12 फरवरी हड़ताल को लेकर गौतमबुद्ध नगर में ट्रेड यूनियनों का तेज प्रचार अभियान

टेन न्यूज नेटवर्क

Gautam Buddha NagarNews (11/02/2026): गौतमबुद्ध नगर में 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के उद्देश्य से सीटू सहित विभिन्न ट्रेड यूनियनों का जनसंपर्क और प्रचार अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों, रिहायशी इलाकों और बाजारों में माइक प्रचार, नुक्कड़ सभाएं और पर्चा वितरण के जरिए मजदूरों से हड़ताल में शामिल होने की अपील की जा रही है।

सीटू जिला अध्यक्ष मुकेश कुमार राघव के नेतृत्व में ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में टेंपो के माध्यम से माइक प्रचार किया गया। वहीं नोएडा फेस-3 क्षेत्र में ई-रिक्शा से प्रचार अभियान जनवादी महिला समिति की नेता रेखा चौहान, गुड़िया देवी और माकपा नेता हरकिशन सिंह के नेतृत्व में चलाया गया। इसी क्रम में नोएडा फेस-2 में सीटू जिला महासचिव रामस्वारथ, दादरी क्षेत्र में सीटू सह सचिव पारस रजक और नोएडा फेस-1 में सीटू नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा, रामसागर सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने व्यापक जनसंपर्क किया। अन्य ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने भी अलग-अलग इलाकों में नुक्कड़ बैठकों और पर्चा वितरण के जरिए हड़ताल के समर्थन में माहौल बनाया।

नुक्कड़ सभाओं को संबोधित करते हुए मजदूर और कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियां लगातार मेहनतकश वर्ग के अधिकारों पर चोट कर रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में श्रम कानूनों को कमजोर कर बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाया गया है, जबकि मजदूरों को असुरक्षा और शोषण की ओर धकेला जा रहा है।

सीटू नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा ने लेबर कोड्स को मजदूरों को “गुलाम और असुरक्षित बनाने का हथकंडा” बताते हुए कहा कि नवंबर में पारित चारों लेबर कोड्स को तत्काल रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये लागू करने, स्थायी रोजगार की गारंटी और निर्माण मजदूरों के पंजीकरण को फिर से बहाल करने की मांग दोहराई। इन मांगों को लेकर 12 फरवरी को बड़े स्तर पर चक्का जाम की घोषणा की गई है।

मजदूर नेताओं ने मनरेगा की मौजूदा स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि ‘विकसित भारत’ के नाम पर मनरेगा की मूल भावना को कमजोर किया जा रहा है। काम मांगने के 15 दिन के भीतर रोजगार देने और बेरोजगारी भत्ते जैसे कानूनी अधिकारों को खत्म कर दिया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा मिल रहा है।

वक्ताओं ने बिजली बिल-2025 की नीतियों और लोकतांत्रिक आंदोलनों को दबाने के लिए लाए जा रहे ‘शांति बिल’ जैसे कानूनों को जनविरोधी करार दिया। मजदूर और किसान संगठनों ने मांग की कि सभी काले कानूनों को तुरंत वापस लिया जाए। ट्रेड यूनियन नेताओं ने आह्वान किया कि 12 फरवरी को मजदूर, किसान और छोटे व्यापारी बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर सरकार को अपनी एकजुट ताकत का एहसास कराएं। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाने वाला मजदूर वर्ग अब शोषण, असमानता और अपमान को और अधिक सहन नहीं करेगा।


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