दागदार सेब से अरबों की उड़ान: कैसे एक साधारण आइडिया ने फूड वेस्ट को बनाया 8000 करोड़ का बिजनेस
टेन न्यूज नेटवर्क
National News (20/01/2026): साल 2018 की बात है, जब रमेश पेंसिलवेनिया एक सेब के बाग में पहुंचे। बाग में पेड़ों पर लगे सेब बिल्कुल साफ और चमकदार थे, लेकिन जमीन पर बड़ी मात्रा में ऐसे सेब पड़े थे, जो देखने में सड़े हुए लग रहे थे। पहली नजर में यह सामान्य नुकसान जैसा लगा, लेकिन जब उन्होंने इस बारे में किसानों से बात की, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई।
ये सेब सड़े हुए नहीं थे, बल्कि पूरी तरह ताजे और सेहतमंद थे। सिर्फ उनकी बाहरी बनावट में दाग-धब्बे थे, जिस वजह से बाजार में ग्राहक इन्हें खरीदने से मना कर देते थे। सुंदरता के मानकों पर खरे न उतरने के कारण हर साल बड़ी मात्रा में ऐसे फल फेंक दिए जाते थे, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता था।
यहीं से रमेश के दिमाग में एक अलग सोच ने जन्म लिया। उन्होंने महसूस किया कि समस्या फलों की गुणवत्ता में नहीं, बल्कि लोगों की सोच में है। उन्होंने इन ‘बदसूरत’ दिखने वाले लेकिन पोषक फलों को किसानों से सस्ते दामों पर खरीदना शुरू किया, ताकि किसानों को भी नुकसान न हो और फल बर्बाद होने से बच सकें।
इसके बाद सबसे बड़ी चुनौती थी ग्राहकों का नजरिया बदलना। अभी ने इसे केवल फल बेचने का कारोबार नहीं बनाया, बल्कि इसे एक मुहिम के तौर पर पेश किया। उन्होंने लोगों को समझाया कि वे ऐसे फलों को “रेस्क्यू” कर रहे हैं, जो सिर्फ दिखावट की वजह से कचरे में चले जाते थे, जबकि खाने में पूरी तरह सुरक्षित और पौष्टिक होते हैं।
इन फलों की, कीमत सामान्य फलों की तुलना में करीब 40 प्रतिशत कम रखी गई। सस्ती कीमत और सामाजिक संदेश के मेल ने लोगों का ध्यान खींचा। धीरे-धीरे ग्राहकों ने समझना शुरू किया कि स्वाद और पोषण का दाग-धब्बों से कोई लेना-देना नहीं है।
इस पहल का असर सिर्फ ग्राहकों तक सीमित नहीं रहा। इससे किसानों को नई बाजार पहुंच मिली और खाने की बर्बादी में भी बड़ी कमी आई। जो फल पहले खेतों में सड़ने के लिए छोड़ दिए जाते थे, वे अब लोगों की थाली तक पहुंचने लगे।
आज यही सोच एक विशाल बिजनेस मॉडल में बदल चुकी है। फूड वेस्ट के खिलाफ शुरू हुई यह पहल अब लगभग 8000 करोड़ रुपये की कंपनी का रूप ले चुकी है। यह कहानी बताती है कि सही नजरिया, सामाजिक सोच और साधारण समस्या का अनोखा समाधान मिल जाए, तो न सिर्फ मुनाफा कमाया जा सकता है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव भी लाया जा सकता है।
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