Greater Noida News (01/02/2026): केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 से देश के एमएसएमई सेक्टर को बड़ी राहत की उम्मीद थी, लेकिन बजट में किए गए प्रावधान उद्योग की जमीनी जरूरतों को पूरा करने में नाकाफी साबित हुए हैं। यह कहना है इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA), गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष अमित उपाध्याय का।
इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA), गौतमबुद्ध नगर के अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। देशभर में 7.5 करोड़ से अधिक इकाइयों के माध्यम से यह क्षेत्र न केवल बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराता है, बल्कि सकल घरेलू उत्पाद और निर्यात में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है। इसके बावजूद बजट में इस सेक्टर को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल सकी।
अमित उपाध्याय के अनुसार वर्तमान समय में एमएसएमई उद्योग महंगे ऋण, बढ़ती उत्पादन लागत, जटिल अनुपालन प्रक्रियाओं, वर्किंग कैपिटल की कमी और कुशल मानव संसाधन के अभाव जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। बजट से उम्मीद थी कि इन समस्याओं के समाधान के लिए कोई व्यापक और ठोस राहत पैकेज पेश किया जाएगा, लेकिन ऐसी कोई प्रभावी घोषणा सामने नहीं आई।
उन्होंने कहा कि एमएसएमई उद्यमियों की लंबे समय से मांग रही है कि किराये पर संचालित उद्योगों के लिए औद्योगिक लैंड बैंक की स्थापना की जाए, एमएसएमई पार्क और क्लस्टर विकसित किए जाएं तथा बार-बार होने वाले निरीक्षणों और जटिल अनुपालन प्रक्रियाओं से राहत दी जाए। इसके साथ ही नई मशीनरी, ऑटोमेशन और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन के लिए विशेष सब्सिडी, छोटे उद्योगों के लिए बिजली दरों में रियायत और जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया को सरल व त्वरित बनाने जैसे कदम अपेक्षित थे, ताकि उद्योगों की वर्किंग कैपिटल और कैश फ्लो से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकें।
IBA अध्यक्ष ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर की सबसे बड़ी आवश्यकता सस्ते और बिना गारंटी के ऋण की है। बजट में मशीनरी खरीद और कार्यशील पूंजी के लिए कम ब्याज दर पर, आसान प्रक्रिया से बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने की कोई प्रभावी योजना सामने नहीं आई, जिससे उद्योगों को वास्तविक राहत मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर एमएसएमई उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकता है। इसके लिए डिजिटल स्किल-बिल्डिंग, एआई आधारित समाधान और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन पर केंद्रित एक विशेष पैकेज की आवश्यकता थी। साथ ही बढ़ती स्किल्ड मैनपावर की कमी को देखते हुए अधिक संख्या में कौशल विकास केंद्र स्थापित करने के लिए ठोस प्रावधान अपेक्षित थे।
अमित उपाध्याय ने माना कि बजट में सेमीकंडक्टर 2.0, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना को बढ़ावा देने, 200 नए औद्योगिक क्लस्टर स्थापित करने, चैंपियन एमएसएमई योजना के तहत 10,000 करोड़ रुपये के प्रावधान और लेन-देन के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म की घोषणा जैसे कुछ सकारात्मक कदम जरूर उठाए गए हैं। हालांकि, उनके अनुसार ये घोषणाएं एमएसएमई सेक्टर की रोजमर्रा की जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार देने वाला और देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाला एमएसएमई सेक्टर इस बजट में एक बार फिर अपेक्षाकृत उपेक्षित नजर आया है, जबकि इस सेक्टर को बजट से कहीं अधिक उम्मीदें थीं। अंत में उन्होंने कहा कि एमएसएमई उद्योगों के लिए एक समग्र और विशेष राहत पैकेज समय की आवश्यकता है, जिससे नवाचार को प्रोत्साहन मिले, निवेश और उत्पादन बढ़े तथा देश में रोजगार सृजन के नए अवसर पैदा हो सकें।
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