Greater Noida में इंजीनियर की मौत का जिम्मेदार कौन?, टेन न्यूज नेटवर्क के 5 सवाल
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (20/01/2026): ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में 17 जनवरी की रात हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान ले ली और स्मार्ट सिटी के दावों के बीच आपातकालीन व्यवस्था की हकीकत को सामने ला दिया। हादसे के बाद पुलिस, फायर ब्रिगेड, SDRF और NDRF ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, लेकिन समय, समन्वय और संसाधनों की कमी ने इस पूरे अभियान पर सवालिया निशान लगा दिए हैंl
घटना 17 जनवरी की रात करीब 12:04 बजे की है, जब युवराज मेहता ने अपने पिता राजकुमार मेहता को फोन कर हादसे की जानकारी दी। इसके तुरंत बाद 12:06 बजे आपातकालीन हेल्पलाइन 112 पर कॉल की गई। सूचना मिलने के महज 9 मिनट बाद, रात 12:15 बजे पुलिस की रिस्पॉन्स गाड़ी सेक्टर-150 घटनास्थल पर पहुंच गई। इसके बाद 12:30 बजे नॉलेज पार्क थाना पुलिस और 12:50 बजे फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची।
पुलिस और फायर विभाग ने क्रेन, सीढ़ियों, सर्चलाइट्स और अस्थायी नावों की मदद से रेस्क्यू शुरू किया, लेकिन घना कोहरा, लगभग शून्य दृश्यता और पानी तक सीधी पहुंच न होने के कारण बचाव कार्य बेहद कठिन साबित हुआ। बताया गया कि सिविल पुलिस को तैराकी का प्रशिक्षण न होने से भी शुरुआती रेस्क्यू सीमित रहा और कीमती समय निकलता चला गया।
हादसे की गंभीरता के बावजूद विशेष आपदा बलों को मौके पर पहुंचने में लंबा समय लगा। SDRF की टीम रात 1:15 बजे और NDRF की टीम 1:55 बजे घटनास्थल पर पहुंची, यानी सूचना मिलने के करीब दो घंटे बाद। इस दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी भी समय पर नहीं हो सकी, जिससे मौके पर त्वरित निर्णय और बेहतर समन्वय की कमी साफ नजर आई।
SDRF और NDRF की टीमों ने विपरीत किनारे से कीचड़ हटाकर पानी में उतरने का रास्ता बनाया और नाव के जरिए तलाशी अभियान शुरू किया। यह सर्च ऑपरेशन पूरी रात चला और सुबह करीब 4:30 बजे तक जारी रहा। लंबी मशक्कत के बाद एक शव बरामद किया गया, हालांकि दुर्घटनाग्रस्त कार को अब तक पानी से बाहर नहीं निकाला जा सका है।
इस घटना ने प्रशासन और सिस्टम के सामने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं –
1. जब घटना की सूचना तुरंत मिल गई थी, तो NDRF को दो घंटे बाद क्यों बुलाया गया?
2. इतने गंभीर हादसे के बावजूद वरिष्ठ अधिकारी मौके पर समय से क्यों नहीं पहुंचे?
3. भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कोई ठोस और प्रभावी तैयारी की जा रही है?
4. रेस्क्यू में हुई देरी और लापरवाही के लिए पीड़ित परिवार को न्याय और जवाबदेही कब मिलेगी?
5. अगर स्मार्ट सिटी में ही सिस्टम इस तरह फेल हो जाए, तो आम नागरिक आखिर किस पर भरोसा करे?
सेक्टर-150 की यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों, प्रशिक्षण और समन्वय की गंभीर खामियों को उजागर करती है। पुलिस की त्वरित मौजूदगी के बावजूद विशेष बलों के देर से पहुंचने और संसाधनों की कमी ने पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन को प्रभावित किया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस हादसे से सबक लेकर सिस्टम को मजबूत किया जाएगा या फिर ये सवाल भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएंगे।।
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