New Delhi News (25 January 2026): राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चल रहे दिल्ली मेट्रो के विभिन्न निर्माण कार्यों के दौरान आम जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी कड़ी में मेट्रो निर्माण स्थलों के आसपास लगभग 20 किलोमीटर लंबी बैरिकेडिंग की गई है। इन बैरिकेड्स का उद्देश्य सड़क पर चलने वाले वाहनों और पैदल यात्रियों को निर्माण क्षेत्र से सुरक्षित दूरी पर रखना है। घनी आबादी और भारी ट्रैफिक वाले इलाकों में मेट्रो का निर्माण एक बड़ी चुनौती होता है। ऐसे में यह बैरिकेडिंग दुर्घटनाओं को रोकने में अहम भूमिका निभा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इन उपायों से अब तक ट्रैफिक और पैदल आवाजाही काफी हद तक सुरक्षित रही है।
सर्दियों के मौसम में कोहरे और कम दृश्यता को ध्यान में रखते हुए बैरिकेड्स को और अधिक सुरक्षित बनाया गया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने लगभग 17 किलोमीटर लंबी LED रोप लाइट्स और ब्लिंकर बैरिकेड्स पर लगाए हैं। रात के समय और धुंध में ये लाइट्स निर्माण स्थलों को दूर से ही स्पष्ट रूप से दिखाई देने योग्य बनाती हैं। इससे वाहन चालकों को पहले से सतर्क रहने में मदद मिलती है। खासकर व्यस्त सड़कों पर यह व्यवस्था बेहद प्रभावी साबित हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि इससे रात के समय होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आई है।
निर्माण स्थलों के आसपास ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए 270 से अधिक प्रशिक्षित ट्रैफिक मार्शल तैनात किए गए हैं। ये मार्शल चौबीसों घंटे ड्यूटी पर रहते हैं और वाहन चालकों को सही दिशा में मार्गदर्शन देते हैं। इन्हें ट्रैफिक विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। भारी मशीनरी और क्रेनों की आवाजाही के दौरान इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। खासतौर पर रात के समय जब मशीनों को साइट पर लाया या ले जाया जाता है, तब ये मार्शल सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। इससे आम लोगों और कामगारों दोनों की सुरक्षा बनी रहती है।
सड़क सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए निर्माण स्थलों के पास रोड स्टड्स लगाए गए हैं। ये स्टड्स वाहन चालकों को संकेत देते हैं कि आगे संवेदनशील क्षेत्र है और गति कम करनी चाहिए। इसके साथ ही ‘कार्य प्रगति पर है’ और ‘डायवर्जन आगे है’ जैसे चेतावनी बोर्ड पर्याप्त दूरी पर लगाए गए हैं। इन संकेतों का उद्देश्य वाहन चालकों को समय रहते सतर्क करना है। इससे अचानक ब्रेक लगाने या दिशा बदलने की स्थिति से बचा जा सकता है। DMRC का मानना है कि सही सूचना दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
दिल्ली मेट्रो फेज-4 के तहत विशेष इम्पैक्ट प्रोटेक्शन व्हीकल्स को भी शामिल किया गया है। ये वाहन उस समय तैनात किए जाते हैं जब सड़क पर भारी मशीनरी या क्रेन की स्थापना की जाती है। इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि तेज रफ्तार वाहनों की टक्कर का प्रभाव सह सकें। इससे निर्माण श्रमिकों और अन्य वाहनों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। यह व्यवस्था खास तौर पर व्यस्त सड़कों पर बेहद जरूरी मानी जाती है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम सड़क सुरक्षा के लिहाज से मील का पत्थर है।

कोहरे के मौसम में दृश्यता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त उपाय भी किए गए हैं। बैरिकेड्स के ऊपर फॉग लाइट्स लगाई गई हैं, ताकि धुंध में भी रास्ता साफ दिखाई दे। इसके अलावा, निर्माण स्थल पर काम कर रहे श्रमिकों के हेलमेट पर रिफ्लेक्टिव टेप लगाए गए हैं। सभी कामगारों को हाई-विजिबिलिटी जैकेट पहनना अनिवार्य किया गया है। इससे वे दिन और रात दोनों समय आसानी से दिखाई देते हैं। इन उपायों से श्रमिकों की सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
जहां-जहां सड़क डायवर्जन की आवश्यकता होती है, वहां पहले से विस्तृत योजना तैयार की जाती है। यह योजना दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ समन्वय कर लागू की जाती है। डायवर्जन स्थलों पर तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था अपनाई गई है। इसमें प्लास्टिक बैरियर, रेत या पानी से भरे ड्रम और कंक्रीट क्रैश बैरियर शामिल होते हैं। इन परतों का उद्देश्य वाहनों को अचानक निर्माण क्षेत्र में घुसने से रोकना है। इससे दुर्घटना की स्थिति में भी नुकसान को न्यूनतम रखा जा सकता है।
DMRC ने बैरिकेड्स की मजबूती पर भी विशेष ध्यान दिया है। इन्हें नीचे से भारी बनाया गया है और जमीन में मजबूती से जड़ा जाता है, ताकि तेज हवा या बारिश में भी ये अपनी जगह से न हिलें। सभी बैरिकेड्स को नट-बोल्ट से आपस में जोड़ा जाता है, जिससे उनकी स्थिरता बनी रहती है। इसके अलावा, कंक्रीट क्रैश बैरियर निर्माण कचरे के पुनर्चक्रण से तैयार किए गए हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल हैं। इन व्यापक सुरक्षा उपायों के कारण भीड़भाड़ वाले इलाकों में मेट्रो निर्माण के बावजूद अब तक वाहन और पैदल यात्रियों की आवाजाही सुरक्षित बनी हुई है।।
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