फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों की वीरता ने कैसे बचाया श्रीनगर एयरबेस

टेन न्यूज़ नेटवर्क

National News (20/01/2026): फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों की कहानी भारतीय सेना के इतिहास की सबसे बहादुर कहानियों में से एक है। 14 दिसंबर 1971 के युद्ध के दौरान जब पाकिस्तान ने श्रीनगर के हवाई अड्डे पर अचानक हमला किया, तो हालात बहुत खराब थे और उड़ान भरना लगभग नामुमकिन था। इसके बावजूद, सेखों अकेले ही अपने विमान के साथ दुश्मनों का सामना करने आसमान में पहुंच गए। उनकी इसी महान बहादुरी के लिए उन्हें परमवीर चक्र दिया गया। वे भारतीय वायु सेना के पहले और अब तक के इकलौते सैनिक हैं जिन्हें यह सबसे बड़ा सम्मान मिला है।

निर्मलजीत सिंह सेखों का जन्म 17 जुलाई 1943 को पंजाब के लुधियाना में हुआ था। उनके पिता भी वायु सेना में थे, इसलिए उन्हें बचपन से ही आसमान में उड़ने का शौक था। युद्ध शुरू होने से कुछ ही महीने पहले उनकी शादी मंजीत कौर से हुई थी। जब देश को उनकी जरूरत पड़ी, तो उन्होंने अपने परिवार और नई शादी की खुशियों से ऊपर अपने फर्ज को चुना और मोर्चे पर तैनात हो गए।

दिसंबर 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान का मुख्य लक्ष्य श्रीनगर हवाई अड्डे को तबाह करना था, ताकि कश्मीर का संपर्क भारत से कट जाए। 14 दिसंबर की सुबह करीब 8 बजे, पाकिस्तान के 6 ताकतवर ‘सेबर’ जेट विमानों ने श्रीनगर बेस पर बमबारी शुरू कर दी। उस वक्त कोहरा बहुत घना था और रनवे पर बम गिर रहे थे, जिससे वहां से उड़ान भरना मौत को गले लगाने जैसा था।

ऐसी खतरनाक स्थिति में भी सेखों पीछे नहीं हटे। उन्होंने हिम्मत दिखाई और बमों के धमाकों के बीच अपने छोटे से ‘नेट’ विमान को लेकर आसमान में उड़ गए। बादलों और धुएं की वजह से वे अपने साथी पायलट से अलग हो गए और आसमान में अकेले रह गए। अब मुकाबला बराबरी का नहीं था; एक तरफ पाकिस्तान के 6 आधुनिक विमान थे और दूसरी तरफ अकेले निर्मलजीत सिंह सेखों।

सेखों ने हार मानने के बजाय उन छह विमानों को उलझा लिया और वीरता से लड़ते हुए दो दुश्मन विमानों को मार गिराया। उनकी इस बहादुरी की वजह से दुश्मन अपना मिशन पूरा नहीं कर पाए और रनवे सुरक्षित बच गया। अंत में, चारों तरफ से घिर जाने के कारण उनके विमान पर गोलियां लगीं। बहुत कम ऊंचाई पर होने के कारण वे विमान से बाहर नहीं निकल पाए और शहीद हो गए। उनकी इस कुर्बानी के लिए उन्हें देश का सबसे बड़ा सैन्य सम्मान ‘परमवीर चक्र’ दिया गया।

निर्मलजीत सिंह सेखों का बलिदान देश के लिए बहुत बड़ा साबित हुआ। उनकी बहादुरी की वजह से ही दुश्मन श्रीनगर के रनवे को नुकसान नहीं पहुँचा पाए और उन्हें अपना मिशन बीच में छोड़कर भागना पड़ा। अगर वे उस दिन अकेले उन छह विमानों का सामना न करते, तो कश्मीर का संपर्क पूरे देश से टूट सकता था। उनकी इस हिम्मत ने न केवल हवाई अड्डे को बचाया, बल्कि युद्ध की दिशा भी बदल दी।

उनकी वीरता का सम्मान केवल भारत में ही नहीं, बल्कि सरहद पार पाकिस्तान में भी किया जाता है। उन्हें मारने वाले पाकिस्तानी पायलट सलीम बेग मिर्ज़ा ने खुद उनकी काबिलियत की तारीफ करते हुए उन्हें एक महान योद्धा बताया। आज भी वे भारतीय वायु सेना के एकमात्र परमवीर चक्र विजेता हैं। जल्द ही उनकी इस गौरवशाली गाथा को ‘बॉर्डर 2’ फिल्म में दिलजीत दोसांझ के जरिए पूरी दुनिया देखेगी।

डिस्क्लेमर: यह लेख / न्यूज आर्टिकल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और प्रतिष्ठित / विश्वस्त मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। पाठक कृपया स्वयं इस की जांच कर सूचनाओं का उपयोग करे ॥


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