‘सच्ची बात; प्रोफेसर विवेक कुमार के साथ’ कार्यक्रम में “प्राचीन भारतीय गौरव और वर्तमान चुनौतियां” पर व्यापक चर्चा
टेन न्यूज नेटवर्क
ग्रेटर नोएडा (19 जनवरी 2025): GNIOT के सभागार में आज ‘सच्ची बात: प्रोफेसर विवेक कुमार के साथ’ कार्यक्रम के 97वाँ एपिसोड में “प्राचीन भारतीय गौरव और वर्तमान चुनौतियाँ” विषय पर व्यापक चर्चा आयोजित की गई। इस अवसर पर भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और समकालीन सामाजिक समस्याओं पर गहन चर्चा की गई। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रोफेसर बलवंत सिंह राजपूत ने की, जिन्होंने काशी और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की भारतीय ज्ञान परंपरा में महत्ता पर प्रकाश डाला।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता महिम तिवारी, संस्थापक सनातन शिक्षालय, ने अपने ओजस्वी संबोधन में भारतीय समाज की वर्तमान चुनौतियों और उनके समाधान पर विचार रखे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती और मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि से हुआ। विषय परिचय करवाते हुए एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा के प्रोफेसर विवेक कुमार ने भारत के प्राचीन ऋषि-मुनियों के नवाचारों की चर्चा की और सत्र का सफल संचालन किया।
महिम तिवारी ने वेदों का उद्धरण देते हुए समाज में शिक्षा में राष्ट्र प्रेम की कमी, नशावृत्ति, नारीशक्ति के प्रति अनादर, और पारिवारिक विघटन जैसी समस्याओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान सनातन शिक्षा पद्धति और ग्रंथों के विवेकपूर्ण अध्ययन में निहित है। उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया की अश्लीलता और नग्नता से बचने की सलाह दी और ज्ञान के साथ विज्ञान को सम्मान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने भारतीय विज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरुत्वाकर्षण बल के गणितीय सूत्र भी भारत से ही सामने आ सकते थे, यदि हमने अपने ज्ञान परंपरा को संरक्षित रखा होता। गीता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जाति व्यवस्था का वर्णन गीता में कहीं नहीं है, और यह केवल गुण और कर्म के आधार पर विभाजित थी। उन्होंने सही गुरु के मार्गदर्शन को शिक्षा के लिए अनिवार्य बताया और शास्त्रों की गलत व्याख्या से बचने की आवश्यकता पर जोर दिया।
गोष्ठी में पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण की आलोचना की गई और कहा गया कि मानसिक गुलामी शारीरिक गुलामी से अधिक संकटपूर्ण है। भारतीय विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा और गौरवशाली परंपरा का सम्मान करना चाहिए। वक्ताओं ने गीता, योग और मनोविज्ञान पर भारतीय योगदान की भी चर्चा की।
कार्यक्रम के अंत में नरेश गुप्ता ने सभी उपस्थित लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर विंग कमांडर आर.एन. शुक्ला, प्रो. राजेंद्र पुरवार, कवयित्री अंजलि सिसोदिया, कैप्टन शशि भूषण त्यागी सहित कई विद्वान और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।।
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