राइडर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता: ‘10 मिनट डिलीवरी’ मॉडल पर श्रम मंत्रालय की रोक
टेन न्यूज नेटवर्क
National News (14/01/2026): क्विक कॉमर्स कंपनियों में 10 मिनट में डिलीवरी का दबाव खत्म होने वाला है। श्रम मंत्रालय ने ब्लिंकिट, स्विगी, जोमैटो और जेप्टो जैसी कंपनियों को आदेश दिया है कि वे ’10 मिनट डिलीवरी’ का वादा बंद करें। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि डिलीवरी करने वाले लड़कों यानी राइडर्स की जान जोखिम में न पड़े। अक्सर 10 मिनट के चक्कर में उन्हें बहुत तेज और खतरनाक तरीके से गाड़ी चलानी पड़ती थी, जिससे सड़क हादसे होने का डर रहता था। यह फैसला बताता है कि अब सरकार के लिए ग्राहकों की जल्दबाजी से ज्यादा उन वर्कर्स की सुरक्षा और मानसिक शांति जरूरी है जो दिन-रात हमारे लिए काम करते हैं।”
सरकार का यह फैसला डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों (गिग वर्कर्स) की यूनियनों द्वारा की गई लंबी मांग के बाद आया है। ’10 मिनट डिलीवरी’ के मॉडल ने राइडर्स पर बहुत ज़्यादा दिमागी दबाव बना दिया था। उन्हें अपनी ऐप और बैग पर चलते हुए टाइमर को देखकर डर लगता था, जिसकी वजह से वे सड़क पर अपनी जान जोखिम में डालकर बहुत तेज़ी से गाड़ी चलाते थे। बारिश या भारी ट्रैफिक जैसी स्थिति में भी उन्हें समय पर पहुँचने का दबाव झेलना पड़ता था, जो लगभग नामुमकिन और खतरनाक था।
यह कदम भारत के नए ‘लेबर कोड’ (Code on Social Security 2020) के हिसाब से भी सही है, जो इन वर्कर्स को सुरक्षा देने की बात करता है। 25 दिसंबर को हुई हड़ताल में राइडर्स ने मांग की थी कि समय की ये पाबंदी हटाई जाए और उन्हें सामाजिक सुरक्षा मिले। अब समय की पाबंदी हटाकर सरकार ने उनकी एक बड़ी मांग पूरी कर दी है, जिससे उन्हें सुरक्षित माहौल में काम करने का मौका मिलेगा।
‘गिग वर्कर्स’ वे लोग होते हैं जो किसी कंपनी के परमानेंट कर्मचारी नहीं होते, बल्कि हर ऑर्डर या काम के हिसाब से पैसे कमाते हैं। आज ये लोग भारतीय अर्थव्यवस्था की एक बहुत मज़बूत कड़ी बन गए हैं। एक औसत गिग वर्कर की उम्र महज़ 27 साल है। खास बात यह है कि इनमें से 71% लोग अपने घर में अकेले कमाने वाले हैं और औसतन एक राइडर पर 4 से 5 लोग आर्थिक रूप से निर्भर होते हैं।
आर्थिक नज़रिए से देखें तो रोज़गार के कुल नए मौकों में से 56% हिस्सा इसी सेक्टर से आ रहा है। नीति आयोग का अनुमान है कि साल 2030 तक भारत में करीब 2.35 करोड़ गिग वर्कर्स होंगे और भारत की कुल जीडीपी (GDP) में इनका योगदान 1.25% तक पहुँच जाएगा। इसलिए, इन लोगों की सुरक्षा का ख्याल रखना सिर्फ मानवता ही नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बहुत ज़रूरी है।
10 मिनट में डिलीवरी की शर्त को हटाना एक बहुत अच्छी शुरुआत है। यह उन लाखों लोगों की सुरक्षा के लिए पहला बड़ा कदम है जो ऑनलाइन ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए काम करते हैं। भले ही अब ग्राहकों को अपने सामान के लिए थोड़ा इंतज़ार करना पड़े, लेकिन इससे काम करने वाले लोगों का भारी तनाव कम हो जाएगा।
खासकर उन युवाओं, महिलाओं और दिव्यांग लोगों के लिए यह बड़ी राहत है जो अपनी आजीविका के लिए इस काम पर निर्भर हैं। भारत में इस तरह काम करने वालों की संख्या हर साल 13% की रफ्तार से बढ़ रही है। इसलिए, ऐसे नियम बनाना बहुत ज़रूरी है ताकि हमारी डिजिटल अर्थव्यवस्था सिर्फ मशीनों की तरह न चले, बल्कि इसमें काम करने वाले इंसानों की सुरक्षा और गरिमा का भी ख्याल रखा जाए।
डिस्क्लेमर: यह लेख / न्यूज आर्टिकल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और प्रतिष्ठित / विश्वस्त मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। पाठक कृपया स्वयं इस की जांच कर सूचनाओं का उपयोग करे ॥
प्रिय पाठकों एवं दर्शकों, प्रतिदिन भारत सरकार , दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय एवं दिल्ली राजनीति , दिल्ली मेट्रो, दिल्ली पुलिस तथा दिल्ली नगर निगम, NDMC, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की ताजा एवं बड़ी खबरें पढ़ने के लिए hindi.tennews.in : राष्ट्रीय न्यूज पोर्टल को विजिट करते रहे एवं अपनी ई मेल सबमिट कर सब्सक्राइब भी करे। विडियो न्यूज़ देखने के लिए TEN NEWS NATIONAL यूट्यूब चैनल को भी ज़रूर सब्सक्राइब करे।
टेन न्यूज हिंदी | Ten News English | New Delhi News | Greater Noida News | NOIDA News | Yamuna Expressway News | Jewar News | NOIDA Airport News.
Discover more from टेन न्यूज हिंदी
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
टिप्पणियाँ बंद हैं।