केंद्रीय बजट 2026-27 में हस्तशिल्प क्षेत्र को बढ़ावा देने का EPCH ने किया स्वागत

नई दिल्ली – 01 फरवरी, 2026: हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) ने माननीय केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 का स्वागत किया है । बजट में हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल सहित कई अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएँ की गई हैं, जिनका दायरा निर्माण, निर्यात, कौशल विकास, डिजिटल अवसंरचना एवं ग्रामीण सशक्तिकरण विस्तृत है ।

बजट घोषणाओं का स्वागत करते हुए ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026 में निर्यात वृद्धि के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा प्रस्तुत की गई है, जिसमें एमएसएमई, अवसंरचना, डिजिटल ट्रेड फैसिलिटेशन और क्षेत्र-विशिष्ट प्रोत्साहनों पर विशेष ध्यान दिया गया है । बजट 2026 में हस्तशिल्प क्षेत्र हेतु कुछ प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

•⁠ ⁠महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल: खादी, हथकरघा एवं हस्तशिल्प को प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन, गुणवत्ता सुधार, ब्रांडिंग और वैश्विक बाजार से जोड़ने हेतु एक पहल; जिससे बुनकरों, ग्रामोद्योग, ओडीओपी उत्पादों और ग्रामीण युवाओं को लाभ होगा।

•⁠ ⁠कपड़ा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम: एक इंटीग्रेटेड प्रोग्राम जिसमें मशीनरी के लिए कैपिटल सपोर्ट, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और कॉमन टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन सेंटर के ज़रिए पारंपरिक क्लस्टर का मॉडर्नाइज़ेशन शामिल है; मौजूदा स्कीम को मज़बूत करने के लिए एक नेशनल हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम; टेक्स-इको के तहत सस्टेनेबल प्रोडक्शन को बढ़ावा देना; और समर्थ 2.0 के ज़रिए स्किल अपग्रेडेशन।

•⁠ ⁠“चैंपियन एमएसएमई” का निर्माण एवं सूक्ष्म उद्यमों को समर्थन: तरलता सहायता के तहत (टीआरईडीएस (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग हेतु सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (सीजीटीएमएसई) और एमएसएमई के लिए वित्त तक तेज और सस्ती पहुंच को सक्षम करने के लिए टीआरईडीएस के साथ सरकारी ई मार्केटप्लेस (जीईएम) को जोड़ा गया है ।

•⁠ ⁠पुराने औद्योगिक क्लस्टरों का कायाकल्प: 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टरों को पुनर्जीवित करने के लिए एक योजना शुरू की गई है ताकि बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी उन्नयन के माध्यम से उनकी लागत प्रतिस्पर्धात्मकता और दक्षता में सुधार किया जा सके ।

•⁠ ⁠डिज़ाइन एजुकेशन और इनोवेशन: डिज़ाइन एजुकेशन को बढ़ावा देने और भारतीय डिज़ाइनरों की कमी को दूर करने के लिए पूर्वी इलाके में एक नया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन बनाया जाएगा, जिससे हस्तशिल्प और क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़ के लिए टैलेंट इकोसिस्टम बनेगी।

•⁠ ⁠कैपिटल गुड्स कैपेबिलिटी: सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज़ द्वारा दो जगहों पर हाई-टेक टूल रूम बनाए जाएंगे, जो हाई-प्रिसिजन कंपोनेंट्स के डिज़ाइन, टेस्टिंग और मैन्युफैक्चर के लिए डिजिटली इनेबल्ड ऑटोमेटेड सर्विस ब्यूरो होंगे ।

•⁠ ⁠ओवरसीज टूर प्रोग्राम पैकेज पर टीसीएस को रैशनलाइज़: विदेश यात्रा पैकेजों पर टीसीएस बिना किसी थ्रेशहोल्ड सीमा के घटाकर 2% किया गया ।

•⁠ ⁠कस्टम्स प्रक्रिया – ट्रस्ट-बेस्ड सिस्टम्स: टियर-II और टियर-III ऑथराइज़्ड इकोनॉमिक ऑपरेटर्स के लिए ड्यूटी डेफरल पीरियड 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन कर दिया गया ।

•⁠ ⁠ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस: कई सरकारी एजेंसियों से कार्गो क्लीयरेंस अप्रूवल एक सिंगल, इंटीग्रेटेड डिजिटल विंडो के ज़रिए प्रोसेस किए जाएँगे ।

