सुप्रीम कोर्ट–एनजीटी के आदेशों का असर: 4 साल में दिल्ली से बाहर गए 8 लाख से ज्यादा पुराने वाहन

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (18 जनवरी 2026): दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त आदेशों का बड़ा असर देखने को मिल रहा है। इन आदेशों के चलते पिछले चार वर्षों में 8 लाख से अधिक पुराने वाहनों को दिल्ली से बाहर ले जाने के लिए एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) जारी की गई है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या उन वाहनों की है, जो तय आयु सीमा पूरी कर चुके थे।

दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार सालों में कुल 8,30,086 वाहनों को एनओसी दी गई। वर्ष 2021-22 में केवल 82,340 वाहनों को ही एनओसी मिली थी, लेकिन इसके बाद संख्या में तेज बढ़ोतरी हुई। 2022-23 में यह आंकड़ा करीब 6.2 लाख तक पहुंच गया, जबकि 2023-24 में 7.3 लाख वाहनों को एनओसी जारी की गई। 2025-26 के अंतिम आंकड़े अभी जारी होने बाकी हैं।

एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से पुराने डीजल वाहन और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों के चलने पर पूरी तरह रोक है। इन नियमों का उल्लंघन करने पर चार पहिया वाहन पर 10,000 रुपये और दो पहिया वाहन पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है। इसके अलावा वाहन को टो करने और पार्किंग का शुल्क भी देना पड़ता है, चाहे वाहन सार्वजनिक स्थान पर ही क्यों न खड़ा हो।

परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, एनओसी की मांग में बढ़ोतरी की मुख्य वजह इन्हीं आदेशों का सख्त अनुपालन है। भारी जुर्माने और जब्ती के डर से वाहन मालिक अपने पुराने वाहन दिल्ली से बाहर भेजने को मजबूर हो रहे हैं। इनमें सिर्फ कबाड़ घोषित वाहन ही नहीं, बल्कि BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल जैसे पुराने उत्सर्जन मानक वाले वाहन भी शामिल हैं, जिन्हें अभी ‘एंड ऑफ लाइफ व्हीकल’ (ELV) का टैग नहीं मिला है।

वायु प्रदूषण बढ़ने पर लागू होने वाले ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के कारण भी पुराने वाहनों पर पाबंदियां और कड़ी हो जाती हैं। GRAP स्टेज-3 में BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल चार पहिया वाहनों पर रोक लगती है, जबकि स्टेज-4 में आवश्यक सेवाओं को छोड़कर लगभग सभी डीजल और BS-4 पेट्रोल चार पहिया वाहन प्रतिबंधित हो जाते हैं।

पुराने वाहनों के दोबारा पंजीकरण को लेकर भी नियम तय हैं। फिलहाल BS-4 और उससे पुराने वाहनों का पुनः पंजीकरण राजस्थान के सभी जिलों, बिहार के 18 जिलों, महाराष्ट्र के 26 जिलों, उत्तर प्रदेश के 33 जिलों और पश्चिम बंगाल के सभी जिलों में संभव है।

इसके साथ ही पुराने वाहनों के रजिस्ट्रेशन रद्द करने के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, 2022-23 में करीब 6.1 लाख वाहनों का पंजीकरण रद्द किया गया। इसके बाद अगले दो वर्षों में क्रमशः 3.5 लाख और 3.7 लाख वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द हुआ। हालांकि शुरुआती दौर के बाद संख्या कुछ कम हुई है, लेकिन यह अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया मुख्य रूप से प्रशासनिक है। पर्यावरण को वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि इन पुराने वाहनों को स्थायी रूप से कबाड़ में बदला गया है या फिर उन्हें दूसरे राज्यों में दोबारा पंजीकृत कर सड़कों पर उतार दिया गया है।।


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