हिंदू मान्यताओं में समय का चक्र: सतयुग से कलयुग तक कैसे घूमता है युगों का पहिया

टेन न्यूज़ नेटवर्क

National News (18/01/2026): हिंदू मान्यताओं के अनुसार, समय एक पहिए की तरह गोल घूमता है जिसमें चार युग होते हैं: सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग। अभी कलयुग चल रहा है। कहा जाता है कि जब कलयुग में बुराई बहुत बढ़ जाएगी, तब भगवान विष्णु अपना आखिरी और दसवां रूप लेकर आएंगे, जिन्हें ‘कल्कि अवतार’ कहा जाएगा। उनका काम ‘कली’ नाम के राक्षस जो बुराई और गंदगी का रूप है, उसको खत्म करना होगा। उनके आने के बाद यह दुनिया फिर से सुधर जाएगी और दोबारा से सतयुग शुरू होगा, जहाँ चारों तरफ सिर्फ सच्चाई और अच्छाई होगी।

सबसे पहले आता है सतयुग, जिसमें भगवान ने 4 रूप लिए। सबसे पहले वे ‘मत्स्य’ (मछली) बनकर आए क्योंकि जीवन पानी से शुरू हुआ था। फिर वे ‘कूर्म’ (कछुआ) बने ताकि समुद्र मंथन में पहाड़ को सहारा दे सकें। इसके बाद ‘वराह’ (सूअर) बनकर उन्होंने धरती को पानी से बाहर निकाला और अंत में ‘नरसिंह’ आधा शेर, आधा इंसान बनकर राक्षस हिरण्यकश्यप को खत्म किया।

इसके बाद आया त्रेता युग, जिसमें भगवान के 3 अवतार हुए। पहले वे ‘वामन’ बनकर आए, जो एक छोटे कद के ब्राह्मण थे और उन्होंने घमंडी राजा बलि से तीन कदम में सारा ब्रह्मांड नाप लिया। फिर वे ‘परशुराम’ बनकर आए, जो एक महान योद्धा थे और अन्याय करने वाले राजाओं को सजा देते थे। अंत में ‘श्री राम’ आए, जिन्हें हम उनकी सच्चाई और रावण को हराने के लिए जानते हैं। तीसरा युग था द्वापर युग, जिसमें भगवान ने 2 मुख्य रूप लिए। पहले ‘श्री कृष्ण’ आए, जिन्होंने महाभारत के युद्ध में अपनी बुद्धि और लीलाओं से धर्म की रक्षा की। इसी सिलसिले में ‘गौतम बुद्ध’ का भी जिक्र आता है, जिन्होंने दुनिया को शांति, सच्चाई और मन की शांति का रास्ता दिखाया।

अब चल रहा है कलयुग, जिसमें भगवान का आखिरी यानी 10वां अवतार होना बाकी है। भविष्यवाणी है कि भगवान ‘कल्कि’ के रूप में जन्म लेंगे। उनके माता-पिता का नाम सुमति और विष्णु व्यास होगा। वे ‘देवदत्त’ नाम के सफेद घोड़े पर सवार होकर आएंगे और तलवार से दुनिया की सारी बुराई को साफ कर देंगे।

हिंदू धर्म में सात चिरंजीवियों का जिक्र है, जिनमें हनुमान जी, परशुराम, अश्वत्थामा और राजा बलि जैसे नाम शामिल हैं। माना जाता है कि ये हजारों सालों से इसलिए जीवित हैं क्योंकि इनका एक बड़ा मकसद है भगवान कल्कि की मदद करना। जब कलयुग के अंत में भगवान कल्कि बुराई से लड़ने आएंगे, तब ये सातों अमर पुरुष उनके साथ मिलकर युद्ध करेंगे।

इनमें भगवान परशुराम का रोल बहुत खास होगा। वे कल्कि के ‘गुरु’ बनेंगे और उन्हें दिव्य अस्त्र-शस्त्र चलाना सिखाएंगे। जब यह युद्ध खत्म होगा और ‘कली’ नाम का राक्षस हार जाएगा, तब दुनिया से सारी बुराई मिट जाएगी। इसके साथ ही समय का चक्र फिर से घूम जाएगा और दोबारा सतयुग की शुरुआत होगी, जहाँ सब कुछ फिर से अच्छा और सच्चा हो जाएगा।

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