•⁠ ⁠स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन फ्लेक्सिबिलिटी: एक विशेष “वन-टाइम” उपाय के तहत, वैश्विक व्यापार व्यवधानों के कारण क्षमता उपयोग की चुनौतियों को देखते हुए, एसईजेड की पात्र विनिर्माण इकाइयों को कन्सेशनल ड्यूटी रेट्स पर डोमेस्टिक टैरिफ एरिया में बिक्री की अनुमति दी जाएगी ।

•⁠ ⁠ई-कॉमर्स के माध्यम से नए निर्यात अवसर: कूरियर निर्यात में प्रति कंसाइनमेंट ₹10 लाख की वैल्यू कैप हटाना तथा रिटर्न/रिजेक्टेड कंसाइनमेंट्स की प्रक्रियाओं का सरलीकरण ।

ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने आगे कहा, “केंद्रीय बजट 2026-27 भारत के हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण है । महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल की शुरुआत खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार से जोड़ने, ब्रांडिंग और कौशल विकास के माध्यम से मजबूत करने का एक एकीकृत दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है । माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट जैसी व्यवस्थाएँ तथा उद्यमों की रेजिलिएंस और स्केल बढ़ाने वाली पहलें हस्तशिल्प क्षेत्र की दीर्घकालिक वृद्धि में योगदान देंगी और माननीय प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के विजन के अनुरूप समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास के व्यापक लक्ष्य को समर्थन देंगी ।”

ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने कहा, “केंद्रीय बजट 2026-27 ने ग्लोबल ट्रेड में रुकावटों के दौर में एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करने के लिए एक प्रैक्टिकल और समय पर कदम उठाया है । स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (एसईजेड) में एलिजिबल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को कन्सेशनल ड्यूटी रेट्स पर डोमेस्टिक टैरिफ एरिया में बिक्री की एक-बारगी विशेष अनुमति, क्षमता उपयोग की चुनौतियों को दूर करने में मदद करेगी और उत्पादन निरंतरता तथा रोजगार बनाए रखने में सहायक होगी।”

डॉ. कुमार ने आगे कहा, “सरकार की ट्रस्ट-बेस्ड कस्टम्स व्यवस्थाएँ और कार्गो क्लियरेंस के लिए सिंगल इंटीग्रेटेड डिजिटल विंडो की दिशा में कदम, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को मजबूत करते हैं और सप्लाई चेन में रुकावटें घटाते हैं । हस्तशिल्प जैसे निर्यात-लिंक्ड क्षेत्रों के लिए ये उपाय ऑपरेशनल रेजिलिएंस बढ़ाते हैं, तेज़ ऑर्डर फुलफिलमेंट में सहायता करते हैं तथा घरेलू और वैश्विक बाजारों में स्थायी प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए मजबूत आधार तैयार करते हैं।”

ईपीसीएच के उपाध्यक्ष सागर मेहता ने कहा, “एसएमई ग्रोथ फंड के माध्यम से ‘चैंपियन एमएसएमई’ बनाने तथा ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम के जरिए तरलता समर्थन बढ़ाने पर बजट का फोकस हमारे हस्तशिल्प उद्यमों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा । 200 लिगेसी औद्योगिक क्लस्टरों के रिवाइवल से पारंपरिक हस्तशिल्प हब्स का आधुनिकीकरण होगा और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।”

ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने कहा, “इस बजट में घोषित डिजिटल इंटीग्रेशन पहलें और ट्रस्ट-बेस्ड कस्टम्स सिस्टम हमारे निर्यातकों के लिए लेन-देन की लागत और समय को काफी कम कर देंगे । क्लियरेंस के लिए सिंगल डिजिटल विंडो सरकार की ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है । पूर्वी क्षेत्र में राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान की स्थापना से एक ऐसा कुशल कार्यबल तैयार होगा, जो पारंपरिक कारीगरी को समकालीन डिज़ाइन संवेदनाओं से जोड़ सकेगा । महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के कौशल विकास और गुणवत्ता सुधार पर केंद्रित प्रावधानों के साथ मिलकर ये उपाय भारतीय हस्तशिल्प की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएँगे तथा देशभर के लाखों कारीगरों

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