कपिल मिश्रा वीडियो मामला: जालंधर कोर्ट ने वीडियो को बताया ‘डॉक्टर्ड’, दे दिया बड़ा आदेश

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (15 January 2026): जालंधर की एक अदालत ने आतिशी मार्लेना के द्वारा दिल्ली विधानसभा में दिए बयान को लेकर तथा दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा प्रसारित वीडियो मामले में बड़ा आदेश जारी करते हुए कहा है कि फॉरेंसिक जांच में वीडियो को डॉक्टर्ड और डिजिटल रूप से बदला हुआ पाया गया है। कोर्ट ने इस वीडियो को सोशल मीडिया से तत्काल हटाने का निर्देश देते हुए मेटा (Meta Inc.) और एक्स कॉर्पोरेशन (X, पूर्व में ट्विटर) समेत सभी प्लेटफॉर्म्स को आदेश दिया है कि वीडियो से जुड़े सभी लिंक और जिन अकाउंट्स से यह पोस्ट किया गया है, उन्हें भी टेकडाउन किया जाए।

यह मामला जालंधर साइबर क्राइम थाने में दर्ज एफआईआर नंबर 02 (दिनांक 7 जनवरी 2026) से जुड़ा है। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1), 353(1)(b), 353(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-C के तहत दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता इकबाल सिंह उर्फ एल.एस. बग्गा ने आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो आपत्तिजनक और दुर्भावनापूर्ण कैप्शन के साथ प्रसारित किया जा रहा है, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंच सकता है।

कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया वीडियो और उसके सबटाइटल्स में छेड़छाड़ की गई है। अदालत ने माना कि वीडियो की भाषा, लहजा और प्रस्तुति धार्मिक आधार पर वैमनस्य फैलाने, धार्मिक भावनाएं भड़काने और पंजाब जैसे संवेदनशील सीमा राज्य में कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। कोर्ट ने इसे सार्वजनिक शांति और राज्य की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।

तकनीकी जांच में सामने आया कि वीडियो का विश्लेषण जालंधर पुलिस के टेक्निकल सेल में तैनात सोशल मीडिया विशेषज्ञ द्वारा AI टूल “Gemini.ai” की मदद से किया गया, जिसमें वीडियो को फर्जी और डिजिटल रूप से बदला हुआ पाया गया। इसके अलावा, जालंधर पुलिस आयुक्त द्वारा राज्य फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी, मोहाली को भेजे गए ऑडियो की जांच रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकला कि वीडियो में इस्तेमाल किया गया एक संवेदनशील शब्द वक्ता द्वारा बोला ही नहीं गया था।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस मामले में जांच अभी जारी है और वीडियो के पीछे मौजूद वास्तविक दोषियों की पहचान की जा रही है। कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे न केवल वीडियो हटाएं, बल्कि उससे जुड़े सभी यूआरएल और अकाउंट्स को भी निष्क्रिय करें। अदालत ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग को रोकना और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।।


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