National News (18/01/2026): पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के सबसे बड़े स्पोर्ट्स ब्रांड में से एक Nike ऐसी मुश्किलों से गुजर रहा है, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक किसी ने नहीं की थी। वर्ष 2021 में जहाँ कंपनी की नेटवर्थ 260 बिलियन डॉलर थी, वहीं अब यह घटकर केवल 98 बिलियन डॉलर पर आ गई है। यानी पाँच सालों में करीब 160 बिलियन डॉलर की भारी गिरावट, जो किसी भी ग्लोबल ब्रांड के लिए चिंता का बड़ा विषय है।
Nike की गिरावट का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है—ब्रांड की पहचान खोना। जहाँ कंपनी पहले रनिंग, फुटबॉल, ट्रेनिंग, बास्केटबॉल जैसे स्पोर्ट्स शूज कैटेगरी के लिए दुनिया भर में मशहूर थी, वहीं अब उसने इन स्पेशलाइज्ड श्रेणियों को कम करके सिर्फ ‘पुरुष, महिला और बच्चे’ जैसे सामान्य से सेगमेंट पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। इससे ब्रांड की यूनिकनेस और विशेषज्ञता कमजोर होती दिखी।
कंपनी के भीतर नवाचार की कमी भी एक महत्वपूर्ण वजह है। लंबे समय से Nike अपने पुराने हिट प्रोडक्ट्स और लाइन्स जैसे Air Jordan की विरासत पर ही टिका हुआ है। नई तकनीक, नए डिज़ाइन और ताज़ा इनोवेशन की कमी के कारण युवा उपभोक्ता अब अन्य ब्रांड्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
इसके साथ ही, Nike ने हाल ही में अपना बिज़नेस मॉडल बदलते हुए Direct-to-Consumer (D2C) तरीका अपनाया, जिसमें कंपनी अपने प्रोडक्ट्स सीधे अपनी वेबसाइट या ऐप के ज़रिए बेचने लगी। इससे उनके पारंपरिक होलसेल और रिटेल पार्टनर्स नाराज़ हो गए और संबंध कमजोर पड़ गए। मार्केट में उनकी वितरण प्रणाली (distribution network) पहले जितनी मजबूत नहीं रही।
एक और बड़ा झटका चीन के बाज़ार से लगा है। एक समय था जब Nike को चीन से बेहद भारी मुनाफा मिलता था, लेकिन अब स्थानीय चीनी ब्रांड्स जैसे Li-Ning और Anta ने मार्केट में मजबूत पकड़ बना ली है। इन ब्रांड्स ने बेहतर कीमत और स्थानीय उपभोक्ताओं के हिसाब से प्रोडक्ट्स दिए, जिससे Nike की बिक्री पर असर पड़ा।
Nike ने टीवी विज्ञापन, आउटडोर कैंपेन और बड़े स्पोर्ट्स स्टार्स के साथ हाई-इम्पैक्ट एंडोर्समेंट की जगह अपना ज्यादा पैसा Facebook और Google जैसे डिजिटल विज्ञापनों पर खर्च करना शुरू कर दिया है। इससे ब्रांड की वह आइकॉनिक इमेज और भावनात्मक कनेक्शन कमजोर होता गया, जो Nike की पहचान हुआ करती थी।
Nike की ग्रोथ को धीमा कर दिया है और ब्रांड की वैल्यू में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज हुई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Nike ने अपनी पुरानी ताकत—स्पोर्ट्स इनोवेशन, मजबूत कैटेगरीज और भावनात्मक मार्केटिंग—की ओर वापस ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले वर्षों में कंपनी को और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
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