EPCH ने भारत–अमेरिका व्यापार समझौता फ्रेमवर्क का स्वागत किया
नई दिल्ली/एनसीआर – 07 फरवरी 2026: हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी भारत–संयुक्त राज्य अमेरिका जॉइंट स्टेटमेंट का स्वागत किया । संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, भारत और अमेरिका ने परस्पर एवं पारस्परिक लाभकारी व्यापार हेतु एक अंतरिम समझौते के फ्रेमवर्क पर सहमति बनाई है, जिससे 13 फरवरी 2025 को प्रारंभ हुई व्यापक भारत–अमेरिका बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट (बीटीए) वार्ताओं के प्रति प्रतिबद्धता भी पुनः पुष्ट होती है । माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तय यह फ्रेमवर्क, भारत और अमेरिका के बीच संतुलित बाजार पहुँच बढ़ाने, सप्लाई चेन रेजिलिएंस मजबूत करने तथा आर्थिक सुरक्षा सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है ।
इस कदम का स्वागत करते हुए ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा, “अंतरिम समझौते का यह फ्रेमवर्क दोनों देशों के बीच अधिक संरचित और पूर्वानुमेय व्यापार सहभागिता की दिशा में एक ऐतिहासिक विकास है । हमारे हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए, विशेष रूप से फ्रेमवर्क में उल्लिखित ‘होम डेकोर’ और ‘आर्टिसनल प्रोडक्ट्स’, यह टैरिफ, नॉन-टैरिफ बैरियर्स के समाधान और स्टैंडर्ड्स-सम्बंधित फैसिलिटेशन पर अधिक स्पष्टता प्रदान करेगा, जिससे निर्यातक बेहतर योजना बना सकेंगे, खरीदारों को तेज़ी से प्रतिक्रिया दे सकेंगे और दीर्घकालिक साझेदारियाँ विकसित कर सकेंगे ।”
डॉ. खन्ना ने आगे कहा, “अमेरिका पारंपरिक रूप से हमारा सबसे बड़ा बाजार रहा है, जो कुल हस्तशिल्प निर्यात में लगभग 40% का योगदान देता है । ऐसे समय में जब टैरिफ से जुड़ी चिंताओं ने 50% तक के स्तर पर अनिश्चितता उत्पन्न कर दी थी, संयुक्त वक्तव्य अब संकेत देता है कि अमेरिका अपने ‘रिसिप्रोकल टैरिफ फ्रेमवर्क’ के अंतर्गत भारत के मूल उत्पादों पर 18% की पारस्परिक टैरिफ दर लागू करेगा । आगे बढ़ते हुए, हम अपने सदस्यों के साथ मिलकर उत्पाद पोजिशनिंग को और मजबूत करेंगे, कम्प्लायंस तत्परता बढ़ाएंगे तथा बाजार आउटरीच का विस्तार करेंगे, ताकि ‘इंडिया हैंडमेड’ अमेरिका जैसे उच्च-मूल्य एवं गुणवत्ता-सचेत बाजार में निरंतर वृद्धि करता रहे ।”
इसी भावना को दोहराते हुए ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने कहा, “यह फ्रेमवर्क इस बात को स्वीकार करता है कि प्रतिस्पर्धात्मकता केवल टैरिफ से नहीं, बल्कि नॉन-टैरिफ बैरियर्स, टेस्टिंग आवश्यकताओं, दस्तावेज़ीकरण और प्रक्रियागत पूर्वानुमेयता से भी तय होती है । यही वे क्षेत्र हैं जो अक्सर एमएसएमई के लिए वास्तविक लागत और जटिलता बढ़ाते हैं । संयुक्त वक्तव्य में नॉन-टैरिफ बैरियर्स, स्टैंडर्ड्स/कनफॉर्मिटी असेसमेंट और रूल्स ऑफ ओरिजिन पर चर्चा एवं समाधान की प्रतिबद्धता से दिशा स्पष्ट रूप से कम घर्षण और अधिक मजबूत सप्लाई-चेन इंटीग्रेशन की ओर है । काउंसिल अब अंतरिम समझौते के अंतिम रूप लेने के दौरान उत्पाद-विशिष्ट प्रभावों को समझने हेतु हितधारकों के साथ निकटता से संवाद करेगी और मिलकर यह सुनिश्चित करेगी कि हस्तशिल्प क्षेत्र इस नए फ्रेमवर्क एवं आगामी (बीटीए) परिणामों का प्रभावी लाभ उठा सके ।”
ईपीसीएच के उपाध्यक्ष, सागर मेहता ने कहा, “अमेरिकी बाजार गुणवत्ता में निरंतरता, समय पर डिलीवरी और विश्वसनीयता की मांग करता है । अंतरिम समझौते का पारस्परिक और संतुलित स्वरूप भारत और अमेरिका के बीच आपसी विश्वास तथा साझा आर्थिक प्राथमिकताओं का एक सशक्त संकेत है । जैसे-जैसे व्यापार सहभागिता गहराएगी, निर्यातकों को वैल्यू चेन के स्तर पर पैकेजिंग एवं लेबलिंग अनुशासन, तेज़ प्रतिक्रिया चक्र, उत्पादन योजना तथा फुलफिलमेंट की तैयारी और मजबूत करनी होगी । बदलती खरीदार अपेक्षाओं के अनुरूप कलेक्शंस को संरेखित करते हुए और व्यवसाय प्रक्रियाओं को उन्नत करके, ‘इंडिया हैंडमेड’ अमेरिका के बाजार में जिम्मेदारी के साथ स्केल कर सकेगा और उभरते अवसरों का लाभ उठा सकेगा ।”
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने कहा, “हम अंतरिम समझौता फ्रेमवर्क को आगे बढ़ाने तथा व्यापक बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट (बीटीए) रोडमैप के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराने हेतु भारत सरकार के सतत प्रयासों की सराहना करते हैं । जारी संयुक्त वक्तव्य नॉन-टैरिफ बैरियर्स के समाधान, स्टैंडर्ड्स फैसिलिटेशन और स्पष्ट रूल्स ऑफ ओरिजिन के माध्यम से व्यापार घर्षण कम करने पर केंद्रित है, जो विशेष रूप से हस्तशिल्प एमएसएमई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है । ईपीसीएच अब बाजार इंटेलिजेंस, बायर मोबिलाइजेशन, कम्प्लायंस सपोर्ट और क्षमता-वृद्धि पहलों के माध्यम से निर्यातक सक्षमकरण को तेज़ करेगा, ताकि यह फ्रेमवर्क अमेरिका के बाजार में वास्तविक परिणाम पूछताछ, रिपीट ऑर्डर्स और दीर्घकालिक साझेदारियों में परिवर्तित हो सके।”
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