New Delhi News (31 January 2026): दिल्ली में हुए धमाकों की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को अहम सुराग मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि आतंकी मॉड्यूल इजराइल–गाजा विवाद के बहाने एक वैचारिक संदेश देना चाहता था। जांच के अनुसार, इस मॉड्यूल की योजना देश के बड़े ईटिंग जॉइंट्स और लोकप्रिय रेस्तरां को निशाना बनाने की थी। एजेंसियों का मानना है कि भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों को चुनकर यह गुट वैश्विक स्तर पर ध्यान खींचना चाहता था। धमाकों के पीछे का मकसद सिर्फ नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि कट्टर विचारधारा का प्रचार करना भी बताया जा रहा है। इस साजिश ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच अभी जारी है और कई कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों मुज़म्मिल आदिल और शाहीन के मृत आत्मघाती हमलावर उमर के साथ गहरे वैचारिक मतभेद थे। इन मतभेदों के चलते यह गुट अलग राह अपनाकर बड़ा संदेश देना चाहता था। पूछताछ में सामने आया है कि हमलों की योजना बनाते समय प्रतीकात्मक और हाई-प्रोफाइल ठिकानों को प्राथमिकता दी गई। एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि अलग-अलग स्तर पर टास्क बांटे गए थे। इस मॉड्यूल का उद्देश्य भय फैलाने के साथ-साथ अपने विचारों को प्रचारित करना था। आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि यह तीन लोगों का मॉड्यूल प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवा-तुल-हिंद को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहा था। यह संगठन अल-कायदा की विचारधारा से प्रेरित रहा है और इसके शीर्ष कमांडर ज़ाकिर मूसा की 2019 में मौत हो चुकी है। 2021 में एक अन्य कमांडर के मारे जाने के बाद संगठन कमजोर पड़ गया था। बावजूद इसके, बचे हुए समर्थक नेटवर्क को फिर से खड़ा करने की कोशिश में जुटे थे। एजेंसियों के अनुसार, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर मोड़ने की रणनीति भी इसी योजना का हिस्सा थी। इस एंगल से जांच को और तेज किया गया है।
बड़े ईटिंग आउटलेट्स को निशाना बनाकर यह गुट यह दिखाना चाहता था कि उनकी विचारधारा कितनी कठोर और आक्रामक है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि किन-किन संस्थानों को संभावित लक्ष्य के रूप में चुना गया था। सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल ट्रेल और संपर्क सूत्रों की गहन पड़ताल की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने कई शहरों में अलर्ट भी जारी किया है। इस साजिश का उद्देश्य देश के भीतर अस्थिरता पैदा करना बताया जा रहा है। मामले में आगे और गिरफ्तारियों से इनकार नहीं किया गया है।
इस बीच, जम्मू-कश्मीर पुलिस की 20 दिन चली जांच का भी जिक्र सामने आया है, जो लाल किले में कार धमाके से पहले शुरू हुई थी। 19 अक्टूबर 2025 को श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक पैम्फलेट की बरामदगी के बाद जांच तेज हुई थी। इस पोस्टर में स्थानीय लोगों से पुलिस के साथ सहयोग न करने की अपील की गई थी। जांच के दौरान शोपियां में एक मौलवी तक पहुंच बनाई गई और 9 व 10 नवंबर 2025 को फरीदाबाद में छापों के दौरान कथित साजिश का खुलासा हुआ। इन छापों में भारी मात्रा में विस्फोटक और आधुनिक हथियार बरामद होने की बात सामने आई। एजेंसियां अब इन सभी कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं।।
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