DMRC भूमि आवंटन विवाद: एक ओर बिना टेंडर के आरोप, दूसरी ओर नियमों के तहत निर्णय का दावा
टेन न्यूज नेटवर्क
Delhi News (22 जनवरी, 2026): दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) में वसंत विहार मेट्रो स्टेशन की व्यावसायिक भूमि के आवंटन को लेकर उठा विवाद अब दो स्पष्ट पक्षों में बंटता नजर आ रहा है। जहां एक ओर सोशल मीडिया पर सामने आई जांच रिपोर्ट में बिना टेंडर (Tender) और पारदर्शिता के जमीन निजी कंपनियों को दिए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर DMRC ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह नियमों और नीति के अनुरूप बताया है।
आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि DMRC जैसी सार्वजनिक संस्था द्वारा करोड़ों की सार्वजनिक जमीन को नॉमिनेशन (Nomination) के आधार पर निजी कंपनियों को देना न केवल वित्तीय नुकसान का संकेत है, बल्कि यह समान अवसर और पारदर्शिता के सिद्धांतों पर भी सवाल खड़े करता है। आरोप है कि ऐसी प्रक्रिया से अन्य इच्छुक कंपनियों को प्रतिस्पर्धा का मौका नहीं मिला, जिससे संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार (Right to Equality) का उल्लंघन होता है। इसी कड़ी में दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री द्वारा वसंत विहार स्टेशन पर लगभग 5650 वर्गफुट क्षेत्र के आवंटन पर आपत्ति जताते हुए उसे फिलहाल स्थगित (Suspend) किया गया है और पूरे मामले की समीक्षा की मांग की गई है।
वहीं DMRC ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि संस्था में कोई भी फैसला किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं लिया जाता, बल्कि अधिकृत समितियों (Authorized Committees) की सिफारिशों और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से सामूहिक रूप से निर्णय होता है। DMRC का कहना है कि मेट्रो स्टेशनों पर प्रॉपर्टी बिजनेस (Property Business) का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को सुविधाएं उपलब्ध कराना और गैर-किराया राजस्व (Non-Fare Box Revenue – NFBR) अर्जित करना है, ताकि किराया बढ़ाने की जरूरत न पड़े। DMRC के अनुसार, उसकी कुल आय का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा NFBR से आता है और इसी मॉडल के कारण वह परिचालन लाभ में चल रही है।
DMRC ने यह भी बताया कि मेट्रो रेलवे (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) एक्ट, 2002 की धारा 6(2) के तहत उसे व्यावसायिक उपयोग के लिए भूमि विकसित करने और लीज या लाइसेंस देने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है। साथ ही, वर्ष 1998 के बोर्ड रेजोल्यूशन के तहत प्रबंध निदेशक को इस संबंध में बोर्ड के सभी अधिकार सौंपे गए हैं। संस्था का दावा है कि ओपन टेंडर, नीलामी (Auction), बातचीत और सार्वजनिक उपक्रमों के मामलों में नॉमिनेशन जैसे विभिन्न तरीकों से पहले भी आवंटन किए जाते रहे हैं।
वसंत विहार मेट्रो स्टेशन के मामले में DMRC ने कहा कि स्टेशन के शुरू होने के बाद से वहां कोई सार्वजनिक उपयोगिता कियोस्क या दुकान नहीं थी। प्रस्तावित आवंटन से यात्रियों को भोजन और अन्य सुविधाएं मिलेंगी और यह DMRC के लिए अतिरिक्त राजस्व का साधन बनेगा। DMRC के मुताबिक, यह भूमि पहले खाली पड़ी थी और कूड़ा डंपिंग व अतिक्रमण की आशंका से घिरी हुई थी।
इस पूरे विवाद के बीच अब एक ओर जहां पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग तेज हो रही है, वहीं दूसरी ओर DMRC अपने फैसलों को नीतिगत, कानूनी और जनहित में बताया रहा है। आने वाले दिनों में गठित समीक्षा समिति और सरकारी हस्तक्षेप के बाद यह साफ हो सकेगा कि नियमों की व्याख्या सही थी या सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में चूक हुई।
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