India-US Trade Deal: एक क्लिक में समझिए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के सभी अहम प्वाइंट्स

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (04 फरवरी 2026): भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाई देने वाले एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता बीते वर्षों से चले आ रहे शुल्क-आधारित तनाव को कम करने, व्यापार बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

समझौते के तहत अमेरिका ने “मेक इन इंडिया” उत्पादों पर लगाए गए पारस्परिक शुल्क (Reciprocal Tariffs) को चरणबद्ध रूप से कम करने पर सहमति जताई है। अब तक 25 प्रतिशत तक लगाए जा रहे शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि पहले अमेरिकी बाजार में कुछ भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क भी लागू थे। गौरतलब है कि अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया था, जिसमें 25 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क और 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क शामिल था।

आयात-निर्यात में बढ़ोतरी पर सहमति

रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते के तहत भारत अमेरिका से वस्तुओं के आयात को बढ़ाने पर सहमत हुआ है। इसमें ऊर्जा, प्रौद्योगिकी उत्पाद और परमाणु उपकरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें 500 बिलियन डॉलर से अधिक के आयात की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही भारत ने अमेरिका के खिलाफ अपने कुछ शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को धीरे-धीरे कम करने का भी संकेत दिया है।

आर्थिक और तकनीकी लाभ

इस व्यापार समझौते का सीधा लाभ किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और कुशल श्रमिकों को मिलेगा। इससे भारत में वैश्विक मूल्य शृंखला (Global Value Chain) में भागीदारी बढ़ेगी और देश को आधुनिक अमेरिकी तकनीक तक बेहतर पहुंच मिलेगी। “डिज़ाइन इन इंडिया” और “इननोवेट इन इंडिया” जैसे अभियानों को भी इससे बल मिलने की उम्मीद है।

राजनीतिक और भू-रणनीतिक असर

विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक और भू-रणनीतिक दृष्टि से भी अहम है। इससे भारत-अमेरिका संबंधों में विश्वास बढ़ेगा और वैश्विक व्यापार तथा विनिर्माण शृंखला में चीन के प्रभाव को संतुलित करने में मदद मिलेगी।

वैश्विक अनिश्चितता में स्थिरता

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच यह समझौता पूंजी प्रवाह को स्थिर करने, रुपये को मजबूती देने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

भारत-अमेरिका व्यापार की वर्तमान स्थिति

* अमेरिका, भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में से एक है।

* भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष है, जो मुख्यतः सेवाओं और उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्यात से आता है।

* एफडीआई निवेश: अमेरिका भारत में निवेश का सबसे बड़ा स्रोत है। वर्ष 2000 से 2025 के बीच अमेरिका ने भारत में लगभग 70.65 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किया।

* व्यापार मात्रा: वित्त वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 132.2 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो 2024 में 119.71 बिलियन डॉलर था।

प्रमुख निर्यात और आयात

* भारत से निर्यात: फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न और आभूषण।

* अमेरिका से आयात: कच्चा तेल, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG), विमान, रक्षा उपकरण और पुर्जे।

कुल मिलाकर, यह व्यापार समझौता भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने वाला कदम है, जो आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करेगा।।


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