सरकार ने मंच दिया, अब उद्योग को इतिहास रचना है: राकेश कुमार, चेयरमैन, इंडिया एक्सपो मार्ट

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (13/02/2026): दिल्ली-एनसीआर के ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित होने जा रहे 61वां आईएचजीएफ दिल्ली मेला स्प्रिंग 2026 (IHGF Delhi Fair Spring) को लेकर हस्तशिल्प उद्योग में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। इस आयोजन के पीछे केवल एक व्यापार मेला नहीं, बल्कि भारतीय हस्तनिर्मित उत्पादों के लिए अगले कई दशकों की वैश्विक रणनीति छिपी है। यही बात हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद के मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने अपने विस्तृत और दूरदर्शी संबोधन में स्पष्ट रूप से रखी।

डॉ. राकेश कुमार ने कहा, कि देश के राजनीतिक नेतृत्व की मजबूत इच्छाशक्ति ने भारतीय हस्तशिल्प उद्योग के लिए एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया है, जो आने वाले 20 वर्षों तक फल देगा। उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिका, यूरोपीय संघ, यूके सहित कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और ट्रेड रिलीफ के जरिए वैश्विक बाधाओं को पार किया है, लेकिन असली परीक्षा अब उद्योग और निर्यातकों की है।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा, सरकार ने अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी और ताकत के साथ निभा दी है। आज हमारे पास अमेरिका, यूरोप और यूके जैसे बड़े बाजारों में पहुंच के नए रास्ते खुले हैं। अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस अवसर को सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रखें। अच्छे दिन तभी सार्थक होंगे, जब हम मेहनत करके उन्हें जीएंगे। अब ट्रेड और इंडस्ट्री की पारी शुरू होती है।

डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि ईपीसीएच अब केवल ट्रेड फेयर आयोजित करने वाली संस्था नहीं रह गई है, बल्कि वह एक पूर्ण ग्लोबल सप्लाई-चेन पार्टनर के रूप में विकसित हो रही है। उन्होंने कहा कि पहले भारतीय निर्यातक विदेशी मेलों में केवल छोटे-छोटे स्टॉल लगाकर लौट आते थे, जहां न तो मार्केटिंग सपोर्ट था और न ही डिजाइन, ट्रेंड फोरकास्ट या वैल्यू एन्हांसमेंट पर कोई काम होता था। अब इस सोच को पूरी तरह बदल दिया गया है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई उत्पाद पहले 10 डॉलर में बिक रहा था, तो लक्ष्य केवल कीमत बढ़ाने का नहीं होना चाहिए, बल्कि सप्लाई चेन को मजबूत कर बीच के अनावश्यक दलालों को हटाते हुए सीधे सही खरीदार तक पहुंचना होना चाहिए। इसी रणनीति के तहत यूरोप में नीदरलैंड्स, बेल्जियम और जर्मनी में वेयरहाउस और बी2बी शोरूम स्थापित किए गए हैं, ताकि भारतीय हस्तशिल्प सीधे वैश्विक खुदरा और बुटीक बाजारों तक पहुंचे।

डॉ. राकेश कुमार ने अमेरिका को लेकर भी स्पष्ट रणनीति साझा की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी बाजार दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है और वहां केवल टैरिफ रिलीफ के भरोसे नहीं रहा जा सकता। इसी कारण अमेरिका में भी सप्लाई-चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया जा रहा है। चार्ल्सटन में वेयरहाउस शुरू हो चुका है, भारतीय उत्पाद बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और रिटेल स्टोर्स के जरिए बिकने लगे हैं और हाई प्वाइंट जैसे अंतरराष्ट्रीय फर्नीचर मार्केट में इंडिया पवेलियन के जरिए सामूहिक उपस्थिति दर्ज कराई जाएगी।

उन्होंने कहा, हम एसएमई और कारीगर आधारित सेक्टर से जुड़े हैं। 10–20 करोड़ के निर्यातक अपने दम पर विदेश में वेयरहाउस नहीं बना सकते। ईपीसीएच ने यह जिम्मेदारी ली है और हम इसे जमीन पर उतार भी चुके हैं। यही वह बदलाव है, जो भारतीय हस्तशिल्प को लंबे समय तक टिकाऊ बनाएगा।

डॉ. राकेश कुमार ने जोर देकर कहा कि यह पूरा मॉडल केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लाभ पहले ही मिलना शुरू हो गया है। उन्होंने इसे ‘पहला मूवर एडवांटेज’ बताते हुए कहा कि ऐसा इकोसिस्टम भारतीय हस्तशिल्प उद्योग को अन्य वैश्विक प्रतिस्पर्धियों से कहीं आगे ले जाएगा। उनके अनुसार, आईएचजीएफ दिल्ली मेला स्प्रिंग 2026 केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि उस नए युग की शुरुआत है, जहां भारत का हस्तनिर्मित उत्पाद मूल्य, पहचान और आत्मसम्मान—तीनों के साथ वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाएगा।


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