर्वेशन होम भेजा गया, लेकिन बाद में 10वीं बोर्ड परीक्षा का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत दे दी गई। इस फैसले से पीड़ित परिवार में नाराजगी है और वे इसे न्याय में देरी मान रहे हैं।
सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल, सख्त कानून की मांग
इस हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सोशल मीडिया की सनक युवाओं को खतरनाक दिशा में धकेल रही है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि रईसजादों की लापरवाही पर सख्त अंकुश जरूरी है। पीड़ित परिवार की मांग है कि आरोपी के पिता के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई अभिभावक नाबालिग बच्चे को वाहन न सौंपे। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा नियमों के सख्त पालन और जागरूकता अभियान के बिना ऐसे हादसे नहीं रुकेंगे। साहिल की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है और लोग दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं।
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